
नागौर. फायर आदि की सुरक्षा को लेकर नगरपरिषद की बेपरवाही से संकट में शहर
135 संस्थानों को नोटिस दिया था, समय सीमा खत्म, दोबारा जांच नहीं, फाइलों में दबी रिपोर्ट
दो सीलिंग करके हीरो बनने चले थे: सीलिंग की नौटंकी
गांधी चौक में एक शोरूम और एक डिजिटल लाइब्रेरी को सील करके परिषद ने ऐसा दिखाया जैसे अभियान में किसी को बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन हकीकत ये है कि इसके बाद एक इंच भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। अंदर की खबर ये है कि जैसे ही लिस्ट में रसूखदारों नेताओं के करीबियों के नाम आए तो फिर पूरे अभियान की हवा ही निकल गई। अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। बस, इसके बाद केवल नोटिस देकर बड़े रसूखदार को साइलेंट क्लीन चिट दे दी गई। यही वजह है कि 135 नोटिस के बाद भी शहर की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे छोड़ दी गई। इससे अब जिम्मेदारों की भूमिका भी संदेहों के घेरे में आ गई है। शहरवासियों का मानना है कि अब मामला लखनऊ का नहीं, नागौर का है, अगला हादसा किस गली में होगा, और उसकी जिम्मेदार कौन होगा आदि के जवाब मिलने चाहिए। अगर जवाब नहीं है तो मान लिया जाए कि यह अभियान सिर्फ कागजी था या फिर अगली अनहोनी का इंतजार किया जा रहा है…!
हाईवे किनारे होटल-ढाबे भी दायरे से बाहर
फायर सुरक्षा अभियान के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे संचालित होटल-ढाबों और अन्य बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी व्यापक कार्रवाई का कोई असर नजर नहीं आया। नगरपरिषद की ओर से इनकी जांच हुई तो कब हुई, और नहीं हुई तो क्यों नहीं हुई सरीखे सवालों के जवाब भी नहीं मिल रहे हैं। जबकि इन स्थानों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन रहता है, लेकिन फायर सुरक्षा, आपात निकास, पार्किंग और अन्य सुरक्षा मानकों की प्रभावी जांच का दायरा यहां तक क्यों नहीं पहुंच सका, लोगों की समझ से परे रहा।
एक्सपर्ट व्यू: अगर अब भी नहीं चेते तो शहर और ज्यादा असुरक्षित होगा
नगरपरिषद के पूर्व सहायक नगर नियोजक मामराज का कहना है कि फायर सुरक्षा अभियान केवल नोटिस जारी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जिन भवनों में कमियां मिली हैं, वहां निर्धारित समय के बाद दोबारा निरीक्षण कर अनुपालन सुनिश्चित करना जरूरी है। यदि ऐसा नहीं होता तो बिना आपात निकास, संकरी सीढिय़ों और फायर सुरक्षा उपकरणों के संचालित भवन पहले की तरह लोगों की जान के लिए खतरा बने रहेंगे। इससे भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में जनहानि का जोखिम बढ़ सकता है और लोगों का प्रशासनिक कार्रवाई पर भरोसा भी कमजोर होगा।
क्या कहते हैं जिम्मेदार: वही रटा-रटाया जवाब
नगरपरिषद आयुक्त का कार्यभार संभाल रहे उपखंड अधिकारी गोविंद सिंह भींचर ने कहा कि जिन संस्थानों को नोटिस जारी किए गए हैं, वहां सुरक्षा मानकों की पालना सुनिश्चित कराई जाएगी। जहां निर्धारित नियमों का पालन नहीं मिलेगा, वहां नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। जन सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
Updated on:
17 Jul 2026 11:37 am
Published on:
17 Jul 2026 11:37 am
