राज्य सरकार ने ३ से ३१ अक्टूबर तक भौतिक सत्यापन करने के दिएथे आदेश
नागौर. शिक्षा विभाग की ओर से नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत किए जाने वाले जिले के निजी विद्यालयों के भौतिक सत्यापन कार्य में विभागीय अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है। जिले के चयनित निजी विद्यालयों का भौतिक सत्यापन करने के लिए 31 अक्टूबर तक समय दिया था। प्रारम्भिक शिक्षा के निजी स्कूलों के भौतिक सत्यापन से सम्बंधित जानकारी के बारे में डीईओ रजिया सुल्ताना से जानकारी मांगने पर उन्होंने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि इस बारे में अब तक किसी बीईईओ ने जानकारी नहीं भेजी है। इतना ही नहीं आरटीई के कार्यवाहक एपीसी बाबूलाल निर्मल व डीईओ सुल्ताना से जब जिले में सत्यापन के लिए चयनित स्कूलों की संख्या व कार्मिक व अधिकारियों के कितने दल गठित किए गए के बारे में पूछा तो दोनों में से कोई भी इसकी जानकारी नहीं दे सका। यहां तक कि आरटीई के कार्यवाहक एपीसी निर्मल ने तो यह तक कह दिया कि दल गठित से हमें कोई लेना-देना नहीं है। जो भी करना है बीईईओ को ही करना है।
माध्यमिक शिक्षा में भी यही हाल
भौतिक सत्यापन के लिए चयनित जिले की माध्यमिक शिक्षा की निजी स्कूलों की बात करें तो माध्यमिक प्रथम में जिलेभर में 274 स्कूलों का भौतिक सत्यापन करने के लिए 83 पीईईओ व अन्य शिक्षकों के दल गठित किए गए हैं। जबकि माध्यमिक शिक्षा द्वितीय में 337 स्कूलों का भौतिक सत्यापन किया जाना था। लेकिन इनमें से कितने स्कूलों का सत्यापन हो गया इसकी जानकारी माध्यमिक प्रथम व द्वितीय दोनों में से किसी अधिकारी के पास नहीं है। वहीं सूत्रों का कहना है कि अब तक जिले में 40 फीसदी से अधिक ऐसी स्कूलें हैं जिनका भौतिक सत्यापन नहीं हो पाया है।
अब तिथि बढऩे का इंतजार
जिले में निजी स्कूलों के भौतिक सत्यापन कार्य को लेकर बरती जा रही लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भौतिक सत्यापन शुरू होने से अंतिम तिथि तक विभागीय अधिकारियों ने मॉनिटरिंग तो दूर यह तक पूछना उचित नहीं समझा कि कितने स्कूलों का सत्यापन हुआ कितने शेष रह गए हैं। हालांकि अब विभाग के अधिकारी भौतिक सत्यापन की अंतिम तिथि आगे बढऩे की आस लगाए बैठे हैं। जिससे निर्धारित समय पर कार्य पूरा नहीं होने का ठिकरा उनके सिर नहीं फूटे।
नहीं भेजी जानकारी
जिले में कितने स्कूलों का भौतिक सत्यापन हो पाया है इसकी जानकारी अब तक किसी बीईईओ ने नहीं भेजी है। दो दिन से पोर्टल बंद है। इसलिए सत्यापन के लिए अंतिम तिथि को आगे बढ़ाए जाने की सम्भावना है।
रजिया सुल्ताना, डीईओ, प्रारम्भिक शिक्षा, नागौर