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मारवाड़ में बड़े दलों की धमक फीकी, निर्दलीयों के हाथ निकायों की चाबी

मारवाड़ क्षेत्र में नागौर, डीडवाना व कुचामन नगर परिषद और जायल, मूण्डवा, बासनी, कुचेरा, लाडनूं, बोरावड़ नगर पालिका में बुधवार को मतदान शुरू हो गया। शेष रहे 8 निकायों में दूसरे चरण में 11 सितम्बर को मतदान होगा। सुबह 10 बजे तक 25 से 28 फीसदी मतदान हुआ है।
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मीरा बाई का मेड़ता सिटी में भव्य मंदिर

मीरा बाई का मेड़ता सिटी में भव्य मंदिर

दिनेश कुमार स्वामी @ नागौर-डीडवाना. मारवाड़ अंचल के नागौर और डीडवाना-कुचामन जिले के 17 शहरी निकायों में नागौर, डीडवाना, कुचामन और मकराना नगर परिषद और शेष 14 नगर पालिकाएं है। नवसृजित पालिका जायल, बासनी, रियांबड़ी, मेड़ता रोड और खाटू खुर्द के मतदाता पहली बार पार्षद के लिए मतदान करेंगे। शेष निकायों का दलगत इतिहास है और उसका जमीनी स्तर पर असर भी।

नागौर के 60 वार्डों में से 46 में भाजपा व 47 में कांग्रेस तथा 17 में आरएलपी के प्रत्याशी हैं। यहां निर्दलीय सभापति थे, इस बार भी 130 निर्दलीय मैदान में है। नगर परिषद डीडवाना के 40 वार्ड में भाजपा के 34 और कांग्रेस के 37 प्रत्याशी है। निर्दलीयों में बड़ी तादाद स्थानीय विधायक यूनुस खान समर्थकों की है। कांग्रेस ने अपना बोर्ड दोहराने के लिए पूर्व विधायक चेतन डूडी को कमान सौंप रखी है।

सीधे सभापति बनने का उदाहरण यहां

कुचामनसिटी के 45 वार्डों में से भाजपा ने 41 और कांग्रेस ने 44 में प्रत्याशी उतारे है। सात आरएलपी प्रत्याशी सहित निर्दलीय पिछले चुनावों के इतिहास से उत्साहित है। करीब छह साल पहले प्रदेश में पहले हाइब्रिड यानि बिना पार्षद निर्वाचित सीधे सभापति बनने का उदाहरण यहां सामने आया था। इससे कांग्रेस ने 31 साल बाद निकाय में वापसी की थी। अब भाजपा फिर से वापसी के लिए पूरी ताकत के साथ मैदान में है। नगर परिषद मकराना कांग्रेस का गढ़ है। यहां भाजपा के रास्ते में जातिगत समीकरण बाधा है। इस बार भी 45 में से केवल 23 वार्डों में ही भाजपा प्रत्याशी है। उनके साथ निर्दलीयोंकाे लाना अरावली के समान चुनौती है।

एक तरफ वाली िस्थति नहीं

मारवाड़ की रंगत में चाचा-भतीजा की राजनीति कुचेरा से खूब चर्चा में है। एक तरफ रिछपाल मिर्धा भाजपा का बोर्ड बनाने तो दूसरी तरफ उनके ही भतीजे कांग्रेस के लिए ताकत लगा रहे है। मूण्डवा, लाडनूं, बोरावड़, मेड़ता सिटी, डेगाना, परबतसर और नावां नगर पालिका में भाजपा व कांग्रेस में मुकाबला कांटे का है। एक तरफ वाली िस्थति नहीं है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ मूंडवा, मेड़ता सिटी व नागौर में थोड़ी-थोड़ी देर के लिए आए थे। अन्य किसी भी बड़े नेता के यहां नहीं आने से चुनाव में भाजपा-कांग्रेस की धमक फीकी नजर आ रही है।

आज यहां हो रहा है मतदान

मारवाड़ क्षेत्र में नागौर, डीडवाना व कुचामन नगर परिषद और जायल, मूण्डवा, बासनी, कुचेरा, लाडनूं, बोरावड़ नगर पालिका में बुधवार को मतदान शुरू हो गया। शेष रहे 8 निकायों में दूसरे चरण में 11 सितम्बर को मतदान होगा। सुबह 10 बजे तक 25 से 28 फीसदी मतदान हुआ है।

कानाफूसी: असुरक्षित छत अब वोट के लिए सुरक्षित

नागौर शहर के हनुमान बाग सरकारी स्कूल का भवन कुछ समय पहले असुरक्षित घोषित कर पढ़ाई पर ताला लग गया। लेकिन चुनाव आया तो यही भवन फिर ‘सुरक्षित’ हो गया। वजह भी खास है... वार्ड 41 के दो मतदान बूथ यही जो लगाने हैं। सो, चुनाव से पहले मरम्मत भी हो गई। मंगलवार को टाइगर यहां पहुंचे तो उनकी नजर कमरे की छत पर टिक गई। मतदान कार्मिक ने छत की टूटी पट्टियां गिनानी शुरू की... एक, दो, तीन, चार और पांच। टाइगर ने तुरंत सलाह दी- ईवीएम के नीचे तो मत रखना। कार्मिक भी मुस्कुरा दिए और बोले- साहब, ईवीएम तो बच जाएगी... हमें तो नीचे बैठना पड़ेगा। अब इसे चुनावी मजबूरी कहें या व्यवस्था की मजबूती... फैसला आप ही करें।

मनोरंजन अनलिमिटेड... पिटारा खुला है

मतदाता भले ही खामोश हों, लेकिन चुनावी मनोरंजन में कोई कमी नहीं। कुचेरा से मूण्डवा तक सभाओं के वीडियो इन दिनों खूब घूम रहे हैं। भाजपा, कांग्रेस और आरएलपी के नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप सोशल मीडिया पर खूब ‘व्यू’ बटोर रहे हैं। डायलॉगबाजी के लिए चर्चित नेताजी ने बिना पुंगी-बीन के ही सांप को पिटारी में बंद करने वाला तंज कस दिया। उधर, बोतल वाले नेताजी ने पुलिस अफसर के पैर पकड़कर एनकाउंटर करवाने की बात कहकर नया ‘डायलॉग’छोड़ दिया। मजा तब और बढ़ा जब कुचेरा की सभा में लगे आरोपों का जवाब मूण्डवा की सभा में दिया गया और उसका वीडियो भी वायरल हो गया। यानी चुनावी मैदान में भाषण कम, कंटेंट ज्यादा बन रहा है।

मतदाता खामोश... प्रत्याशी मन टटोल रहे

मतदान से पहले मंगलवार को प्रत्याशियों की धड़कनें तेज रही। मतदाता चुप हैं तो प्रत्याशियों का भरोसा मुखबिरों पर है। दिनभर वार्ड-वार्ड से खबरें आती रहीं- कौन साथ है, कौन नाराज है और कौन अभी मन में कुछ और लिए बैठा है। जिसकी रिपोर्ट ‘निगेटिव’ आई, उसके घर मनुहार भेजने की रणनीति बनी। कहीं व्यक्तिगत संपर्क तो कहीं पुराने रिश्तों की दुहाई... आखिरी दिन हर दांव आजमाया गया। जैसे-जैसे रात गहराई, प्रत्याशियों की नजरें और चौकन्नी हो गई। कई दिनों से जिस ‘खेल’ की चर्चा गलियों और चौराहों पर थी, मंगलवार रात उसी की आहट सुनाई देने लगी। मतदाता भले मौन रहे... लेकिन चुनाव की रात की कानाफूसी तेज हो गई।