नागौर

किसान कल्याण सेस की राशि किसानों के कल्याण में खर्च करने की जगह फसल बीमा का प्रीमियम भर रही सरकार

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में राज्य व केन्द्र सरकार को भरना होता है प्रीमियम का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा, मंडियों में वसूले जा रहे किसान कल्याण सेस की राशि से सरकार चुका रही बैंकों का ब्याज व बीमा का प्रीमियम

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Jan 15, 2025

नागौर. राज्य की मंडियों में वसूले जा रहे कृषक कल्याण सेस कर से प्राप्त होने वाली राशि को सरकार किसानों के कल्याण में खर्च करने की बजाए प्रधानमंत्री फसल बीमा का प्रीमियम भरने व बैंकों से लिए गए ऋण का ब्याज चुकाने में खर्च कर रही है। सरकार ने कृषक कल्याण सेस कर वर्ष 2019-20 में लागू किया और 2023-24 में जनवरी 2024 तक कुल 121211.74 लाख रुपए वसूल किए। साथ ही 3,29,837.40 लाख रुपए बैंकों से ऋण व राज्य सरकार पुनर्भरण/सहायतार्थ अनुदान दिया गया, यानी कृषक कल्याण कोष में 4,51,049.14 लाख रुपए आए।जबकि कृषक कल्याण सेस कर व अन्य प्राप्त बजट में से वर्ष 2019-20 से जनवरी 2024 तक विभिन्न कार्यों के लिए 4,64,090.57 लाख रुपए व्यय/हस्तांतरण किया गया।

665 करोड़ बीमा प्रीमियम में चुका दिए

विधानसभा के पहले सत्र में विधायक गुरवीर सिंह की ओर से लगाए गए सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि कृषक कल्याण सेस कर से प्राप्त राशि में से 665 करोड़ रुपए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का प्रीमियम चुकाने में खपा दिए। इसमें 555 करोड़ रुपए वर्ष 2023-24 में तथा सौ करोड़ रुपए वर्ष 2024-25 में भुगतान किया गया। गौरलतब है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) में किसानों की ओर से चुकाए जाने वाले प्रीमियम के अलावा, केंद्र और राज्य सरकार दोनों बराबर-बराबर प्रीमियम का भुगतान करती है। पीएमएफबीवाई में किसानों की ओर से खरीफ फसलों के लिए अधिकतम 2 प्रतिशत तथा रबी फसलों के लिए अधिकतम 1.5 प्रतिशत एवं वार्षिक वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए अधिकतम 5 प्रतिशत प्रीमियम चुकाया जाता है। शेष दोनों सरकारें जमा करवाती हैं, लेकिन पिछले दो साल से सरकार कृषक कल्याण कर से मिलने वाली राशि को ही प्रीमियम में दे रही है।

इन मदों में एक पैसा भी खर्च नहीं

एक ओर सरकार कृषक कल्याण सेस कर की राशि को बीमा प्रीमियम व बैंकों का ब्याज चुकाने में खर्च कर रही है, वहीं किसानों की प्रगति व कल्याण से जुड़ी कई योजनाओं पर पिछले पांच साल में एक पैसा भी खर्च नहीं किया गया है।

- ईसबगोल व ग्वार एवं कृषि जोन स्थापना/डीपीआर/स्टेडी व्यय के भुगतान के लिए पांच साल में एक पैसा भी खर्च नहीं किया गया।

- महात्मा ज्योति बा फुले मंडी श्रमिक कल्याण योजना 2015 पर भी पांच साल में एक पैसा खर्च नहीं किया।

- मुख्यमंत्री काश्तकार विदेश प्रशिक्षण यात्रा योजना पर भी एक पैसा खर्च नहीं हुआ।

- मसाला निर्यात प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत अनुदान पर 2020-21 के बाद एक पैसा खर्च नहीं किया गया।

- फल व सब्जी एवं फूल निर्यात प्रोत्साहन योजना 2016-17 पर 2020-21 के बाद एक पैसा खर्च नहीं किया गया।

व्यापारियों का भुगतान भी इसी से

कांग्रेस सरकार की ओर से शुरू की गई राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति - 2019 पर कृषक कल्याण सेस की मोटी राशि खर्च हो रही है। हालांकि इस योजना में पहले किसानों को कोई भी उद्योग या इकाई लगाने पर लगत का 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाता था तथा व्यापारियों को 50 प्रतिशत अनुदान मिलता था। इसके तहत प्रदेश में पिछले पांच साल में 37,079.36 लाख रुपए खर्च किए गए। इसमें किसानों एवं व्यापारियों दोनों को लाभ मिला। खास बात यह है कि इस योजना का किसानों ने कम और व्यापारियों ने ज्यादा लाभ उठाया, जिसके चलते कृषण कल्याण की राशि का लाभ भी किसानों की बजाए व्यापारियों को ज्यादा मिला।

Published on:
15 Jan 2025 08:24 pm
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