
वाटरवक्र्स चौराहा से अजमेर रोड तक कई इलाकों में नियमों की अनदेखी, बिना अनुमति मंजिलें और सेटबैक में निर्माण की शिकायतें
नागौर. शहर की तस्वीर तेजी से बदल रही है। प्रमुख सडक़ों और बाजारों में बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो रही हैं, लेकिन इनमें से कई के निर्माण को लेकर नियमों की पालना पर शिकायतें सामने आ रही हैं। वाटरवक्र्स चौराहा से अजमेर रोड, कॉलेज रोड, गांधी चौक, सदर बाजार, बीकानेर रोड, मूण्डवा चौराहा से बस स्टैंड मार्ग और दिल्ली दरवाजा मार्ग तक कई जगह भवन निर्माण में स्वीकृत मानचित्र से अलग निर्माण, सेटबैक में निर्माण और अतिरिक्त मंजिलें बनाने के मामले तेजी से बढ़े हैं। कई मामलों में शिकायत के बाद निरीक्षण व रिपोर्ट तैयार होने के बावजूद निर्माण नहीं रुके। इसकी वजह से स्थिति अब दिनों-दिन विकट होती नजर आने लगी है।
दो मंजिल स्वीकृत, तीसरी-चौथी मंजिल तक निर्माण
शहर में भवन निर्माण के लिए नगर परिषद से अनुमति और स्वीकृत मानचित्र के अनुसार निर्माण जरूरी है। इसके बावजूद कुछ मामलों में दो मंजिल के स्वीकृत नक्शे के बाद तीसरी और चौथी मंजिल बनाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। कई स्थानों पर सेटबैक और पार्किंग के लिए निर्धारित जगह में निर्माण किए जाने की शिकायत भी परिषद तक पहुंची है। प्रमुख मार्गों पर बढ़ते निर्माण के बीच ऐसे मामलों की मौके पर जांच की मांग उठ रही है। अवैध निर्माण से संबंधित कई शिकायतें नगर परिषद के साथ जिला प्रशासन और जनसुनवाई पोर्टल तक पहुंची हैं। शिकायत मिलने पर संबंधित स्थल का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की जाती है, और उसके आधार पर शिकायत का निस्तारण किया जाता है। हालांकि कुछ शिकायतकर्ताओं का कहना है कि निस्तारण के बाद भी मौके पर निर्माण चलता रहा। एक शिकायतकर्ता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि एक निर्माण को लेकर दो बार शिकायत की गई। दोनों बार रिपोर्ट के आधार पर शिकायत का निस्तारण हुआ, लेकिन मौके पर निर्माण की स्थिति अलग बनी रही।
नियम तोडऩे पर कार्रवाई का प्रावधान
राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 में बिना अनुमति अथवा स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के प्रावधान हैं। नगर निकाय नोटिस जारी कर जवाब मांगने और निर्माण रुकवाने की कार्रवाई कर सकता है। अनधिकृत निर्माण पाए जाने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत सीज और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का भी प्रावधान है। विभागीय जानकारों की माने तो सभी सर्किलों में भवन निर्माण का सर्वे कराया जाए तो फिर सच्चाई खुद-ब-खुद सामने आ सकती है। सर्वे में स्वीकृत मानचित्र और मौके पर हुए निर्माण का मिलान करने के साथ सेटबैक और पार्किंग की स्थिति की भी पहले भी जांच की गई थी पूर्व में, लेकिन इसमें ज्यादातर निर्माण नक्शे के प्रतिकूल पाए जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। यही स्थिति अभी भी बनी हुई है।
हाईकोर्ट भी दे चुका है कार्रवाई के निर्देश
अवैध निर्माण से जुड़े मामलों में राजस्थान हाईकोर्ट निकायों को नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दे चुका है। जयपुर के चारदीवारी क्षेत्र से जुड़े मामले में न्यायालय ने अंतिम नोटिस वाले मामलों में सील और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए थे। ऐसे मामलों में स्थानीय निकायों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करनी होती है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार: जांच के बाद कार्रवाई होगी
आयुक्त का प्रभार देख रहे उपखण्ड अधिकारी गोविंद सिंह भींचर ने बताया कि भवन निर्माण से संबंधित शिकायतों की जांच कराई जाती है। स्वीकृत मानचित्र के विपरीत या बिना अनुमति निर्माण पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। शिकायतों के आधार पर संबंधित क्षेत्रों में जांच के निर्देश दिए जाएंगे।