नागौर

देश में हर साल चाहिए 2 लाख किडनी डोनर, ट्रांसप्लांट हो रही मात्र 11 से 12 हजार

कहीं आप किडनी रोग की चपेट में तो नहीं हैं... असावधानियां व लापरवाही बढ़ा रही किडनी की बीमारी- सरकार ने अंगदान जीवनदान महाअभियान भी चलाया
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Updated: 13 Mar 2024, 1:28 PM IST
Inadvertence and carelessness are increasing kidney disease.
Inadvertence and carelessness are increasing kidney disease.

नागौर. वर्तमान में गुर्दे (किडनी) के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। हमारे देश में हर साल करीब 2 लाख किडनी डोनर की आवश्यकता पड़ रही है, लेकिन उसकी तुलना में मात्र 11 से 12 हजार किडनी ट्रांसप्लांट ही हो रही है। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि किडनी दान देने वालों की तुलना में रोगियों की संख्या कई गुना अधिक हैं। किडनी सहित अन्य अंगों के दान को लेकर राज्य सरकार ने गत वर्ष अगस्त में अंगदान जीवनदान महाअभियान भी चलाया, जिसके तहत पूरे राजस्थान में कुल 35 हजार 557 जनों ने अंग दान करने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है, जबकि नागौर जिले में यह संख्या 1866 है। इसमें किडनी दान करने की इच्छा जताने वाले 1207 हैं। रोगियों की संख्या हो देखते हुए इसमें और अधिक वृद्धि की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि हमारे शरीर में फिल्ट्रेशन की जटिल प्रणाली को गुर्दे (किडनी) पूरा करते हैं। ये अतिरिक्त अपशिष्ट और तरल पदार्थों को रक्त से अलग करके शरीर से उत्सर्जित करने का काम करते हैं। प्रत्येक किडनी में लगभग एक मिलियन सूक्ष्म फल्टिरिंग इकाइयां होती हैं, जिन्हें नेफ्रॉन कहा जाता है। कोई भी बीमारी जो नेफ्रॉन को नुकसान पहुंचाती है, उससे किडनी की बीमारी भी हो सकती है। मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर दोनों ऐसी बीमारियां हैं, जो नेफ्रॉन को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ज्यादातर किडनी की बीमारी मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) की वजह से ही होती है।

गंभीर होने पर चलता है पता
विशेषज्ञों के अनुसार किडनी कई वर्षों में धीरे-धीरे खराब होती है। बीमारी बहुत गंभीर होने से पहले तक कई लोगों को इसके लक्षण का भी पता नहीं चलता है। यदि किसी को किडनी का रोग है, तो ब्लड और यूरिन टेस्ट से इसका पता लगाया जा सकता है। यही मात्र एक तरीका है, इसलिए इसमें सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

जानिए, क्या किडनी रोग
गुर्दे की बीमारी आपके शरीर की रक्त को साफ करने, रक्त से अतिरिक्त पानी को फिल्टर करने और रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। यह लाल रक्त कोशिका उत्पादन और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक विटामिन डी प्रोसेस (चयापचय) को भी प्रभावित कर सकता है।

किडनी रोग के सामान्य लक्षण
किडनी रोग के सामान्य लक्षणों की बात करें तो एनीमिया (खून की कमी), भूख कम लगना, मूत्र में रक्त आना, मूत्र की मात्रा में कमी आना, मूत्र का रंग गहरा होना, सूजे हुए पैर, हाथ व टखने, थकान, हाई ब्लड प्रेशर, त्वचा में लगातार खुजली होना, जल्दी-जल्दी पेशाब आना, मांसपेशियों में ऐंठन, मांसपेशियों में झनझनाहट होना, जी मिचलना, शरीर के वजन में अचानक बदलाव आना एवं अचानक सिरदर्द होना है।

ऐसे बचें किडनी रोग से
हाई ब्लड प्रेशर और मधुमेह को कंट्रोल करके किडनी रोग के खतरों को कम किया जा सकता है। यदि आपको किडनी की गंभीर समस्या है, तो इसके लिए आपको नियमित जांच करानी चाहिए। क्रोनिक किडनी रोग (सीकेडी) का निदान शीघ्र करने पर इसे बढऩे से रोका जा सकता है। इस बीमारी से ग्रस्त व्यक्तियों को डॉक्टर की ओर से दिए गए निर्देशों व सलाह का पालन करना चाहिए।


नियमित रूप से जांच कराएं
किडनी रोग मुख्य रूप से हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, बाधित मूत्र प्रवाह, संक्रमण, ज्यादा दर्द निवारक दवा ज्यादा खाने से होता है। ऐसे में जिन लोगों में किडनी रोग होने की अधिक सम्भावना हो, उन्हें किडनी की नियमित रूप से जांच करानी चाहिए। बीमारी का शुरुआत में ही पता चल जाने पर किडनी में होने वाली गंभीर क्षति को रोका जा सकता है।
- डॉ. अशोक झाड़वाल, फिजिशियन, जेएलएन राजकीय अस्पताल, नागौर

नागौर का छठा स्थान
हमारे देश में अंगदान को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, इसी को ध्यान में रखते हुए गत वर्ष राज्य सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने अंगदान जीवनदान महाअभियान चलाया था, जिसके तहत नागौर में अब तक 1866 लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। इस हिसाब से नागौर प्रदेश में छठे स्थान पर है।
- डॉ. महेश कुमार वर्मा, सीएमएचओ, नागौर

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