नागौर. सरकारी शिक्षा की नींव खड़ी करने वाले विभाग सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) में बड़े स्तर पर कमीशन का खेल चल रहा है।
नागौर. सरकारी शिक्षा की नींव खड़ी करने वाले विभाग सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) में बड़े स्तर पर कमीशन का खेल चल रहा है। इसकी जड़ें इतनी गहरी हैं कि जिला स्तर के एक अधिकारी पिछले एक साल से उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन उच्चाधिकारी कार्रवाई करने के बजाय उल्टा उन्हें ही फंसाने की फिराक में लगे हैं। अधिकारियों से कार्रवाई की उम्मीद छोड़ चुके पीडि़त अधिकारी ने अब शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी से शिकायत की है। उनके द्वारा मंत्री को भेजे गए अधिकारियों की कारगुजारी का पुलिंदा पत्रिका के हाथ लगा है। जिसमें केजीबी विद्यालयों से कमीशन लेने सहित कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। यहां तक कि डीईओ द्वारा एक महिला शिक्षक की नियम विरुद्ध की गई प्रतिनियुक्ति के बाद एसएसए एडीपीसी ने वेतन रोका तो अधिकारियों ने पूर्व में किसी अन्य कागज पर किए गए उनके हस्ताक्षर कम्प्यूटर से स्केन करवाकर वेतन दे दिया।
चेहतों को नियम विरुद्ध प्रतिनियुक्ति पर लगाया
डीईओ गुप्ता ने अपने चेहतों की नियम विरुद्ध प्रतिनियुक्तियां भी की। इसमें एक महिला शिक्षक को नागौर ब्लॉक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय अमरपुरा से ४ अगस्त 2015 को प्रतिनियुक्ति पर केजीबी विद्यालय लाडनूं (ब्लॉक बदलकर) में लगा दिया, जबकि उक्त शिक्षिका ने 30 मार्च 2016 को अमरपुरा में कार्यग्रहण किया था। मजे की बात यह है कि केजीबी लाडनूं में एक भी पद रिक्त नहीं था। इस पर तत्कालीन बीईईओ नारायणराम ढाका ने शिक्षिका की प्रतिनियुक्ति निरस्त करने के लिए डीईओ को लिखा, लेकिन डीईओ नहीं माने। इस पर बीईईओ ने शिक्षिका का वेतन रोक दिया। इसी प्रकार अन्य चेहते शिक्षकों की प्रतिनियुक्तियां भी की गई।
बनाया दबाव, नहीं माने तो जाली दस्तखत किए
बीईईओ द्वारा वेतन रोकने के बाद जब सांदू ने एडीपीसी का पद संभाला तो उन पर दबाव बनाया गया। उधर, नागौर बीईईओ के पद पर भी रामकुमार कस्वां ने ज्वाइन कर लिया। दबाव से बात नहीं बनी तो एक दिन कस्वां के पास सांदू के हस्ताक्षर वाला पत्र गया, जिसमें शिक्षिका का वेतन जारी करने के आदेश किए हुए थे। इसकी जानकारी कस्वां ने जब सांदू को दी तो वे हतप्रभ रह गए। सांदू ने बताया कि किसी ने उनके जाली हस्ताक्षर कर दिए हैं, उन्होंने इस प्रकार के किसी कागज पर हस्ताक्षर नहीं किए। इसके बाद एडीपीसी सांदू ने 7 अप्रेल 2016 को डीईओ गुप्ता को पत्र लिखकर पूर्व एडीपीसी सांगवा द्वारा जाली दस्तावेज बनाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की अनुमति मांगी, लेकिन डीईओ ने अनुमति नहीं दी। उल्टा कुछ दिनों बाद शिक्षिका को वेतन जारी कर दिया गया।
मेरे नाम से गलत काम किए
पूर्व एडीपीसी बस्तीराम सांगवा ने मेरी अनुपस्थिति में केजीबी विद्यालयों के संस्था प्रधानों की बैठक ली। प्रतिनियुक्ति पर लगाई गई शिक्षिका का वेतन देने के लिए मेरे जाली हस्ताक्षर किए। इसकी शिकायत करने के बावजूद डीईओ सतीश कुमार गुप्ता ने सांगवा के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए उनका बचाव किया। इसलिए मुझे मंत्री जी को शिकायत करनी पड़ी।
- महिपाल सांदू, एडीईओ, प्रारम्भिक शिक्षा, नागौर
मैंने किसी के साइन नहीं किए
एडीईओ सांदू के आरोप निराधार हैं, मैंने किसी के साइन नहीं किए। जहां तक उनकी अनुपस्थिति में बैठक लेने की बात है तो यह काफी पुराना मामला है, जिसकी जांच भी हो चुकी है। एडीईओ द्वेषतावश शिकायतें कर रहे हैं।
- बस्तीराम सांगवा, बीईईओ, नागौर
एडीईओ ने ही किए हस्ताक्षर
प्रतिनियुक्ति पर लगाई गई शिक्षिका को वेतन देने के लिए एडीईओ महिपाल सांदू ने ही आदेश जारी किए और बाद में सांगवा को फंसाने के लिए झूठी शिकायत कर दी। मैंने किसी शिक्षिका की प्रतिनियुक्ति नियम विरुद्ध नहीं की। एडीईओ के सारे आरोप झूठे हैं।
- सतीश कुमार गुप्ता, डीईओ, प्रारम्भिक शिक्षा, नागौर
कल पढि़ए...
अधिकारियों की मर्जी के विरुद्ध आई शिक्षिका को कैसे किया परेशान