Nagaur. जयमल जैन मार्ग स्थित जयमल जैन पौषधशाला में श्वेतांबर स्थानकवासी जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में चातुर्मासिक कार्यक्रम में प्रवचन में जयगच्छीय जैन साध्वी बिंदुप्रभा ने कहा कि जीवन शाश्वत नहीं है
नागौर. आचार्य जयमल जैन मार्ग स्थित जयमल जैन पौषधशाला में श्वेतांबर स्थानकवासी जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में चातुर्मासिक कार्यक्रम में प्रवचन में जयगच्छीय जैन साध्वी बिंदुप्रभा ने कहा कि जीवन शाश्वत नहीं है। सत्ता और दौलत शाश्वत नहीं है। रिश्ते भीे शाश्वत नहीं है सभी क्षणभंगुर है। इस परिवर्तनशील विश्व में केवल धर्म ही शाश्वत है। जो दुर्गति में गिरने वाले को धारण करें वह धर्म कहलाता है। महाभारत के अनुसार जिसका लक्षण अहिंसा है, वहीं धर्म है। मनुष्य अपनी स्थिति में चल रहा है। पृथ्वी अपनी धुरी पर स्थिर है। सूर्य अपने मंडल में गतिशील है। हवा चल रही है। अग्नि जल रही है। ऋतुएं अपना अपना प्रभाव समयानुसार दिखा रही है। ये संतुलन धर्म के कारण है। साध्वी ने कहा कि शरीर के पोषण के लिए धन आवश्यक है, और आत्मा के पोषण के लिए धर्म आवश्यक है। धर्म उत्कृष्ट मंगल है। मंगल वह है जिससे विघ्न दूर हो। सांसारिक एवं आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टि से मंगल का महत्व है। हर एक साधक का जीवन धर्ममय होने से खुशहाली गगन चूम लेती है। धर्म माता की तरह पोषण करती है। पिता की तरह रक्षा और मित्र की तरह प्रसन्न रखता है तथा संकट से बचाता है।
प्रश्नोत्तरी के विजेता पुरस्कृत
प्रवचन में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर रीता ललवानी, रेखा सुराणा, तोषिना ललवानी एवं मनोज ललवानी ने दिए। प्रवचन की प्रभावना एवं प्रश्नोत्तर प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत करने के लाभार्थी किशोरचंद, पवनकुमार, अरिहंत पारख थे। पांचीदेवी ललवानी के तेले तप की तपस्या का बहुमान रीता ललवानी ने तेले तप की बोली से किया। आगंतुकों के भोजन का लाभ नरपतचंद, प्रमोद, सुनील ललवानी ने लिया। संघ मंत्री हरकचंद ललवानी ने बताया कि मंगलवार को जयगच्छीय जैन संत पदमचंद्र महाराज के 58वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में एकासन तप का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर नरेन्द्र चौरडिय़ा, निर्मलचंद चौरडिय़ा, किशोर सुराणा, पार्षद दीपक सैनी आदि श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थीं।