
हिट एण्ड रन कानून में सजा-जुर्माने का विरोध तो समझ में आता है, लेकिन यहां तो लोगों को इनाम तक रास नहीं आ रहा। हाल ही में इसकी राशि पांच हजार से बढ़ाकर दस हजार कर दी, लेकिन आलम वैसे का वैसा। पिछले तीन साल में नागौर (डीडवाना-कुचामन) जिले के सड़क हादसों में घायलों की संख्या एक हजार पार हो गई, लेकिन पांच जने भी ऐसे नहीं मिले जिन्होंने घायल को अस्पताल पहुंचाकर इनाम का हकदार बनने की कोशिश की। जागरूकता की कमी या फिर पुलिस के झंझट से बचने के लिए ऐसा हो रहा है, यह किसी को समझ नहीं आ रहा। हिट एण्ड रन कानून में तो सात लाख जुर्माने के साथ सजा का प्रावधान था तो विरोध लाजिमी है, लेकिन यहां तो इनाम के लिए भी कोई आगे नहीं आ रहा।
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2021-22 के बजट में सड़क हादसे के घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाले मददगार को इनाम व प्रशस्ति-पत्र देने की घोषणा की गई थी, तब से नागौर में तो इनकी संख्या दहाई तक नहीं पहुंची जबकि इन करीब तीन साल में सड़क हादसे में हुए घायलों की संख्या दो हजार का आंकड़ा तक पार कर चुकी। तब की घोषणा के अनुसार मददगार को पांच हजार रुपए का इनाम देना था जो हाल ही में बढ़ाकर दस हजार कर दिया गया। गंभीर घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले मददगारों के लिहाज से नागौर काफी पीछे है। यह हम नहीं बल्कि सरकारी आंकड़े बता रहे हैं। लगभग तीन साल में जीवन बचाने वाले सिर्फ आधा दर्जन मददगार के नाम ही इनाम के लिए सामने आ पाए हैं, जबकि इन तीन साल में सड़क हादसे ही करीब तीस फीसदी तक बढ़ गए।
हादसों की पचास फीसदी मौतें कम करने के सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने निर्देश दिए तो राज्य सरकार ने गंभीर घायल व्यक्ति के मददगार (गुड सेमेरिटन) को पांच हजार का नकद पुरस्कार व प्रशंसा पत्र देने की शुरुआत की गई। इसमें मददगार को जल्द से जल्द सिर्फ नजदीकी अस्पताल तक पहुंचाना होता है, इसके बाद वो कोई बयान ना भी दे तो इसके लिए भी उसे छूट है। इन मददगारों को पुलिस की तमाम झंझटों से मुक्त रखा गया। वो इसलिए भी कि पहले कई बार पुलिस के पचड़े में फंसने के डर से घायल को लोग तड़पता छोड़ गए थे। सरकार ने इस डर को खत्म किया ताकि लोग घायलों की मदद के लिए आगे आएं पर ऐसा हो नहीं पा रहा है। आलम यह है कि घायल को अस्पताल पहुंचाने के बजाय लोग नजदीकी थाना पुलिस को सूचना दे देते हैं। इसके बाद पुलिस का इंतजार करते रहते हैं।
बढ़े हादसों के साथ मृतक-घायलों के आंकड़े
सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2023 में सड़क हादसों की संख्या हजार के पार रही तो इनमें मरने वाले पांच सौ तो घायलों की संख्या नौ सौ से अधिक थी। जबकि इससे पहले वर्ष 2022 में हादसे 708 हुए थे जबकि मृतक 446 तो घायल 654 थे। वर्ष 2021 में तो हादसे 355 हुए जिनमें 279 लोगों की मौत हुई जबकि घायलों की संख्या 319 थी। यानी पिछले तीन साल वर्ष 2021 से 2023 तक सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या चौदह सौ से अधिक रही है जबकि घायल हुए दो हजार से ज्यादा। मजे की बात यह कि बावजूद इसके दस जने भी ऐसे सामने नहीं आए जिन्होंने गंभीर घायल को अस्पताल पहुंचाकर इनाम/प्रशस्ति पत्र के लिए कोई कार्रवाई की हो। ऐसा नहीं है कि लोग मदद नहीं करना चाहते पर या तो अस्पताल ले जाकर अपना नाम इसके लिए दर्ज करवाने में डरते हैं या फिर खाकी का रौब उन्हें ऐसा करने से रोकता है। यह भी संभव है कि अधिकांश लोगों को सरकार की इस जीवनदायी योजना के बारे में जानकारी ही नहीं है।मौत का कारण भी समय पर उपचार नहीं मिलना
सूत्र बताते हैं कि अधिकांश सड़क हादसों में किसी घायल की मौत का सबसे बड़ा कारण यही है कि उसे समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जाता। लहूलुहान से पड़े रहते हैं, खून का बहना बंद नहीं होता और उनकी मौत हो जाती है। इसी वजह से मददगार को इनाम-प्रशंसा पत्र के साथ पुलिस की झंझटों से मुक्त करते हुए सरकार ने यह प्लानिंग की थी, लेकिन यह नागौर अभी तक बेअसर है।
हर माह मांगी जा रही है रिपोर्ट
बताया जाता है कि सड़क हादसों के संबंध में हर माह की रिपोर्ट मांगी जा रही है। पिछले दिनों एक पत्र में कहा गया कि हादसे में घायल व्यक्ति के मददगार बढ़ाने के लिए आमजन में जागरूकता लाई जाए, साथ ही उन्हें अब पांच हजार के बजाय दस हजार व प्रशस्ति-पत्र दिया जाएगा। ऐसे लोगों को जागरूक करें बताया जाता है कि हर माह कितने हादसों में कितने मददगारों ने कितनों को दिलाई मदद की जानकारी भी मांगी जा रही है पर नागौर शून्य ही आ रहा है।
इनका कहनासड़क हादसों में गंभीर घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने वाले मददगार को अब इनाम पांच हजार के बजाय दस हजार दिया जाएगा। साथ में प्रशस्ति पत्र भी। पुलिस अथवा किसी तरह का झंझट नहीं है, लोगों को मदद के लिए आगे आना चाहिए।
-रविंद्र बोथरा, सीओ ट्रेफिक नागौर
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समय-समय पर अस्पताल/सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को पत्र भेजा जा रहा है। कर्मियों से कहा गया है कि गंभीर घायलों को अस्पताल पहुंचाने वालों का फार्म भरवाएं ताकि उन्हें यह राशि दी जाए। साथ ही जागरूकता फैलाएं।
-डॉ महेश वर्मा, सीएमएचओ, नागौर