देशसेवा को समर्पित सैनिक नगर के बाशिंदे, गांधीग्राम व आदर्श पंचायत घोषित है यह गांव
नागौर/खींवसर. खींवसर उपखण्ड मुख्यालय से करीब 14 किलोमीटर दूर बसा सैनिक नगर गांव देशप्रेम व स्वाभिमान का जीवंत उदाहरण है। इस गांव के हर बच्चे में देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी है। यहां के हर घर का एक जवान देश की रक्षा के लिए सीमा पर तैनात है। गांव के दो सौ से अधिक निवासी भारतीय सेना में है। प्रथम विश्वयुद्ध से लेकर वर्तमान तक यहां के जवानों ने अपने पराक्रम के बूते अनेक पद एवं सम्मान प्राप्त किए है। यहां के अनेक सैनिकों को ब्रिटिश फौज में शौर्य दिखाने पर तत्कालीन सरकार ने विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित किया। यहां के बच्चों में शिक्षा ग्रहण करने के समय भी मन में सेना में भर्ती होने की तमन्ना रहती है। पांचलासिद्धा पंचायत के इस गांव को सैनिक बहुल गांव होने के कारण गांधी ग्राम एवं आदर्श पंचायत घोषित किया गया। सरकार ने भी इस गांव में हर प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
राजपूताना बटालियन
वर्ष 1914 से 1919 तक लड़े गए प्रथम विश्व युद्ध में गांव के रणजीत सिंह, पन्नेसिंह व जोगसिंह वीर गति को प्राप्त हुए। इसी प्रकार वर्ष 1939 से 1945 तक लड़े गए द्वितीय विश्वयुद्ध में रूपसिंह, कानसिंह सोनगरा, सबलसिंह चौहान दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हुए। रसलदार मूलसिंह व भींवसिंह ने भी प्रथम विश्वयुद्ध में एवं सूबेदार जगमाल सिंह, राजूराम, अरजनराम ने द्वितीय विश्वयुद्ध में अपना पराक्रम दिखाया। यह सेना का यह अंग वर्तमान में 20 राजपूताना बटालियन के नाम से जाना जाता है।
विधवाएं दे रहीं सीख
गांव के करीब 22 सूबेदारों तथा देश के लिए प्राणों का उत्सर्ग करने वाले सैनिकों की विधवाएं आने वाली पीढ़ी को भी देश सेवा की सीख दे रही है। यहां के सैनिक परिवारों में इतनी अपणायत है कि बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक आपसी सौहार्द देखने लायक है। यहां देश के लिए त्याग, देश रक्षा के लिए हर समय तैयार रहने की शिक्षा दी जाती है। यहां के वीर जवानों की देशभक्ति व शौर्य के किस्से यहां के बड़े बुजुर्गों बड़ी शान से सुनाते नजर आते है।
कैंटीन न होने का मलाल
सरकार ने भी सैनिक परिवारों का पूरा ख्याल रखते हुए उन्हें बिजली, पानी, शिक्षा सहित समस्त सुविधाएं उपलब्ध करवाई है, लेकिन इन परिवारों को खींवसर में सैनिक कैंटीन नहीं खुलने का मलाल है। यहां के पूर्व सैनिकों को सामान लाने के लिए 60 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। इससे विधवाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पूर्व में सरकार ने खींवसर में कैंटीन खोलने का आश्वासन दिया था।
शिक्षा के साथ सेना का जज्बा
यहां के बच्चे शिक्षा के साथ सैना में जाने का जज्बा रखते है। हर बच्चे में सेना में भर्ती होने की चाह है। वह स्कूल से आने के बाद अपने परिजनों से सेना को लेकर चर्चा करते है। बड़े बुजुर्ग भी उनमें देश भक्ति की अलख जगाते है।
अखेसिंह जोधा, सूबेदार, सैनिक नगर
देश सेवा की भावना जागृत की जा रही है
देश की रक्षा से बढकऱ कोई सेवा नहीं है। नई पीढी में शिक्षा के साथ देश की सेवा एवं त्याग की भावना जागृत की जा रही है, ताकि आगे चलकर यह नौनिहाल देश की रक्षा का जिम्मा उठा सके। यहां हर बच्चे ने सेना में जाने का जज्बा दिखाई दे रहा है।
उम्मेद कंवर, वीरांगना सैनिक नगर
सरकार दे चुकी आश्वासन
सैनिक नगर में बड़ी संख्या में सैनिक होने के साथ उपखण्ड क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में सैनिक एवं पूर्व सैनिक है लेकिन उपखण्ड मुख्यालय पर सैनिक कैन्टीन नहीं होने से भारी परेशानी हो रही है। पूर्व में सरकार ने आश्वासन भी दिया लेकिन दस वर्षों बाद भी यहां कैन्टीन नहीं खुल पाई है।
हरिसिंह जोधा, पूर्व अध्यक्ष, पूर्व सैनिक कल्याण बहुउद्देशीय सहकारी समिति