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नागौर नगर परिषद चुनाव: कई दिग्गज हारे, भाजपा सबसे बड़ा दल, RLP को 1 सीट, अब अचानक कांग्रेस ने बढ़ाई हलचल

नगर परिषद चुनाव: भाजपा के प्रत्याशी पहले से ही बाड़ेबंदी में हैं। परिणाम के बाद कांग्रेस ने भी बड़ा फैसला लिया। 60 सदस्यीय नगर परिषद में बहुमत के लिए 31 पार्षदों की जरूरत है। भाजपा को 21, कांग्रेस को 15, RLP को 1 सीट मिली है। 23 निर्दलीय पार्षद पूरे बोर्ड की सत्ता का गणित बदलने की स्थिति में हैं।
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Nagar Parishad Result : फाइल फोटो पत्रिका

नागौर नगर परिषद चुनाव में इस बार भी मतदाताओं ने किसी एक राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया। 60 वार्डों के परिणाम में भाजपा 21 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल बनकर उभरी, जबकि कांग्रेस 15 वार्ड ही जीत सकी। आरएलपी को एक सीट मिली, लेकिन सबसे बड़ा उलटफेर निर्दलीयों ने किया। शहर के 23 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज कर भाजपा-कांग्रेस दोनों के समीकरणों को चुनौती दी है। ऐसे में अब सभापति की कुर्सी तक पहुंचने के लिए निर्दलीयों के समर्थन की जरूरत होगी।

वार्ड 1 से ही निर्दलीयों का दबदबा

परिणामों पर नजर डालें तो वार्ड 1 में भजनसिंह ने निर्दलीय के रूप में 593 वोट लेकर 128 वोट से जीत दर्ज की। यहां भाजपा पांचवें नम्बर पर और कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही। वार्ड 6 में मनोहर सिंह, वार्ड 7 में धनराज और वार्ड 11 में सुनीता ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की। वार्ड 14 में महेश कुमार, वार्ड 15 में नीलम और वार्ड 16 में रोहित सोनी ने भी निर्दलीय के रूप में बाजी मारी। वार्ड 15 में दो पूर्व सभापति नीतू तोलावत व मीतू बोथरा चुनाव लड़ रही थी, लेकिन मतदाताओं ने उन्हें तीसरे और चौथे स्थान पर धकेल दिया। यहां दूसरे नम्बर पर भी निर्दलीय मीना रही।

भाजपा ने शुरू में ली लीड, अंत में पिछड़ी

भाजपा ने शुरुआती कई वार्डों में अच्छा प्रदर्शन किया। वार्ड 2, 3, 4 और 5 में भाजपा प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। हालांकि वार्ड 5 में मुकाबला बेहद करीबी रहा, जहां भाजपा के दिलीप ने निर्दलीय लालचंद को केवल 5 वोट से हराया। इसके बाद वार्ड 8 और 9 में भाजपा ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। वार्ड 9 में रघुवीर 472 वोट से विजयी रहे।

वार्ड 20-21 में कांग्रेस का मजबूत प्रदर्शन

कांग्रेस ने भी कई वार्डों में निर्णायक जीत दर्ज की। सबसे चर्चित वार्ड 10 में कांग्रेस के प्रवीण सोलंकी ने भाजपा प्रत्याशी को 297 वोट से हराया। यहां उनके मामा मांगीलाल भाटी ने भाणजे प्रवीण को हराने के लिए पूरा जोर लगाया था, लेकिन पार नहीं पड़ी। वार्ड 19 में कांग्रेस की मंजू ने 223 वोट से जीत हासिल की। वार्ड 20 में कांग्रेस के पूर्व उप सभापति सैयद सदाकत अली ने 945 वोट लेकर 628 वोट की बड़ी जीत दर्ज की। वार्ड 21 में कांग्रेस की मिस्बाह बानो ने 1085 वोट हासिल कर भाजपा प्रत्याशी को 793 वोट के बड़े अंतर से हराया। यह नगर परिषद के प्रमुख एकतरफा मुकाबलों में शामिल रहा।

वार्ड 22 से 30 तक फिर बदला चुनावी मिजाज

वार्ड 22 में निर्दलीय रेशमा सोलंकी ने भाजपा प्रत्याशी को 66 वोट से हराया। वार्ड 24 में भाजपा के ओमप्रकाश ने 462 वोट से जीत हासिल की। सबसे रोमांचक मुकाबला वार्ड 25 में रहा, जहां निर्दलीय यासिन ने निर्दलीय पवन कुमार को सिर्फ 4 वोट से हराया, यह नगर परिषद की सबसे छोटी हार रही। वार्ड 26 में भी निर्दलीय तौफीक खान केवल 16 वोट से जीते, जबकि वार्ड 27 में कांग्रेस के शाहरुख खान ने भाजपा प्रत्याशी को 13 वोट से हराया। इसके बाद वार्ड 28 और 29 में भाजपा ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की।

वार्ड 31 से 36 तक भाजपा का दबदबा

ताऊसर कस्बे से जुड़े वार्ड 31 से 36 तक भाजपा ने लगातार छह वार्डों में जीत दर्ज कर अपना मजबूत गढ़ दिखाया। वार्ड 31 में रुकमा ने 506 वोट, वार्ड 32 में लासादेवी ने 534 वोट और वार्ड 33 में संतोष ने 569 वोट के बड़े अंतर से जीत हासिल की। वार्ड 34, 35 और 36 में भी भाजपा प्रत्याशी विजयी रहे।

निर्दलीयों ने फिर दिखाई ताकत

वार्ड 37 और 38 में निर्दलीय प्रत्याशी जीते। वार्ड 38 में अजीजुद्दीन अंसारी ने 914 वोट लेकर 543 वोट के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। यहां भाजपा प्रत्याशी को मात्र 8 और कांग्रेस प्रत्याशी को 25 वोट मिले। वार्ड 39, 40 और 41 में कांग्रेस ने लगातार तीन सीटें जीतीं। वार्ड 39 में दीपक सैनी 547 वोट से, वार्ड 40 में सितारा बानो 630 वोट से और वार्ड 41 में मोहम्मद शरीफ 702 वोट से विजयी रहे। वार्ड 43 में भाजपा के छगनाराम ने कांग्रेस प्रत्याशी धमेन्द्र पंवार को 89 वोट से हराया, जबकि वार्ड 44 कांग्रेस के खाते में गया। वार्ड 45 में भाजपा के फुलचंद टाक ने कांग्रेस प्रत्याशी राजेन्द्रसिंह को 831 वोट के बड़े अंतर से हराया।

निर्दलीय कड़वा ने दर्ज की सबसे बड़ी जीत

वार्ड 48 में निर्दलीय प्रीती अरोड़ा, वार्ड 49 में शबनम और वार्ड 50 में सिराजुद्दीन विजयी रहे। वार्ड 52 में निर्दलीय सुरेश ने 540 वोट से जीत दर्ज की। वार्ड 53 में कांग्रेस, जबकि वार्ड 54 और 55 में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे। वार्ड 56 और 57 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि वार्ड 58 में भाजपा के गुलाबचंद सांखला विजयी रहे। वार्ड 59 और 60 में एक बार फिर निर्दलीयों ने बाजी मारी। वार्ड 60 में गोविंद कड़वा ने 1120 वोट लेकर भाजपा प्रत्याशी को 926 वोट के बड़े अंतर से हराया। यह पूरे नगर परिषद चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी की सबसे बड़ी जीत में शामिल है।

सबसे करीबी मुकाबले

नतीजों में कई वार्डों में जीत-हार का अंतर बेहद कम रहा। वार्ड 25 में जीत का अंतर केवल 4 वोट, वार्ड 5 में 5 वोट, वार्ड 16 और 27 में 13-13 वोट, वार्ड 26 में 16 वोट, वार्ड 11 में 19 वोट और वार्ड 15 में 28 वोट रहा। यानी चुनावी परिणाम कुछ वोटों के अंतर से पूरी तरह बदल सकता था।

कहीं पिता-पुत्र हारे तो कहीं पति-पत्नी जीते

चुनाव में कई रोचक परिणाम देखने को मिले। कांग्रेस से टिकट लेने वाले पिता-पुत्र राजेन्द्रसिंह व धमेन्द्र पंवार चुनाव हार गए, वहीं भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले पति-पत्नी नेमीचंद व मंजू जीत गए। इसी प्रकार पूर्व सभापति कृपाराम सोलंकी के पुत्र प्रवीण सोलंकी व पुत्र वधु रेशमा सोलंकी ने चुनाव जीता।

सबसे बड़ा सवाल अब बोर्ड गठन का

60 सदस्यीय नगर परिषद में बहुमत के लिए 31 पार्षदों की जरूरत है। भाजपा 21 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल है। बहुमत से 10 सीट दूर है। कांग्रेस 15 सीटों के साथ भाजपा से छह सीट पीछे है। आरएलपी के पास एक सीट है। 23 निर्दलीय पार्षद अब पूरे बोर्ड की सत्ता का गणित बदलने की स्थिति में हैं। निर्दलीयों ने केवल मामूली अंतर से ही नहीं, बल्कि कई वार्डों में बड़े अंतर से जीत दर्ज की है।

कांग्रेस व निर्दलीय पार्षदों की बाड़ेबंदी

नगर परिषद में सभापति के चुनाव को लेकर सोमवार रात को बड़ा उलटफेर हो गया। भाजपा ने अपने प्रत्याशियों को पहले ही बाड़ेबंदी में रख लिया था। चुनाव परिणाम के बाद निर्वाचित पार्षदों को पाली में रखा हुआ है। दूसरी तरफ कांग्रेस प्रत्याशी परिणाम आने तक स्वतंत्र थे, जो सोमवार को मतगणना स्थल पर भी पहुंचे। इनमें से जो पार्षद निर्वाचित हुए, उन्हें देर रात एक जगह एकत्र किया गया।

देर रात तक आधे से ज्यादा कांग्रेसी पार्षद और निर्दलीय पार्षद डीडवाना मार्ग पर एक कॉलेज के परिसर में एकत्र किए गए। इसी जगह पर पहले भाजपा प्रत्याशियों को बाड़ेबंदी में ले जाने से पहले एकत्र किया गया था। ऐसे में कयास सही लग रहे है कि भाजपा बोर्ड और सभापति बनाने के लिए देर रात यह उलटफेर चला।

भाजपा से जुड़े एक नेता ने दावा किया कि नागौर में भले ही बहुमत के लिए आवश्यक पार्टी प्रत्याशी नहीं जीते हो, लेकिन निर्दलीय व कुछ कांग्रेसी पार्षदों का साथ उन्हें मिल जाएगा। प्रयास तो निर्विरोध सभापति का चुनाव कराने का भी चल रहा है।

दूसरी तरफ कांग्रेस जिलाध्यक्ष हनुमान बांगड़ा का कहना है कि ऐसी नौबत नहीं आएगी। कांग्रेस मजबूती से सभापति के चुनाव में उतरेगी। दूसरे पक्ष के साथ पार्टी पार्षद जाने के सवाल पर बांगड़ा ने कहा कि मेड़ता रोड में भी ऐसा प्रयास किया गया था, परन्तु वहां भी हमारे समर्थक पार्षदों को वापस ले आए थे, यहां नागौर में भी पक्ष में ले आएंगे।