
नागौर. अजमेर डिस्कॉम के तकनीकी निदेशक एम. सी. बाल्दी ने कहा कि बकाया वसूली में कोई रियायत नहीं बरती जाएगी। इस कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। बाल्दी ने यह जानकारी बुधवार को जिले के उपखण्डों की वसूली समीक्षा के दौरान नागौर में बातचीत के दौरान दी। उन्होंने कहा कि जिले में वसूली अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। कई जगहों पर वसूली में तेजी लाए जाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसी क्रम में नागौर नगरपरिषद से भी 38 लाख का बकाया जमा करने के लिए कहा गया है। हालांकि परिषद ने डिस्कॉम पर भी अपना बकाया बताया है तो विभाग अपने पेटे का बकाया जमा कराने के लिए तैयार है, लेकिन परिषद को भी पूरा बकाया जमा करना होगा। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागो बकाया वसूली में तेजी लाई गई है। इसी क्रम में स्थानीय निकायों को भी डिस्कॉम का पूर्ण बकाया जमा करने के लिए कहा गया है। इसके बाद भी बकाया जमा करने में हीलाहवाली हुई तो विभाग की ओर से प्रावधानों के तहत कार्रवाई होगी। एक सवाल के जवाब में कहा कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने की प्रक्रिया भी जल्द ही शुरू होगी, लेकिन अभी इसमें समय लगेगा।
तकनीकी निदेशक ने की वसूली कार्यों की समीक्षा
अजमेर डिस्कॉम के तकनीकी निदेशक एम. सी. बाल्दी ने कहा कि नागौर, मेड़ता, मूण्डवा, खींवसर एवं जायल आदि कार्यालयों में अधिशाषी अभियन्ता, सहायक अभियन्ता, कनिष्ठ अभियन्ता, सहायक राजस्व अधिकारीयों एवमं फिडर ईन्चार्जों की बैठक का आयोजन किया गया। इसमें वर्ष 2023-24 के लक्ष्य अनुसार राजस्व वसूली हेतु प्रोतसाहित किया गया। तकनीकी निदेशक बाल्दी ने कहा कि बकाया वसूली का 102 प्रतिशत का लक्ष्य दिया गया। रेवन्यु रिकवरी के लक्ष्य पूर्ण नही होने एवमं निगम कार्यों में शिथलता बरतने पर नागौर ग्रामीण के सहायक अभियंता कार्यालय के तहत दुकोसी फीडर इंचार्ज दिनेश को निलम्बित कर मुख्यालय सहायक अभियन्ता (पवसं) अ.वि.वि.नि.लि., रियॉबड़ी किया गया।
विभाग के माध्यम से होगी वसूली
बैठक में कहा गया कि नागौर उपखण्ड ग्रामीण के तहत आने वाले सरकारी कर्मचारियों में ओमप्रकाश, रामचंद्र एवं भंवरूराम पर की ओर से बकाया बिल जमा नहीं कराए जाने की स्थिति में इनके मूल विभाग के माध्यम से वसूली कराई जाएगी। इसके लिए विभाग की ओर से प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इन तीनों पर बिजली उपभोग का कुल बकाया एक लाख 12 हजार 766 रुपया है। वसूली में कोई रियायत नहीं की जाएगी।