नागौर

Nagaur patrika news…सडक़ चौड़ीकरण और निर्माण कार्यों की भेंट चढ़ती गई शहर की हरियाली

शहर में बढ़ती गर्मी अब केवल मौसम का असर नहीं रह गई है, बल्कि बदलते शहरी ढांचे की तस्वीर भी बनती जा रही है। जिन सडक़ों और चौराहों पर कभी बड़े-बड़े छायादार पेड़ लोगों को राहत देते थे, वहां अब कंक्रीट, डामर और धूप का फैलाव नजर आता है।

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May 19, 2026
Nagaur. Green trees have been removed and a concrete city has been built.

नागौर. शहर में पिछले कुछ वर्षों में सडक़ चौड़ीकरण, निर्माण कार्यों और शहरी विस्तार के नाम पर हजारों पेड़ कटते गए, लेकिन उनकी जगह वैसी हरियाली वापस नहीं लौट सकी। यही कारण है कि शहर का तापमान हर साल पहले से ज्यादा तीखा महसूस होने लगा है।

दोपहर में सूनी होने लगी सार्वजनिक जगहें
गर्मी के दिनों में दोपहर के समय शहर की कई सार्वजनिक जगहें अब लगभग सूनी नजर आने लगी हैं। जहां पहले लोग पेड़ों की छाया में बैठकर राहत लेते थे, वहां अब तेज धूप और तपती सतह लोगों को रुकने नहीं देती। शहर के पुराने लोग बताते हैं कि कुछ साल पहले तक कॉलेज रोड, मूण्डवा चौराहा, बस स्टैंड मार्ग और कलक्ट्रेट से मानासर चौराहा तक सडक़ किनारे घने पेड़ों की कतारें दिखाई देती थीं। अब इन मार्गों की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।
कॉलेज रोड बना सबसे बड़ा उदाहरण
कॉलेज रोड इसका सबसे बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां पहले 300 से ज्यादा बड़े और हरे पेड़ मौजूद थे। सडक़ निर्माण के दौरान अधिकांश पेड़ काट दिए गए। उस समय नए पौधे लगाने का आश्वासन दिया गया, लेकिन वर्षों बाद भी वैसी हरियाली विकसित नहीं हो सकी। पर्यावरण संरक्षण को लेकर लंबे समय से सक्रिय पद्मश्री हिम्मताराम भांभू ने भी उस समय इसका विरोध किया था, और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर बड़े स्तर पर पौधरोपण की मांग उठाई थी।
मुख्य मार्गों से गायब हो गई हरियाली
इसी तरह मूण्डवा चौराहा से बस स्टैंड तक जाने वाली सडक़, सुगन सिंह सर्किल से गौरव पथ, सुगन सिंह सर्किल से इंदिरा कॉलोनी, और कलक्ट्रेट चौराहा से मानासर चौराहा तक का क्षेत्र भी कभी छायादार पेड़ों के लिए पहचाना जाता था। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पहले इन मार्गों पर दोपहर में भी लोगों की आवाजाही बनी रहती थी, क्योंकि पेड़ों की वजह से वातावरण अपेक्षाकृत ठंडा रहता था। अब गर्म हवाओं और धूप के कारण हालात बदल गए हैं।
हीट आइलैंड प्रभाव ने बढ़ाई परेशानी
विशेषज्ञ मानते हैं कि शहर में तेजी से बढ़ रहे कंक्रीट और डामर के दायरे ने हीट आइलैंड प्रभाव को बढ़ा दिया है। इससे दिन के साथ रात के तापमान में भी कमी नहीं आ रही। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पौधे लगाने से स्थिति नहीं बदलेगी, बल्कि बड़े और लंबे समय तक जीवित रहने वाले छायादार पेड़ों को संरक्षित करना भी जरूरी होगा। पद्मश्री हिम्मताराम भांभू कहते हैं कि शहर के पार्कों और मुख्य मार्गों पर हरियाली बढ़ाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में गर्मी और अधिक गंभीर रूप ले सकती है। तापमान नियंत्रण और शहरी वातावरण को संतुलित रखने के लिए बड़े स्तर पर पौधरोपण के साथ पुराने पेड़ों को बचाना सबसे जरूरी कदम होगा।

Published on:
19 May 2026 10:22 pm
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