नागौर. नगर परिषद के वार्डों के परिसीमन के जारी हुए वार्डों के प्रारूप को लेकर भारी विरोध शुरू हो गया है। आम से लेकर शहर के गणमान्य नागरिकों ने परिसीमन के दौरान हुई विसंगति के साथ ही गलत परिसीमन किए जाने के आरोप लेकर असंतोष के स्वर अब तल्ख होने लगे हैं। आक्रोश का अंदाजा […]
नागौर. नगर परिषद के वार्डों के परिसीमन के जारी हुए वार्डों के प्रारूप को लेकर भारी विरोध शुरू हो गया है। आम से लेकर शहर के गणमान्य नागरिकों ने परिसीमन के दौरान हुई विसंगति के साथ ही गलत परिसीमन किए जाने के आरोप लेकर असंतोष के स्वर अब तल्ख होने लगे हैं। आक्रोश का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि खुद नगरपरिषद सभापति मीतू बोथरा की ओर से परिसीमन में प्रावधानों का खुला उल्लंघन करने को लेकर जहां व्यक्ति विशेष को फायदा पहुंचाए जाने का आरोप लगाते हुए इसे नए सिरे से कराए जाने का आग्रह करते हुए जिला कलक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है, वहीं माली समाज के अध्यक्ष कृपाराम देवड़ा ने भी ताऊसर एवं चैनार को नियमों के खिलाफ शामिल किए जाने को लेकर असंतोष जताते हुए इसे पूर्ववत स्थिति में किए जाने की मांग की है।
नगरपरिषद के वार्डों हुए परिसीमन को लेकर विरोध में सभापति मीतू बोथरा की ओर से खुलकर सामने आने के बाद स्थिति विकट होती नजर आने लगी है। स्पष्ट है कि परिसीमन किए जाने की प्रक्रिया के दौरान सभापति बोथरा से न इस संबंध में परिषद की ओर से कोई मशविरा लिया गया, और न ही इसकी पूरी जानकारी दी गई। जबकि शहर का प्रथम नागरिक होने के नाते परिषद को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी। ऐसा किया गया हो तो फिर इस तरह विरोध की स्थिति उत्पन्न नहीं हो पाती। सभापति बोथरा ने ज्ञापन में उल्लिखित किया है कि परिसीमन की प्रक्रिया में प्रावधानों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। व्यक्ति विशेष यानि की कांग्रेसी मानसिकता वालों को लाभ पहुंचाने की नीयत से ही नियमों को ताक पर रखकर परिसीमन कर दिया गया। यही वजह है कि वार्ड 7, 8, वार्ड 51, 52, वार्ड 56,57, वार्ड 58, 59 की परस्पर सीमाएं ही नहीं मिलती है। इसके साथ वार्ड 52, 53, 54, 55, 56, 57, 58 एवं 59 की सीमाएं पूरी तरह से काल्पनिक है। इसको बनाने में नियमों के खिलाफ जाते हुए जनसंख्या विभाजन का आधार ही नहीं लिया गया। इसी प्रकार वार्ड 53 में शामिल किए गए ताऊसर ब्लॉक के वार्डों की जनसंख्या का उल्लेख जान-बूझकर नहीं किया गया। ऐसा किए जाने पर जनसंख्या निर्धारित अधिकतम जनसंख्या से अधिक होने की स्थिति में फिर इसको शामिल नहीं कर पाते। विसंगति से परिपूर्ण वार्ड परिसीमन के प्रारूप के नक्शा को सार्वजनिक स्तर पर कहीं भी चस्पॉ नहीं किया जाना इस पूरे परिसीमन को संदेह के कठघरे में खड़े कर देता है। नक्शा लगाया जाता तो फिर लोग आपत्ति करते, लेकिन इसे जानकर नहीं लगाया कि हर कोई इसका विरोध न करने लगे। इसी तरह भास्कर खजांची ने भी दिए गए ज्ञापन में गठित वार्ड 36 में ब्लॉक संख्या 84, 96, 98 च 99 को नियम विरुद्ध बताते हुए नए से परिसीमन कराए जाने की मांग की है।
सैंकड़ों ग्रामीणों के साथ माली समाज अध्यक्ष पहुंचे कलक्ट्रेट
माली समाज के अध्यक्ष कृपाराम देवड़ा ने दिए गए ज्ञापन में कहा कि नगर परिषद नागौर की 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या एक लाख पाँच हजार है। इसमें नवसर्जित वाडी की संख्या भी 60 है। आय का श्रोत विभिन्न नगरिय कर व स्वायत शासन विभाग के जारी फण्ड से होता है। जबकि ग्राम पंचायत ताऊसर व चेनार एक पंचायत राज विभाग की स्वायतशासी संस्था है। पंचायतराज विभाग से इसे विभिन्न प्रकार के मद में बजटों का आवंटन होता है। जन प्रतिनिधि के रूप में ग्राम पंचायत ताऊसर व चेनार में एक एक सरपच एक-एक पंचायत समिति सदस्य, एक-एक जिला परिषद सदस्य व 30 वार्ड सदस्य चुने जाते है। इनसे इनको वंचित होना पड़ेगा। इसके साथ ही भूमि भवन कर एवं भवन निर्माण स्वीकृति आदि लगने लगेंगे। जबकि यह क्षेत्र पूरी तरह से पशुपालन एवं कृषि आधारित है। इसके साथ ही जनसंख्या का आधार भी माने तो चैनार एवं ताऊसर को नगरपरिषद के वार्डों में शामिल नहीं किया जा सकता है। अफसोसजनक स्थिति है कि क्षेत्रीय लोगों से न तो प्रस्ताव लिए गए, और न ही उनसे राय ली गई। यह पूरी तरह से प्रावधाों के खिलाफ है।