नागौर

उजड़ा सुहाग, ससुर बीमार, अब जिंदगी से जंग लड़ रही बसंती

ह्यूमन एंगल स्टोरी: गेहड़ा कला गांव की बसंती पर विपदाओं का पहाड़ टूट चुका है। पति दिनेश की आकस्मिक मौत हो गई। दो बच्चों का पालन पोषण करने वाला सहारा छीन गया। ससुर बीमार है, उनके उपचार और परिवार के पालन पोषण की जिम्मेदारी बसंती पर आ गई है।
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Jun 30, 2026
बड़ी खाटू . गेहडा कला गाँव में बसंती अपने मासूम के साथ विलाफ करती हुयी। बड़ी खाटू . गेहडा कला गांव में बसंती अपने मासूम के साथ विलाप करते हुए।
बड़ी खाटू . गेहडा कला गाँव में बसंती अपने मासूम के साथ विलाफ करती हुयी। बड़ी खाटू . गेहडा कला गांव में बसंती अपने मासूम के साथ विलाप करते हुए।

नागौर (बड़ी खाटू). कभी हंसी-खुशी से भरे रहने वाले बसंती के परिवार में अब सन्नाटा पसरा है। गेहड़ा कला गांव की 26 वर्षीय बसंती की जिंदगी में 21 जून को उस वक्त सबकुछ बदल गया, जब घर के एकमात्र कमाने वाले पति 29 वर्षीय दिनेश पुत्र पेमाराम मेघवाल की बीमारी से मौत हो गई। शादी के महज सात वर्ष बाद ही बसंती का सुहाग उजड़ने से दो मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।

दिनेश पिछले एक सप्ताह से बीमार था। काफी उपचार के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। उनके निधन के बाद से पूरा परिवार गहरे सदमे में है। घर के इकलौता कमाने वाले सदस्य के दुनिया छोड़ जाने से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

मम्मी, पापा कब आएंगे...

बसंती की शादी वर्ष 2019 में बड़ीखाटू निवासी दिनेश से हुई थी। परिवार की खुशियां धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थीं, लेकिन अचानक आई इस विपदा ने सब कुछ बदल दिया। आज उसके चार वर्ष और दो वर्ष के मासूम बच्चों की आंखों में एक ही सवाल है "मम्मी, पापा कब आएंगे?" इस सवाल का जवाब बसंती के पास भी नहीं है। बच्चों की मासूम पुकार सुनकर गांव के लोगों की आंखें नम हो जाती हैं।

ससुर के श्वास की बीमारी

परिवार की स्थिति इसलिए भी अधिक दयनीय है क्योंकि दिनेश के पिता पेमाराम लंबे समय तक खनन क्षेत्र में कार्य करने के कारण श्वास एवं फेफड़ों की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। पिछले दो वर्षों से वे दवाइयों के सहारे जीवन गुजार रहे हैं और स्वयं काम करने की स्थिति में नहीं हैं।अब पूरे परिवार की जिम्मेदारी बसंती के कंधों पर आ गई है। पति को बचाने के लिए उसने हरसंभव प्रयास किए, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। एक तरफ पति का वियोग, दूसरी ओर दो मासूम बच्चों का भविष्य और बीमार ससुर की देखभाल,इन सबके बीच बसंती का संघर्ष हर दिन कठिन होता जा रहा है।

समाजसेवियों से आस

ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे संकट की घड़ी में सरकार, जनप्रतिनिधियों और समाजसेवी संगठनों को आगे आकर इस परिवार की आर्थिक सहायता करनी चाहिए। यदि समय पर सहयोग मिला तो दो मासूम बच्चों का भविष्य संवर सकता है और बसंती को जीवन की इस कठिन राह में कुछ सहारा मिल सकेगा।

Updated on:
30 Jun 2026 12:05 pm
Published on:
30 Jun 2026 12:04 pm