डॉ. फगोडिय़ा ने बाजरा के ‘तूंतड़ा’ से बनाए केमिकल रहित इको फ्रेंडली तथा बायोडिग्रेडेबल हैंडीक्राफ्ट आइटम्स - सीएसआईआर- एएसपीआईआरई योजना के अंतर्गत तीन वर्षों के लिए मिलेगा 30 लाख का अनुसंधान अनुदान
नागौर. जिला मुख्यालय के श्री बी आर मिर्धा राजकीय महाविद्यालय की सहायक आचार्य डॉ. सरोज कुमारी फगोडिय़ा के शोध प्रस्ताव का वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) - एएसपीआईआरई योजना के अंतर्गत चयन किया गया है। यह घोषणा नई दिल्ली में आयोजित वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) की समीक्षा बैठक के दौरान की गई। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बायोमैन्युफैक्चरिंग और बायो-फाउंड्री भारत के भविष्य की जैव-अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाएंगे और हरित विकास को बढ़ावा देंगे ‘सीएसआईआर- एएसपीआईआरई योजना के तहत 300 महिला वैज्ञानिकों के लिए अनुसंधान अनुदान की घोषणा की गई है, जिसमें नागौर की सहायक आचार्य डॉ. सरोज कुमारी भी एक है।
मिर्धा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हरसुखराम छरंग ने बताया कि महाविद्यालय की वनस्पति शास्त्र की सहायक आचार्य डॉ. सरोज कुमारी फगोडिया के शोध प्रस्ताव का वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) - एएसपीआईआरई योजना के अंतर्गत चयन किया गया है। जिसके तहत डॉ. सरोज को बाजरे की भूसी (तूंतड़ा) से निर्मित खाद्य भंडारण कंटेनर में रखे हुए फलों, सब्जियों तथा अन्य खाद्य सामग्री की शेल्फ लाइफ तथा पोषक तत्वों पर पडऩे वाले प्रभाव के शोध कार्य को लेकर 3 वर्षों के लिए 30 लाख रुपए अनुसंधान अनुदान दिया जाना स्वीकृत किया गया है। छरंग ने बताया कि सीएसआईआर - एएसपीआईआरई योजना के तहत पूरे भारत से करीब 3000 प्रस्ताव प्राप्त हुए। स्क्रीनिंग और अनुसंधान समितियां की समीक्षा के पश्चात 300 महिला वैज्ञानिकों के शोध प्रस्ताव का अंतिम रूप से चयन किया गया। इसमें डॉ. सरोज का चयन होना महाविद्यालय के लिए गौरव का विषय है। इस उपलब्धि से महाविद्यालय में शोध कार्यों को बढ़ावा मिलेगा। इस मौके पर महाविद्यालय परिवार ने डॉ. फगोडिया को बधाई देते हुए उन्हें इसी प्रकार उत्तरोत्तर प्रगति करने की शुभकामनाएं दी।
डॉ. सरोज ने बाजरे के तूंतड़ा से बनाए थे इको फ्रेंडली आइटम
मिर्धा कॉलेज की सहायक आचार्य डॉ. सरोज ने बाजरे के ‘तूंतड़ा’ से इको फ्रेंडली हैंडीक्राफ्ट के क्षेत्र में नवाचार करते हुए कई सुंदर एवं आकर्षक आइटम बनाए थे, जो बहुत कम लागत में तैयार किए गए। साथ ही वजन में बहुत हल्के होने के साथ मजबूत एवं केमिकल रहित तथा बायोडिग्रेडेबल थे। डॉ. सरोज के इस नवाचार को लेकर राजस्थान पत्रिका ने गत 5 मार्च को ‘बाजरे के तूंतड़ा से बनाए इको फ्रेंडली हैंडीक्राफ्ट आइटम्स’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था।