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राजस्थान में सिस्टम को चुनौती: 2 साल में 112 बार बम धमाकों की धमकी, सुरक्षा की जांच या किसी साजिश की आहट?

राजस्थान में थोड़े-थोड़े अंतराल पर सरकारी कार्यालयों को बम से उड़ाने की धमकी के मेल आ रहे है। यह सुरक्षा जांच या किसी साजिश की आहट? दो साल में 112 बार धमकियों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है।
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गत 13 जुलाई को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद नागौर न्यायालय परिसर की जांच करते सुरक्षा अ​धिकारी।

गत 13 जुलाई को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद नागौर न्यायालय परिसर की जांच करते सुरक्षा अ​धिकारी।

नागौर. सरकारी कार्यालय, पुलिस थाना, एयरपोर्ट, विमान, होटल, स्कूल-कॉलेज, मंदिर, दरगाह और अब न्यायालय। राजस्थान में पिछले दो साल से बम से उड़ाने की धमकियों का सिलसिला चल रहा है। हर बार ऐसी धमकी को प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से लेकर सब कुछ जांचती-परखती है। थोड़ा समय बीतते ही फिर वही दोहराया जाता है।

ऐसे मामलों में धमकी ई-मेल के माध्यम से दी जा रही है। इसके लिए वीपीएन सर्वर (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) का उपयोग करते है। जिससे जांच एजेंसियां ऐसी खुरापात करने वाले तक पहुंच भी नहीं पा रही है।चौंकाने वाला एक तथ्य यह भी है कि वर्ष 2022 और 2023 में प्रदेश में ऐसी एक भी घटना दर्ज नहीं हुई।

वर्ष 2024 में 39 और 2025 में कुल 64 धमकियां मिली। 2026 में भी दो दिन पहले तक यह जारी है। इस साल ही अब तक बीस मामले सामने आ चुके है। जांच एजेंसियां धमकी देने वाले तक पहुंचना तो दूर, उसका पता तक नहीं लगा पाई है।

साउथ इंडिया से कनेक्शन

दो दिन पहले ही नागौर जिला एवं सत्र न्यायालय काे ई-मेल के जरिए मेड़ता, जायल और नागौर कोर्ट परिसर को बम से उड़ाने की धमकी मिली। मेल में तमिल भाषा में संदेश लिखा गया। पहले भी तमिल भाषा में ऐसे संदेश मिलते रहे है। एजेंसियों को संदेह है कि यह साउथ इंडिया में कोई ऑपरेट कर रहा है। जो वीपीएन सर्वर की आड़ लेकर बच रहा है।

विधानसभा में भी उठा मामला

छबड़ा विधायक प्रताप सिंह ने विधानसभा में यह मामला उठाया। सरकार से धमकियों का ब्यौरा, कार्रवाई और आरोपियों की पहचान को लेकर सवाल पूछे। सरकार ने जवाब में ऐसी घटनाओं की जानकारी दी। जांच नतीजों के कॉलम में ज्यादा कुछ नहीं मिला होना ही बताया गया। सरकार ने इसे लेकर सख्त कदम उठाने की जरूरत बात कही।

वीपीएन और फर्जी ई-मेल बने हथियार

जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती धमकी देने वालों की पहचान करना है। नागौर के डीएसपी जतिन जैन (आइपीएस) बताते है कि ज्यादातर मामलों में आरोपी वीपीएन सर्वर और अस्थायी ई-मेल आइडी का उपयोग कर रहे है। इससे ई-मेल की वास्तविक लोकेशन और भेजने वाले की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। कई बार तो विदेशी सर्वर का उपयोग होने से जांच आगे नहीं बढ़ पाती। केंद्रीय एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म की मदद भी मांग रहे है।

हर धमकी पर बड़ा सुरक्षा ऑपरेशन

धमकी मिलते ही पुलिस, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वायड और खुफिया एजेंसियां सक्रिय हो जाती हैं। संबंधित परिसर को खाली कराया जाता है, घंटों तक तलाशी अभियान चलता है। आमजन को असुविधा के साथ डर का माहौल भी रहता है। ऐसे मामलों में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिलने से राहत महसूस होती है। परन्तु सुरक्षा एजेंसियां इसे हल्के में लेने का जोखिम भी नहीं उठा सकती।

विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश धमकियां भले ही फर्जी साबित हुई हो, लेकिन इनका उद्देश्य सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया परखना भी हो सकता है। दहशत फैलाना या प्रशासनिक व्यवस्था को बाधित करने जैसी मंशा से भी इनकार नहीं किया जा सकता। लगातार धमकियां यह संकेत भी देती हैं कि साइबर माध्यम से होने वाले ऐसे अपराधों से निपटने के लिए प्रदेश में तकनीकी क्षमता बढ़ाने की जरूरत है।

सरकार ने बढ़ाई निगरानी

राज्य सरकार के गृह विभाग का कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों के बाद संवेदनशील स्थलों पर निगरानी बढ़ाई गई है। कई स्थानों पर सीसीटीवी नेटवर्क मजबूत किया गया है। विशेष गश्त बढ़ाने तथा बम निरोधक दस्तों और डॉग स्क्वायड को अलर्ट मोड पर रखने जैसे कदम उठाए है। साइबर विशेषज्ञों की मदद से धमकी भरे ई-मेल की तकनीकी जांच भी की जा रही है।

प्रमुख तथ्य...

  • वर्ष 2022 : 0 बम धमकियां
  • वर्ष 2023 : 0 बम धमकियां
  • वर्ष 2024 : 39 धमकियां
  • वर्ष 2025 : 64 धमकियां
  • वर्ष 2026: 20 बार अब तक