नागौर साइबर थाना पुलिस ने आरोपियों को दो महीने की मेहनत के बाद पकड़ा, 5.54 लाख रुपए होल्ड करवाए
नागौर. जिले के गोटन थाना क्षेत्र में एक डॉक्टर को ‘डिजिटलअरेस्ट’ करके 34 लाख रुपए हड़पने के मामले में नागौर साइबर थाना पुलिस ने करीब दो महीने की मेहनत के बाद दिल्ली से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रकरण में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 34 लाख रुपए में से 5,54,919 रुपए होल्ड करवाए गए हैं।
साइबर थाना नागौर के थानाधिकारी धरम पूनिया (आरपीएस) ने बताया कि गत 21 जनवरी को गोटन निवासी जस्साराम पुत्र भागुराम को साइबर थाने में परिवाद देकर बताया कि करीब एक महीने पहले ( 28 दिसंबर 2025 को) बैंगलुरु से एक व्यक्ति का फोन आया, जिसमें उसने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ मानव तस्करी व महिलाओं को अश्लील वीडियो मैसेज भेजने को लेकर मामला दर्ज किया गया है। जेल जाने से बचना है तो रुपए देने पड़ेंगे। आरोपियों ने डॉक्टर को लगातार वीडियो कॉल करके डिजिटल अरेस्ट बनाए रखा और डरा-धमकाकर एक ही बार में 34 लाख रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करवाकर ठगी कर ली। डॉक्टर ने 34 लाख रुपए एफडी तुड़वाकर आरोपियों को ट्रांसफर की।
दिल्ली भेजी टीम
डीएसपी पूनिया ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। जिन बैंक खातों में राशि ट्रांसफर हुई थी, उनकी जानकारी जुटाने और आरोपियों की पहचान के लिए एएसआई माधुसिंह एवं कांस्टेबल माधाराम काला टीम बनाकर उन्हें दिल्ली भेजा। टीम ने खातों का सत्यापन, संदिग्ध गतिविधियों और आरोपियों की लोकेशन का बारीकी से विश्लेषण किया। इसके बाद तकनीकी जांच और सर्विलांस के आधार पर 17 मार्च 2026 को सीआई देवीलाल के नेतृत्व में पुलिस टीम को वापस दिल्ली भेजा गया। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने चार आरोपियों को दस्तयाब कर नागौर लाया, जहां पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
ये हुए गिरफ्तार
साइबर थाना पुलिस ने दिल्ली के ब्रजपुरी निवासी इमरान (40) पुत्र अबरार हुसैन, महालक्ष्मी विहार निवासी विवेक कुमार (35) पुत्र ओमवीर सिंह जाट, ब्रजपुरी निवासी सलमान (25) पुत्र नईम अहमद एवं योगेन्द्र (39) पुत्र नरेन्द्र कुमार ठाकुर को गिरफ्तार किया है। डीएसपी ने बताया कि पूरे ऑपरेशन के दौरान पुलिस टीम ने सादे वेश में रहकर आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी और महत्वपूर्ण सूचनाएं एकत्रित की, जिससे गिरफ्तारी संभव हो सकी। मामले में अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
बैंक खाते साइबर अपराधियों को दिए
गिरफ्तार आरोपियों से प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ कि वे अपने नाम से बैंक खाते और फर्म खोलकर उन्हें साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे। इन खातों का इस्तेमाल विभिन्न साइबर ठगी मामलों में किया जा रहा था। पुलिस ने बताया कि आरोपी ‘म्यूलअकाउंट’ के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने का काम करते थे।
पुलिस की अपील
नागौर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि ‘डिजिटलअरेस्ट’ जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है और पुलिस इस तरह की कार्रवाई नहीं करती। ऐसे कॉल करने वाले साइबर अपराधी होते हैं। किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता या सिम उपलब्ध न कराएं, क्योंकि यह साइबर अपराध की श्रेणी में आता है और दंडनीय है।