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मंगला योजना नहीं कर पाई पशुपालकों का मंगल, बीमा क्लेम को तरसे पशुपालक

राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2024-25 में शुरू की गई मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत पंजीकृत पशुओं की तुलना में एक फीसदी को मिल पाया क्लेम, 46 हजार से अधिक बीमित पशुओं की मौत, लेकिन 17 हजार को मिल पाया क्लेम, योजना की क्रियान्विति पर उठ रहे सवाल

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नागौर. पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा देने और पशुओं की मौत होने पर त्वरित राहत पहुंचाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने वर्ष 2024-25 में मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना शुरू की थी। सरकार का दावा था कि योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी और पशुपालकों के नुकसान की भरपाई करेगी, लेकिन आंकड़े खुद इस योजना की जमीनी हकीकत बयान कर रहे हैं। करोड़ों रुपए के प्रचार और लाखों पंजीकरण के बावजूद योजना का लाभ बेहद सीमित लोगों तक पहुंच पाया है। दो वर्षों में सवा 35 लाख से अधिक पशुओं का पंजीकरण होने के बावजूद कुल पंजीकृत पशुओं की तुलना में एक फीसदी पशुपालकों को भी क्लेम नहीं मिला ।

आंकड़ों की हकीकत

योजना के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 और 2025-26 में कुल 35 लाख 32 हजार 455 पशुओं का पंजीकरण किया गया। इनमें 15 लाख 24 हजार से अधिक पशुपालक जुड़े। सरकार ने दोनों वर्षों में 21-21 लाख पशुओं के बीमा का लक्ष्य तय किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना में पारदर्शिता, त्वरित सत्यापन और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया तो यह योजना सरकारी घोषणाओं तक सीमित रह जाएगी।

58 फीसदी की बीमा पॉलिसी जारी

प्रक्रिया के तहत लॉटरी, स्वास्थ्य प्रमाण पत्र, सर्वे और बीमा पॉलिसी जारी करने की कार्रवाई की गई, लेकिन दो वर्षों में पंजीकृत 35.32 लाख की तुलना में 20 लाख 52 हजार 643 पशुओं की बीमा पॉलिसी जारी की गई। यानी पंजीकरण के बावजूद मात्र 58.11 फीसदी पशु बीमा के दायरे में आ पाए। बड़ा सवाल क्लेम भुगतान को लेकर है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक दो वर्षों में 10 मई 2026 तक बीमित 46 हजार 755 पशुओं की मौत हो गई और जिनके बीमा क्लेम के दावे पेश किए गए। इसके मुकाबले केवल 16 हजार 962 दावों का ही भुगतान हो पाया। यानी करीब 29 हजार से ज्यादा पशुपालकों को अब तक राहत नहीं मिली। इससे साफ है कि योजना का सबसे अहम हिस्सा ‘समय पर क्लेम भुगतान’ बुरी तरह फेल साबित हो रहा है।

21 दिन में भुगतान के दावे खोखले

योजना में स्पष्ट प्रावधान था कि पशु की मृत्यु होने पर 21 दिन के भीतर क्लेम का निस्तारण कर भुगतान किया जाएगा। हकीकत यह है कि कई पशुपालक महीनों से भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों के बार-बार विभाग और बीमा कंपनी के चक्कर काटने की शिकायतें मिल रही हैं।

योजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024-25 में 37 हजार 9 क्लेम दावे आए, जिनमें से 16 हजार 842 का ही भुगतान हुआ। वर्ष 2025-26 में अब तक 9 हजार 746 दावे आए, लेकिन केवल 120 मामलों में क्लेम जारी हुआ। यह आंकड़ा योजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सरकार का दावा है कि मार्च 2026 तक 15 हजार 741 दावों का निस्तारण कर 30 करोड़ 73 लाख रुपए का भुगतान किया गया, लेकिन सवाल यह है कि बाकी हजारों पशुपालकों का क्या, जिनके पशु मर चुके हैं और जिनकी आजीविका प्रभावित हुई है।

क्लेम की प्रक्रिया लम्बी है

बीमित पशु की मृत्यु के बाद पशुपालन विभाग के डॉक्टर की ओर से डेथ सर्टिफिकेट जारी किया जाता है, इसके बाद बी प्रक्रिया बीमा कम्पनी और ट्रेजरी विभाग की है। किसी गलत व्यक्ति को भुगतान नहीं हो जाए, इसलिए हर चीज चेक करनी पड़ती है, इसलिए भुगतान में देरी हो जाती है।

- डॉ. सुरेश चंद मीणा, अतिरिक्त निदेशक, पशुधन बीमा, निदेशालय पशुपालन विभाग, जयपुर