
नागौर/ पत्रिका. मेड़ता मंडी में जीरे ने किसानों की तकदीर बदल दी। किसी ने अपना कर्जा चुका दिया, कोई लखपति तो कोई करोड़पति बन गया। दरअसल यह सब हुआ है पिछले एक साल में जीरे के तीन गुना बढ़े भावों की बदौलत। इस बार इंटरनेशनल और डोमेस्टिक मार्केट में लगातार जीरे की डिमांड और एनसीडीईएक्स पर तेजी की वजह से प्रदेश की विशिष्ट श्रेणी की मेड़ता कृषि उपज मंडी में जीरे के अधिकतम भाव 65 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए, जबकि सालभर पहले यहां जीरा 20 हजार रुपए प्रति क्विंटल में बिक रहा था। ऑफ सीजन में भी जीरे की बाजार डिमांड बरकरार है।
नागौर जिले की मेड़ता सिटी कृषि उपज मंडी अपने पारदर्शी कारोबार और यहां के किसानों की मेहनत और समर्पण की वजह से पूरे देश में अपनी खास पहचान रखती है। इन दिनों मेड़ता कृषि मंडी में बिक रहे जीरे की वजह से सुर्खियों में हैं। चार दशकों से स्थापित मेड़ता मंडी में जीरे ने स्वर्णिम अक्षरों में इतिहास लिख दिया। मेड़ता मंडी जीरे के भावों के लिहाज से प्रदेश में पहले नंबर और देश की सबसे बड़ी ऊंझा मंडी के सामानांतर चल रही है।
दरअसल, जीरे के भावों में बढ़ोत्तरी का सिलसिला गत साल ही शुरू हो गया था। 18 से 20 हजार रुपए बिकने वाला जीरा देखते ही देखते 30, 40, 50 और फिर 60 हजार तक पहुंच गया। यानी एक ही साल में जीरे के भाव तीन गुना हो गए।
आगे क्या .... नई सीजन में अभी 8 माह, विदेशों में जून-जुलाई में आने वाली फसल कमजोर, भाव और बढ़ने के आसार
मंडी में जीरे के प्रमुख व्यापारी सुमेरचंद जैन ने बताया कि जीरे की नई सीजन में अभी 8 माह का समय है। अब तक 80 प्रतिशत माल मंडी पहुंच चुका है और 20 प्रतिशत बाकी है, जो आगामी 2-3 माह में पहुंच जाएगा। व्यापार एवं उद्योग संघ के अध्यक्ष हस्तीमल डोसी ने बताया कि अतिवृष्टि के कारण जून-जुलाई में पककर आने वाली तुर्की, सिरिया और चाइना की फसल भी कमजोर है। इस वजह से विदेशी डिमांड बनी हुई है। राजस्थान में 15 से 20 प्रतिशत जो माल बिक्री होना है उतनी ही डिमांड आगामी बुवाई को लेकर बीज की रहेगी।
4 महीने में साढ़े 3 लाख बोरी की आवक
मेड़ता कृषि उपज मंडी में रबी सीजन के दौरान मार्च के अंतिम पखवाड़े से जुलाई तक साढ़े 3 लाख बोरी जीरे की आवक हुई है। रबी सीजन के दौरान जीरे के 30 हजार रुपए प्रति क्विंटल के भाव खुले, जो 4 महीने में दोगुना से अधिक यानी 65 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए। मंडी सचिव राजेंद्र कुमार रियाड़ ने बताया कि मार्च से 5 जुलाई तक 1 लाख 69 हजार 197 क्विंटल जीरे की आवक हुई।