नागौर

आजादी के 75 साल बाद भी सरकारी अस्पतालों में न पूरे डॉक्टर और न ही संसाधन

नागौर जिले में चिकित्सकों के 33 फीसदी पद रिक्त, नर्सिंग ऑफिसर्स के भी कई पद रिक्त, जिला मुख्यालय के सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी व सीटी स्केन की जांच तक बंद, गांवों में छोटी-छोटी बीमारियों का उपचार करवाने के लिए आना पड़ता है नागौर

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Apr 07, 2026
JLN Hospital Nagaur

नागौर. आजादी के 75 साल बाद भी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के दावे जमीनी हकीकत में अधूरे नजर आते हैं, खासकर नागौर जिले में। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सामने आई स्थिति यह बताती है कि सरकारी अस्पतालों में न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही जरूरी संसाधन उपलब्ध हैं। जिले में चिकित्सकों के करीब 33 प्रतिशत पद रिक्त हैं, वहीं नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों की भी भारी कमी बनी हुई है।

स्थिति यह है कि जिला मुख्यालय के बड़े सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी और सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण जांच सेवाएं तक बंद पड़ी हैं, जिससे मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को छोटी-छोटी बीमारियों के उपचार के लिए भी नागौर शहर आना मजबूरी बन गई है।

जेएलएन अस्पताल में पर्ची कटवाने के लिए लगी कतारें

जिले में स्वास्थ्य ढांचे की संख्या भले ही कागजों में पर्याप्त दिखाई देती हो, लेकिन स्टाफ की कमी और संसाधनों के अभाव के कारण सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। एम्बुलेंस, उप स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों की चुनौतियां, मरीजों की परेशानियां और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की आवश्यकता गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

जिले में चिकित्सा विभाग की स्थिति

जिला अस्पताल - 2 - जेएलएन नागौर व खींवसर

उपखंड चिकित्सालय - 3 - जायल, मेड़ता व डेगाना

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र - 28

आदर्श सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र - 5

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र - 71

जनता क्लिनिक - 10

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र - 2

क्षय निवारण केन्द्र - 1 - नागौर

उप स्वास्थ्य केन्द्र - 418

जिले में 108 एम्बुलेंस - 31

जिले में 104 एम्बुलेंस - 14

मोबाइल मेडिकल वैन - 7

बाइक एम्बुलेंस - 3

चिकित्सा स्टाफ की स्थिति

पदनाम - स्वीकृत - कार्यरत - रिक्त

वरिष्ठ विशेषज्ञ - 10 - 3 - 7

कनिष्ठ विशेषज्ञ - 117 - 70 - 47

वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी - 38 - 27 - 11

चिकित्सा अधिकारी - 166 - 127 - 39

चिकित्सा अधिकारी (एलआर) - 6 - 1 - 5

चिकित्सा अधिकारी (पीजी) - 10 - 4 - 6

चिकित्सा अधिकारी (दंत) - 12 - 7 - 5

चिकित्सा अधिकारी (निश्चेतन) - 1 - 0 - 1

चिकित्सा अधिकारी (अस्थि) - 1 - 0 - 1

कुल - 375 - 249 - 126

जेएलएन अस्पताल में संविदा पर लगे कर्मचारियों को तीन महीने से मानदेय नहीं मिला तो बैठे धरने पर

नर्सिंग एवं पैरा मेडिकल स्टाफ के भी सैकड़ों पद रिक्त

इसी प्रकार जिले में खाद्य सुरक्षा अधिकारी के 13 में से 12 पद रिक्त हैं। स्वास्थ्य निरीक्षक के 3 पद स्वीकृत हैं और तीनों ही रिक्त हैं। तकनीकी सहायक के 15 में 8 पद रिक्त हैं, वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन के 15 में 10, वरिष्ठ रेडियोग्राफर के 5 में से 4, सीनियर नर्सिंग ऑफिसर के 108 में से 66, नर्सिंग ऑफिसर के 471 में से 80, फार्मासिस्ट प्रथम के 17 में से 9, महिला स्वास्थ्य दर्शिका के 85 में से 77 पद रिक्त हैं। जिले में वार्ड बॉय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 304 में से 242 पद रिक्त हैं।

जेएलएन अस्पताल में जांच कराने के लिए प्रयोगशाला के आगे लगी कतार

जेएलएन जिला अस्पताल में हर जगह कतारें

जिला मुख्यालय के जेएलएन राजकीय जिला अस्पताल में इन दिनों चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरी हुई है। मरीजों को पर्ची कटवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने, जांच कराने व दवा लेने के लिए हर जगह कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है। अस्पताल में सीटी स्केन मशीन खराब होने से पिछले काफी समय से जांच नहीं हो रही है। एक अप्रेल से सोनोलॉजिस्ट नहीं होने से सोनोग्राफी जाच भी बंद हो चुकी है। उधर, खून व पेशाब जांच की व्यवस्था निजी कम्पनी को ठेके पर देने से मरीजों को भारी परेशानी हो रही है। लम्बे इंतजार के बाद सैम्पल दे दो तो घंटों तक जांच रिपोर्ट नहीं मिलती। कई जांचें तो निजी हाथों में जाते ही बंद कर दी है।

पीएचसी दवे नगर में डॉक्टर नहीं होने से सूना पड़ा अस्पताल

दोनों शहरी पीएचसी में एक डॉक्टर

लौहारपुरा पीएचसी में बुजुर्ग अब्दुल रहीम ने कहा कि यहां स्थाई डॉक्टर चाहिए। यहां जो डॉक्टर लगे हैं, वे पहले दवे नगर जाते हैं, फिर यहां आते हैं और समय से पहले चले जाते हैं। दवे नगर पीएचसी में जगदीश ने बताया कि यहां रोज 50-60 मरीज आते हैं, लेकिन डॉक्टर नहीं होने से मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पाता। दवे नगर पीएचसी में अपने बच्चे को दिखाने आई मंजू ने बताया कि यहां डॉक्टर नहीं होने से स्थानीय लोगों को पीएचसी का फायदा नहीं मिल रहा है। छोटी-मोटी दवा नर्स देती है। कहने को नागौर शहर के लौहारपुरा व दवे नगर में शहरी पीएचसी खोल रखी है, लेकिन यहां न तो पूरे डॉक्टर हैं और न ही अन्य स्टाफ, इसके चलते मरीजों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल रहा है।

वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे हैं

जिले में चिकित्सकों के पद रिक्त होने की मुख्य वजह कई डॉक्टर्स का पीजी और एसआरशीप करने के लिए जाना है। रिक्त पदों की सूचना निदेशालय को भेजकर नए डॉक्टर लगाने की मांग की है। इसके साथ जिला कलक्टर के निर्देशानुसार जहां पद रिक्त हैं, वहां वैकल्पिक व्यवस्था भी की गई है। जहां तक दोनों शहरी पीएचसी का सवाल है तो यहां अभी एक ही डॉक्टर है, उनके साथ इंटर्नशीप करने वालों को लगा रखा है।

- डॉ. जेके सैनी, सीएमएचओ, नागौर

Updated on:
07 Apr 2026 10:39 am
Published on:
07 Apr 2026 10:37 am
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