
नागौर जिले की मूण्डवा तहसील के गांवों में भूमिगत जल स्तर काफी गहरा गया है। पानी फ्लोराईडयुक्त होने के कारण अधिकांश गांव नाडी व तालाबों के पानी पर निर्भर हैं। इन नाडी तालाबों में वर्षा जल संग्रहित किया जाता है। जिसे सालभर पीने के पानी के रूप में काम में लेते हैं। लेकिन बारिश कम होने से यह सरोवर सूखने के कगार पर हैं। मूण्डवा तहसील के ईनाणा गांव में पिछले साल से बरती गई सावचेती के कारण अब तक पानी था। अब मोहनी नाडी में टेंकर भरने लायक पानी नहीं बचा है।
साल भर से राशन से पानी
पिछले साल तालाब में आए पानी का आंकलन करते हुए गांव वालों ने पेयजल के सदुपयोग के लिए नियम बनाया। इसके तहत हर माह एक घर को एक टेंकर पानी ले जाने की अनुमति थी। पानी पर पहरा बिठाने के कारण पिछला साल आराम से निकल गया। कुछ पानी बचा जो इस वर्ष काम आ गया। इस वर्ष की बारिश में केवल दो महीने की आपूर्ति लायक पानी ही नाडी में पहुंच पाया। नाडी में से भरे जाने वाले हर टेंकर का लेखा-जोखा रखा गया ।
बाहर नहीं बिके पानी इस पर पाबंदी
गांव का पानी गांव के लोगों के काम आए इसके लिए भी पुख्ता प्रबंध किए गए। ईनाणा, रूपासर तथा ढाणियों में पानी के टेंकर ले जाने के लिए तो छूट दी। लेकिन दूसरे गांव में ले जाकर पानी बेचने पर सख्त पाबंदी लगाई गई। पानी पर पहरा इस प्रकार लगाय गया कि भरकर जाने वाले टेंकर पर नजर रखी जा सके। इसके लिए पानी भरने का समय भी निर्धारित कर दिया गया। सुबह दस बजे से दोपहर बाद चार बजे तक टेंकर भरने की अनुमति दी गई। देर सवेर पानी भरने की अनुमति नहीं थी।
एक साल पहले की तैयारी से निकले तेरह माह
पिछले साल दिसम्बर में लगाई गई पाबंदी व नियमों के कारण इस साल जनवरी माह तक का समय आसानी से निकल गया, लेकिन फरवरी में पेयजल संकट खड़ा हो गया। दोनों सालों में पानी इतना कम बरसा की करीब पांच हजार टेंकर पानी के भरे जाने से पूरा तालाब खाली हो गया।
अब जलचरों के लिए छोड़ा जल
ग्रामीण जयराम ईनाणियां ने बताया कि जनवरी में ही पानी कम पड़ने लगा था। पिछले दो महिनों में करीब सात सौ-सात सौ टेंकर पानी उठने लगा था। ग्रामीणों ने आम सहमति से अब टेंकरों से पानी ले जाने पर पाबंदी लगा दी है। छह फरवरी से शेष बचा पानी जलचरों व वन्यजीवों के लिए छोड़ा गया है।