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Nagaur: राजस्थान के 6 युवा 9 महीने से रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे, रूसी सेना में भर्ती का आरोप

Youth Missing Abroad: रोजगार, शिक्षा और पर्यटन के नाम पर विदेश भेजे गए राजस्थान के 6 युवाओं को कथित रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध में झोंके जाने का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है।

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लापता सुरेन्द्र दहिया और महावीर रणवां, पत्रिका फोटो

लापता सुरेन्द्र दहिया और महावीर रणवां, पत्रिका फोटो

Youth Missing Abroad: रोजगार, शिक्षा और पर्यटन के नाम पर विदेश भेजे गए राजस्थान के 6 युवाओं को कथित रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध में झोंके जाने का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। इस गंभीर प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने इसे राष्ट्रीय महत्व का विषय मानते हुए स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 24 अप्रेल को होगी, जिस पर अब परिजनों की उम्मीदें टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस पूरे नेटवर्क में शामिल एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

झूठे वादों के जाल में फंसे युवक

याचिका में सुरेन्द्र दहिया (कुचामन सिटी), महावीर प्रसाद रणवां (कुचामन सिटी), संदीप सुण्डा (सीकर), गोकुल सिंह (ब्यावर), मनोज शेखावत (झोटवाड़ा) और अजय गोदारा (बीकानेर) का उल्लेख किया गया है। परिजनों का आरोप है कि एजेंटों ने बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर उन्हें वैध वीजा पर रूस भेजा, लेकिन वहां पहुंचते ही परिस्थितियां बदल गईं।

पासपोर्ट जब्त, जबरन सेना में भर्ती का आरोप

परिवारों ने कोर्ट को बताया कि रूस पहुंचते ही युवाओं के पासपोर्ट और पहचान पत्र जब्त कर लिए गए। उनकी आवाजाही पर रोक लगा दी गई , उन्हें मानसिक दबाव व धमकियों का सामना करना पड़ा। कई मामलों में उन्हें ऐसी भाषा में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया, जिसे वे समझ भी नहीं सकते थे। इसके बाद उन्हें कथित रूप से रूसी सशस्त्र बलों से जुड़े सैन्य ढांचे में शामिल कर लिया गया।

युद्ध क्षेत्र से 7 महीने पहले आया आखिरी संदेश

परिजनों ने बताया कि सितंबर 2025 के आसपास अंतिम बार उनसे संपर्क हुआ था। उस दौरान युवाओं ने बताया था कि उन्हें रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़े खतरनाक इलाकों कुप्यांस्क, सेलिडोव, माकीवका और चेल्याबिंस्क में तैनात किया गया है। इसके बाद से अब तक कोई संपर्क नहीं हो पाया है। परिवारों को उनके जीवित होने, स्वास्थ्य या वर्तमान स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।

मंत्रालयों के चक्कर,नहीं मिला जवाब

परिजनों ने विदेश मंत्रालय, रूस स्थित भारतीय दूतावास, गृह मंत्रालय और राज्य सरकार से लगातार गुहार लगाई, लेकिन कोई ठोस सहायता नहीं मिल सकी। इस संबंध में वकील ऋत्विक भनोत, अध्यायन गुप्ता और आयुष शंकर की ओर से दायर याचिका में अनुच्छेद 32 के तहत सरकार से हस्तक्षेप की मांग की गई है।

इसमें कहा गया है कि यह मामला भारतीय नागरिकों के जीवन, स्वतंत्रता गरिमा और आजीविका के अधिकार से जुड़ा है। विदेश में फंसे या कथित रूप से जबरन भर्ती किए गए नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना केंद्र सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

स्थानीय स्तर पर भी नहीं मिली राहत

कुचामन क्षेत्र के ग्राम रसाल निवासी सुरेन्द्र दहिया और ग्राम बांसा निवासी महावीर रणवां के परिजनों ने बताया कि पिछले सात महीनों से उनका अपने बच्चों से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। उन्होंने कई बार कुचामन और मौलासर थानों में एजेंटों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया।