विभाग का दावा : पिछले दो साल में वन विभाग ने लगाए 5 करोड़ से अधिक पौधे, 4 करोड़ जीवित - हकीकत कुछ और : प्रदेश में वन विभाग से पौधे अन्य विभागों व आमजन ने लगाए - पश्चिमी राजस्थान के आठ जिलों में लगाए गए प्रदेश के आधे पौधे, जीवितता दर भी यहां ज्यादा - पूर्वी व दक्षिणी जिलों की जीवितता दर अपेक्षाकृत कम
नागौर. प्रदेश में हरियाली बढ़ाने को लेकर वन विभाग बड़े-बड़े दावे कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। विभाग के अनुसार वर्ष 2023-24 में 263.726 लाख और वर्ष 2024-25 में 248.342 लाख पौधे रोपे गए। इस प्रकार दो वर्षों में कुल 512.068 लाख (5 करोड़ से अधिक) पौधे लगाने का दावा किया गया है। इनमें से 4 करोड़ से अधिक पौधों के जीवित होने की बात भी कही जा रही है।
हालांकि आंकड़े यह भी बताते हैं कि हरियाली बढ़ाने में अन्य विभागों और आमजन की भूमिका अधिक रही है। वर्ष 2023-24 में अन्य विभागों ने 103.500 लाख और आमजन ने 194.462 लाख पौधे लगाए। वहीं 2024-25 में अन्य विभागों ने 411.861 लाख और आमजन ने 62.096 लाख पौधे रोपे। दो वर्षों में अन्य विभागों व आमजन की ओर से कुल 771.919 लाख पौधे लगाए गए, जो वन विभाग से कहीं अधिक हैं। फिलहाल सवाल यही है कि करोड़ों पौधों के दावों के बावजूद प्रदेश में वास्तविक हरियाली कितनी बढ़ी? आंकड़े और जमीन की सच्चाई के बीच का अंतर ही इस पूरे अभियान पर प्रश्न चिह्न खड़ा कर रहा है।
पश्चिमी राजस्थान आगे, पूर्वी-दक्षिणी जिले पीछे
आंकड़ों के अनुसार पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय जिलों में पौधरोपण और जीवितता दर दोनों ही बेहतर रही है। वर्ष 2023-24 में सर्वाधिक 25.170 लाख पौधे जैसलमेर जिले में लगाए गए, जहां जीवितता दर 81 प्रतिशत से अधिक बताई गई। दूसरे स्थान पर बीकानेर रहा, जहां 19.907 लाख पौधे रोपे गए। नागौर जिले में 10.790 लाख पौधे लगाए गए, जिनकी जीवितता दर 81.73 प्रतिशत रही। इसके विपरीत भरतपुर में मात्र 1.600 लाख और राजसमंद में 2.500 लाख पौधे लगाए गए। भरतपुर में जीवितता दर केवल 52.44 प्रतिशतर रही। वर्ष 2024-25 में भी यही प्रवृत्ति दिखी। जैसलमेर में 35.620 लाख पौधे (जीवितता दर 89.39 प्रतिशत), बीकानेर में 20.698 लाख (जीवितता दर 83.4 प्रतिशत) और नागौर में 12.040 लाख पौधे (जीवितता दर 82.79 प्रतिशत) लगाए गए। जबकि राजसमंद में केवल 0.450 लाख, डूंगरपुर में 2.400 लाख, भरतपुर में 1.300 लाख और दौसा में 1.741 लाख पौधे लगाए गए।
दावों पर संशय
पर्यावरण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विभाग के दावे सही हों और लगाए गए पौधे वास्तव में पेड़ बन गए हों, तो मरुस्थलीय जिलों की तस्वीर पूरी तरह बदल जानी चाहिए थी। पर्यावरण क्षेत्र में काम करने वाले लोगों का कहना है कि वन विभाग की ‘हरियाली’ अधिकतर फाइलों तक सीमित नजर आती है, जबकि धरातल पर अब भी सूखा और बंजर भूमि ही अधिक दिखाई देती है।
हालांकि यह भी सच है कि पश्चिमी राजस्थान में आमजन की ओर से लगाए गए पौधों की नियमित देखरेख और सिंचाई के कारण कई स्थानों पर हरियाली बढ़ी है। नागौर में पिछले कुछ वर्षों में हरित क्षेत्र बढऩे से औसत वर्षा में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
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