नागौर

काम अभियंताओं का, सुरक्षा की गारंटी मांग रहे संस्था प्रधानों से; शिक्षा विभाग के आदेश पर उठे सवाल

शिक्षा विभाग का अजीब फरमार- पीईईओ/यूसीईईओ से मांगा जा रहा विद्यालय भवन की सुरक्षा का प्रमाण पत्र, जिले के जर्जर विद्यालय भवनों की मरम्मत करवाने की बजाए संस्था प्रधानों से मांगी जा रही सुरक्षा की गारंटी

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Apr 12, 2026
जिले के एक सरकारी विद्यालय का जर्जर भवन

नागौर. जिले में जर्जर हो चुके विद्यालय भवनों की मरम्मत और तकनीकी जांच करवाने के बजाय शिक्षा विभाग की ओर से संस्था प्रधानों पर दबाव बनाकर भवन की सुरक्षा का प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है। विभाग के इस आदेश को लेकर स्कूलों के प्राचार्य और पीईईओ में नाराजगी है, वहीं इसे प्रशासनिक विसंगति और जिम्मेदारियों के विपर्यास का उदाहरण बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, शिक्षा विभाग के अधिकारी पीईईओ (प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी) एवं संस्था प्रधानों के माध्यम से विद्यालय भवनों की सुरक्षा का प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि विद्यालय भवन की सुरक्षा का प्रमाण पत्र पीडब्ल्यूडी (सार्वजनिक निर्माण विभाग) के अभियंता ही दे सकते हैं, इसके लिए भी एक प्रक्रिया निर्धारित है, जिसके तहत संबंधित संस्था को निर्धारित फीस जमा करवानी होती है, उसके बाद पीडब्ल्यूडी के अभियंता निरीक्षण करके भवन की सुरक्षा से संबंधित प्रमाण पत्र जारी करते हैं। बावजूद इसके तकनीकी जिम्मेदारी शिक्षकों और संस्था प्रधानों पर डाली जा रही है।

कई भवन असुरक्षित, फिर कैसे दें प्रमाण पत्र

गौरतलब है कि जिले के कई सरकारी विद्यालय भवन पिछले लंबे समय से जर्जर हालत में हैं, जिनकी मरम्मत और तकनीकी जांच अभियंताओं की ओर से की जानी है। गत वर्ष झालावाड़ जिले में हादसा होने के बाद जिले में असुरक्षित विद्यालयों भवनों की सूची तैयार की गई थी, जिनमें से कुछ भवनों की मरम्मत के लिए विभाग की ओर से तथा कुछ भवनों के लिए जिला कलक्टर ने आपदा राहत कोष से राशि जारी की गई थी, लेकिन बड़ी संख्या में भवनों की मरम्मत नहीं हो पाई। अब सामने मानसून के सीजन को देखते हुए शिक्षा विभाग की ओर से नियमों के विपरीत, विभाग ने संस्था प्रधानों से यह प्रमाणित करने को कहा है कि उनके विद्यालय भवन सुरक्षित हैं। इस आदेश ने शिक्षकों को असमंजस में डाल दिया है, क्योंकि वे तकनीकी विशेषज्ञ नहीं हैं।

जानिए, प्रमाण पत्र में क्या मांग रहे

यह प्रमाणित किया जाता है कि पीईईओ/यूसीईईओ क्षेत्र के माध्यमिक शिक्षा / प्रारंभिक शिक्षा के संचालित समस्त विद्यालयों एवं सुरक्षा की दृष्टि से स्थानान्तरित किए गए विद्यालयों का भौतिक सत्यापन कर लिया गया है। विभाग की ओर से समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों की पालना सुनिश्चित करते हुए विद्यालय भवन सुरक्षा के संबंध में निम्नांकित बिंदुओं की पालना सुनिश्चित करते हुए विद्यालय भवन सुरक्षा के संबंध में निम्नांकित बिंदुओं की पालना सुनिश्चित कर ली गई है कि -

- समस्त कक्ष, रसोई घर, प्रयोगशाला एवं चारदीवारी इत्यादि सुरक्षित है।

- पंखे एवं विद्युत वायरिंग सुरक्षित है।

- जर्जर/क्षतिग्रस्त भवन में विद्यार्थियों को नहीं बिठाया जा रहा है।

- विद्यार्थियों के बैठने एवं शिक्षण कार्य करवाये जाने हेतु सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था कर ली गई है।

- जर्जर/क्षतिग्रस्त विद्यालयों भवनों/कक्षा-कक्षों को जमींदोज कर दिया गया है अथवा तारबंदी/बैरिकेडिंग कर पूर्णरूप से आवाजाही बंद कर दी गई है।

- जल स्रोत तथा पानी के टांके, कुएं, बावड़ी, टंकी पूर्णत: बंद, सुरक्षित और ढंके हुए हैं।

आदेश न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि जोखिम भरा

संस्था प्रधानों का कहना है कि यह आदेश न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि जोखिम भरा भी है। उनका स्पष्ट कहना है कि ‘जब व्यवस्था सीमाओं को विलीन कर देती है, तब परिणाम एक विचित्र कोलाज बन जाता है।’ उनका मानना है कि प्राचार्य का कार्य विद्यार्थियों का शैक्षणिक और नैतिक विकास करना है, न कि भवनों की संरचनात्मक मजबूती का आकलन करना। एक प्राचार्य ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि यह ऐसा ही है जैसे किसी माली से भवन निर्माण की गुणवत्ता प्रमाणित करने को कहा जाए। ‘हम बच्चों के भविष्य का निर्माण करते हैं, ईंट-पत्थरों की मजबूती जांचना हमारा कार्यक्षेत्र नहीं है।’ उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस तरह के आदेश जारी रहे, तो इससे न केवल शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव बढ़ेगा, बल्कि विद्यार्थियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।

व्यवहारिक दृष्टि से भी सही नहीं

विद्यालय भवनों की सुरक्षा का आकलन एक तकनीकी विषय है, जो केवल प्रशिक्षित अभियंता ही दे सकता है। ऐसे में यदि बिना तकनीकी ज्ञान के संस्था प्रधानों से प्रमाण पत्र लिया जाता है, तो यह गलत है। यह केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा और किसी भी दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना भी मुश्किल हो जाएगा। संस्था प्रधान केवल भवन की स्थिति बता सकते हैं।

- अर्जुनराम लोमरोड़, जिलाध्यक्ष, राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत, नागौर

Published on:
12 Apr 2026 11:29 am
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