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‘रायड़ा’के फेर में फंसी ‘सरसों’, एमएसपी का लाभ सिर्फ 7 किसानों को

नागौर क्षेत्र में सरसों की फसल की गिरदावरी में रायड़ा प्रदर्शित, सरकारी खरीद एजेंसी के पोर्टल ने रिजेक्ट कर दिए पंजीयन

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सरसों की फसल

सरसों की फसल

नागौर. अपनी भाषा अपने बोल, प्रदेश की रिवायत के लिहाज से भले ही सुकून देते हो लेकिन, सरकारी सिस्टम में इनका उपयोग कई बार भारी पड़ जाता है। नागौर में इस बार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरसों की खरीद में यही गफलत किसानों पर भारी पड़ गई। सरसों को यहां देशी भाषा में ‘रायड़ा’ कहकर बुलाते है। पटवारियों ने फसल की गिरदावरी में भी सरसों को रायड़ा दर्ज कर दिया। जिसे सरकारी खरीद एजेंसी के सिस्टम ने रिजेक्ट कर दिया है। नतीजन पूरे जिले में केवल सात किसान को ही एमएसपी का लाभ मिल पाया।

सरकारी खरीद के लिए नैफेड ने प्रदेश में राजफैड को अधिकृत कर रखा है। राजफैड की ओर से सरसों उत्पादक किसानों से एमएसपी पर उपज बेचने के लिए ऑन लाइन पंजीयन कराए। पोर्टल पर किसान को अपने खेत के चक और खसरा नम्बर दर्ज कर पंजीयन हुए। पोर्टल ने जब इन खसरा नम्बर की ऑनलाइन अपलोड गिरदावरी से मिलान किया तो वहां सरसों की जगह रायड़ा दर्ज मिलने पर पंजीयन रिजेक्ट कर दिए।

पटवारियों की भूल पड़ी भारी

चूंकि ऑनलाइन गिरदावरी में पटवारियों ने सरसों को रायड़ा ही लिखा था। ऐसे में पोर्टल ने यहां सरसों की बुवाई होना माना ही नहीं। हालांकि सरकारी समितियों ने केन्द्र और राज्य सरकार को पत्र भेजकर इससे अवगत भी कराया। परन्तु इसका समाधान नहीं किया गया।

पहले होती रही है खरीद

पिछले सालों में भी गिरदावरी में यहां सरसों को रायड़ा के रूप में दर्ज किया जाता रहा है। हर साल एमएसपी खरीद में गिरदावरी की कॉपी अपलोड होती थी। इसमें रायड़ा को सरसों के रूप में स्वीकार कर लिया जाता था। इस बार पूरा सिस्टम ऑनलाइन और ऑटोमेटिक वेरीफिकेशन होने से अस्वीकार कर दी गई।

82 हजार एमटी उत्पादन, खरीद 13 एमटी ही

नागौर जिले में इस साल 82 हजार मीटि्रक टन सरसों का उत्पादन हुआ हैं। रायड़ा की गफलत के चलते एमएसपी पर महज सात किसानों की 13.15 एमटी सरसों ही एजेंसी ने खरीद की। यानि हजारों किसानों को बाजार मूल्य पर माल बेचना पड़ा।

प्रदेश में रबी 2025 में एमएसपी पर खरीद एवं उत्पादन

फसल का नाम - उत्पादन - लक्ष्य - खरीद - प्रतिशत

सरसों - 55,57,029 - 13,22,360- 70107.35 - 5.30

सभी आंकड़े मीट्रिक टन में

पंजीयन नहीं हो पाया

पहले गिरदावरी में सरसों की जगह रायड़ा लिखने से पंजीयन नहीं हो पाया। इससे एमएसपी पर खरीद नहीं हो पाई। यह मुद्दा उठा लेकिन बाद में सरसों के बाजार भाव अच्छे हो जाने से किसान शांत हो गए।

जयपाल गोदारा, उप रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, नागौर