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नागौर के युवाओं का कमाल: मेहनत और हौसले बूते बने आरएएस में चमकते सितारे

आरएएस भर्ती परीक्षा 2024 : दिव्यांग मां-बाप की बेटी पारुल ने बिना कोचिंग तैयारी कर हासिल की 59वीं रैंक

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ढाढ़रिया कलां गांव की पारुल चौधरी

ढाढ़रिया कलां गांव की पारुल चौधरी

नागौर. जिले के ढाढ़रिया कलां गांव की पारुल चौधरी ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा भर्ती परीक्षा (आरएएस) 2024 में 59वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। पारुल ने वर्ष 2023 की भर्ती परीक्षा में 191वीं रैंक हासिल की थी।

पारुल के दिव्यांग माता-पिता ने विपरीत परिस्थितियों में भी बेटी को तालीम दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, जिसकी बदौलत पारुल आज इस मुकाम पर पहुंची। पारुल ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के साथ गुरु को दिया , जिन्होंने हमेशा उसे मोटिवेट किया। उन्होंने बताया कि स्वयं के प्रति ईमानदार रहकर समयबद्ध और अनुशासन से परीक्षा की तैयारी करने पर कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। पिता भंवरलाल चौधरी सेवानिवृत लिपिक हैं और माता सुषमा गृहिणी है।

ग्वालू के दिनेश का लगातार दूसरी बार आरएएस में चयन

नागौर. जिले के ग्वालू गांव के दिनेश ने आरएएस भर्ती परीक्षा में लगातार दूसरी बार सफलता हासिल की है। इससे पहले 2023 की आरएएस भर्ती परीक्षा में दिनेश का 95वीं रैंक के साथ चयन हुआ तथा शनिवार को जारी 2024 के परीक्षा परिणाम में 111वीं रैंक हासिल की है। चाचा श्रवणरामगालवा ने बताया कि शुरू से ही पढ़ने में होनहार दिनेश ने सुचारू पढ़ाई से यह मुकाम हासिल किया है। पिता संपतराम पैरा मिलिट्री फोर्स में सेवाएं दे रहे हैं, वहीं माता संतोष गृहिणी है। दिनेश ने अपनी सफलता का श्रेय दादा जगदीश राम, शिक्षकों व मित्रों को दिया । इस बार दिनेश की रैंक भले ही गिरी , लेकिन पद अधिक होने से कैडर सुधरने की संभावना है।

टालनपुर के रामस्वरूप की आरएएस में 26वीं रैंक

गोटन. राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित आएएस परीक्षा- 2024 के परिणाम में टालनपुर गांव के रामस्वरूप बांगड़ा ने सफलता हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। रामस्वरूप ने एक्स-सर्विसमैन श्रेणी में 26वीं रैंक प्राप्त कर यह उपलब्धि हासिल की है। वे भारतीय वायु सेना में करीब 20 वर्षों तक सेवाएं दे चुके हैं और वर्तमान में कनिष्ठ लेखाकार के पद पर कार्यरत हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गोटन स्थित लाला कमलापत सिंघानिया एजुकेशन संस्थान से हुई। पिता भंवरलाल बांगड़ा साधारण किसान हैं, जबकि माता फैना देवी गृहिणी हैं। उनकी सफलता से गांव में खुशी का माहौल है ।