नागौर

ये कैसी शिक्षा : गांवों में असाक्षर महिलाओं से पीछे शहर की पढ़ी-लिखी माताएं, बच्चों को कम करवा रहीं स्तनपान

स्तनपान सप्ताह पर विशेष : मां का दूध शिशु के लिए भी लाभदायक, पढ़ी-लिखी महिलाएं बोतल से बच्चों को देती हैं दूध
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Aug 01, 2026
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ब्रेस्टफीडिंग करवाती महिला की प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- freepik)

नागौर. शिक्षा को आमतौर पर बेहतर स्वास्थ्य व्यवहार और जागरूकता का आधार माना जाता है, लेकिन स्तनपान के मामले में तस्वीर इसके उलट नजर आ रही है। जिले सहित प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जहां कम पढ़ी-लिखी महिलाएं आज भी परंपरागत तरीके से अपने शिशु को जन्म के तुरंत बाद स्तनपान कराना प्राथमिकता मानती हैं। वहीं पढ़ी-लिखी और शहरी महिलाओं में यह प्रवृत्ति कम हो रही है। शिक्षित माताएं सुविधा, नौकरी, शरीर की बनावट को लेकर भ्रांतियों या आधुनिक जीवनशैली से शुरुआती दिनों से ही शिशुओं को बोतल का दूध या फार्मूला फीड देने लगी हैं। चिकित्सकों का कहना है कि ग्रामीण महिलाएं जहां स्तनपान कराने से जरा भी नहीं हिचकिचाती, वहीं पढ़ी-लिखी महिलाएं अक्सर बोतल का दूध या फार्मूला फीड देने के बारे में सबसे पहले पूछती हैं। इसका असर न केवल बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, बल्कि माताओं के स्वास्थ्य पर भी दिखाई दे रहा है।

चिकित्सकों के अनुसार जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और छह माह तक केवल मां का दूध देना शिशु के लिए संपूर्ण पोषण, रोग प्रतिरोधक क्षमता और स्वस्थ विकास की सबसे प्रभावी गारंटी है। वहीं स्तनपान से मां में प्रसवोत्तर रक्तस्राव कम होता है। स्तन व अंडाशय के कैंसर का खतरा घटता है। मां और शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत होता है। इसके बावजूद आधुनिकता की दौड़ में प्राकृतिक और वैज्ञानिक रूप से सबसे सुरक्षित पोषण का विकल्प पीछे छूटता जा रहा है। विश्व स्तनपान सप्ताह (1 से 7 अगस्त) के अवसर पर यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग और समाज, दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

स्तनपान : एक सामूहिक जिम्मेदारी

हर साल 1 अगस्त से 7 अगस्त तक मनाया जाने वाला ‘विश्व स्तनपान सप्ताह’ हमें याद दिलाता है कि भले ही स्तनपान मां का व्यक्तिगत कार्य है, लेकिन इसे सफल बनाना पूरे समाज की जिम्मेदारी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और यूनिसेफ जीवन के पहले 6 महीनों तक केवल स्तनपान कराने और उसके बाद 2 वर्ष या उससे अधिक समय तक पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखने की सलाह देते हैं।

समर्थन की आवश्यकता: कोई भी मां अकेले यह यात्रा पूरी नहीं कर सकती। स्तनपान को बनाए रखने के लिए माताओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, सवैतनिक मातृत्व अवकाश, अनुकूल कार्यस्थल और परिवार के सहयोग की आवश्यकता होती है।

स्तनपान ही सर्वोत्तम विकल्प क्यों?

विशेषज्ञों के अनुसार स्तनपान के लाभ केवल सामान्य पोषण तक सीमित नहीं हैं, इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ती है। प्रसव के तुरंत बाद आने वाला गाढ़ा पीला दूध (कोलस्ट्रम) एंटीबॉडी, श्वेत रक्त कोशिकाओं और सुरक्षात्मक प्रोटीन से भरपूर होता है। यह शिशु के लिए पहले प्राकृतिक टीके की तरह काम करता है। जो आंतों की परत को ढंकता है ताकि सांस और पेट के संक्रमण से बचाव हो सके।

मिथक बनाम सत्य: भ्रांतियों को दूर करना जरूरी

पुरानी भ्रांतियां नई माताओं के आत्मविश्वास को कमजोर कर सकती हैं।

मिथक - छोटे स्तनों में कम दूध बनता है।

सत्य - स्तन का आकार वसायुक्त ऊतकों से तय होता है, दूध बनाने वाले ग्रंथियों से नहीं। आकार का दूध की मात्रा या आपूर्ति से कोई संबंध नहीं है।

मिथक - स्तनपान कराने में बिल्कुल दर्द नहीं होना चाहिए।

सत्य - शुरुआती दिनों में हल्की संवेदनशीलता सामान्य है। हालांकि, तेज या लगातार दर्द होना गलत लैच होने से हो सकता है।

मिथक - फार्मूला दूध पीने वाले बच्चे बेहतर सोते हैं, इसलिए मां का दूध पर्याप्त नहीं है।

सत्य - फार्मूला दूध की प्रोटीन संरचना के कारण इसे पचने में अधिक समय लगता है। जिससे बच्चा लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करता है। स्तनपान करने वाले बच्चों का बार-बार जागना जैविक रूप से सामान्य है।

मिथक - अगर आप बीमार हैं तो स्तनपान बंद कर देना चाहिए।

सत्य - सर्दी-जुकाम या पेट की हल्की बीमारी जैसी सामान्य बीमारियां दूध के जरिए बच्चे तक नहीं फैलती। वास्तव में, आपका शरीर उस बीमारी से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाता है जो दूध के माध्यम से बच्चे तक पहुंचकर उसे सुरक्षित रखती हैं।

नवजात को मां का दूध...घट रही प्रवृत्ति चिंताजनक

- एनएफएचएस - 5 (2019-21) के अनुसार, भारत में 6 माह से कम उम्र के करीब 64% शिशुओं को केवल मां का दूध मिलता है।

- एनएफएचएस -6 (2023-24) के अनुसार, देश में 6 माह से कम उम्र के करीब 56% शिशुओं को केवल मां का दूध मिलता है। जो चिंता का विषय माना जा रहा है।

- राजस्थान में 71% शिशुओं को जन्म के बाद पहले 6 माह तक केवल मां का दूध मिलता है। परन्तु जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने की दर महज 40% ही है। जबकि यह नवजात की मृत्यु दर कम करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

एक्सपर्ट कमेंट : स्तनपान का सबसे बड़ा योगदान

बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में, मुझसे अक्सर पूछा जाता है कि वह कौन सा एकमात्र प्रयास है जो बच्चे के जीवनभर के स्वास्थ्य में सबसे बड़ा योगदान देता है? मेरा जवाब हमेशा एक ही होता है, स्तनपान। यह बच्चे के साथ मां के लिए भी लाभदायक है। प्रसव के तुरंत बाद स्तनपान कराने से प्रसूता के गर्भाशय को अपनी सामान्य स्थिति में आने में मदद मिलती है। अत्यधिक रक्तस्राव कम होता है। दीर्घकालिक रूप से, यह मां में टाइप 2 मधुमेह, हृदय रोग और ओवरी या ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम करता है। इसके अतुलनीय चिकित्सा लाभों के बावजूद, नई माताओं को अक्सर भ्रामक सलाह, सामाजिक दबाव और सांस्कृतिक धारणाओं (मिथकों) का सामना करना पड़ता है।

- डॉ. विकास चौधरी, वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ, जेएलएन अस्पताल, नागौर

Updated on:
01 Aug 2026 11:05 am
Published on:
01 Aug 2026 11:05 am