
नागौर. कृषि उपज मंडी नागौर में जून के पहले पखवाड़े के दौरान मसाला और औषधीय फसलों के भाव में तेजी का रुख देखने को मिला है। 4 जून से 15 जून तक के मंडी भावों के विश्लेषण में जीरा सबसे मजबूत जिन्स के रूप में उभरा है। इस अवधि में जीरे के अधिकतम भाव 19 हजार 700 रुपए से बढकऱ 21 हजार 500 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए। वहीं सौंफ, इसबगोल, सिंधी सुवा और सफेद तिल में भी मजबूती दर्ज की गई। मंडी के आंकड़ों के अनुसार 4 जून को जीरे का अधिकतम भाव 19 हजार 700 रुपए प्रति क्विंटल था। इसके बाद लगातार तेजी बनी रही और 15 जून को यह बढकऱ 21 हजार 500 रुपए तक पहुंच गया। इसका न्यूनतम भाव भी 14 हजार रुपए से बढकऱ 16 हजार रुपए हो गया। व्यापारियों के अनुसार मसाला फसलों में मांग में तेजी आने से भाव सुधरे हैं।
सौंफ और इसबगोल को भी मिला सहारा
कृषि उपज मंडी में सौंफ के अधिकतम भाव 11 हजार रुपए से बढकऱ 12 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए। इसी तरह इसबगोल के अधिकतम भाव 13 हजार 300 रुपए से बढकऱ 13 हजार 500 रुपए हो गए। हालांकि इसबगोल में बीच में आवक प्रभावित होने से कुछ दिनों तक कारोबार भी प्रभावित रहा, लेकिन बाद में भाव संभल गए। इसी तरह सिंधी सुवा के अधिकतम भाव 7 हजार 200 रुपए से बढकऱ 7 हजार 500 रुपए प्रति क्विंटल पहुंच गए। सफेद तिल के अधिकतम भाव 10 हजार रुपए से बढकऱ 10 हजार 500 रुपए तक पहुंचे। इसके साथ ही न्यूनतम भाव में भी सुधार दर्ज किया गया, जिससे तिल वर्ग की जिन्सों में मजबूती दिखाई दी। इस बार अब तक मूंग का अधिकतम भाव पूरे अवधि में लगभग 7 हजार 800 रुपए के आसपास बना रहा। ग्वार के अधिकतम भाव 5 हजार 600 रुपए से बढकऱ 5 हजार 660 रुपए तक पहुंचे। चने में भी मामूली सुधार हुआ और इसके अधिकतम भाव 5 हजार 300 रुपए से बढकऱ 5 हजार 400 रुपए प्रति क्विंटल हो गए।
सरसों में रही नरमी
जहां अधिकांश मसाला फसलों में तेजी रही, वहीं सरसों (40 प्रतिशत तेल) के भाव में कमी आई है। गत 4 जून को सरसों का औसत भाव 7 हजार 500 रुपए था, जबकि 15 जून को घटकर 7 हजार 200 रुपए प्रति क्विंटल रह गया। यानी इस अवधि में 300 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज हुई।
व्यापारियों की नजर
मंडी व्यापारियों में रामेश्वर सारस्वत एवं पवन भट्टड़ का कहना है कि मसाला फसलों में मांग का दबाव अभी बना हुआ है। विशेष रूप से जीरा और सौंफ में खरीदार सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार यदि आगामी दिनों में आवक सीमित रहती है और बाहरी बाजारों से मांग बनी रहती है तो मसाला वर्ग की जिन्सों में मजबूती जारी रह सकती है।