नागौर

ईरान-इजरायल युद्ध: राजस्थान की मंडियों में जीरा-ग्वार और चावल के दामों में भारी गिरावट, बंदरगाहों पर अटके हजारों कंटेनर

Iran-Israel War Impact: अमेरिका, इजरायल और ईरान तनाव से नागौर सहित राजस्थान की कृषि पर असर पड़ा है। ग्वार गम, जीरा और बासमती चावल का निर्यात ठप हो गया है। बंदरगाहों पर माल अटका है। मांग घटने से किसानों को नुकसान और भावों में गिरावट दर्ज की गई।

2 min read
Apr 02, 2026
मिसाइलों ने रोका चावल, ग्वार और जीरे का रास्ता (फोटो-एआई)

US-Israel-Iran War Impact: नागौर: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने मरुधरा की कृषि अर्थव्यवस्था की धड़कनें तेज कर दी हैं। नागौर का जीरा हो, जोधपुर का ग्वार गम या हाड़ौती का बासमती चावल, निर्यात के रास्ते बंद होने से करोड़ों का माल बंदरगाहों पर अटका है। युद्ध की अनिश्चितता से कई उपजों के दाम गिर गए हैं। ग्वार गम, जीरा और अन्य मसाला फसलों के निर्यात पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

राजस्थान सबसे बड़ा ग्वार उत्पादक प्रदेश है। इनमें जोधपुर, नागौर, बीकानेर और गंगानगर प्रमुख केंद्र हैं। ग्वार से बनने वाला गम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस उद्योग में ड्रिलिंग में उपयोग होता है। युद्ध के कारण बनी अस्थिरता के कारण तेल उत्पादन प्रभावित होने से ग्वार गम की डिमांड बंद है। इससे ग्वार के कीमतों में गिरावट आई है।

ये भी पढ़ें

राजस्थान: थाली तक पहुंची ईरान-इजरायल युद्ध की आंच, 15 किलो तेल के टिन पर करीब 200 रुपए बढ़े, चेक करें ताजा भाव

निर्यात पर निर्भरता बनी चुनौती

ग्वार गम, जीरा और अन्य मसाला फसलें पूरी तरह से निर्यात आधारित हैं। इनकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करती हैं। ऐसे में वैश्विक तनाव का सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ता है।

जीरा और मसाला फसलों पर भी असर

नागौर और आसपास के क्षेत्र जीरा, धनिया, मैथी सहित अन्य मसाला फसलों के उत्पादन के लिए जाने जाते हैं। इनका खाड़ी देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात होता है। बंदरगाहों पर माल फंसा होने के कारण जीरा सहित मसाला फसलों की मांग भी प्रभावित हो रही है। मंडियों में आवक बढ़ने और निर्यात घटने से कीमतों में कुछ गिरावट भी दर्ज की गई।

इसबगोल के दामों में गिरावट

बाड़मेर कृषि मंडी में जीरे के भाव में 15 से 20 रुपए प्रति किलो तक की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, इसबगोल के दाम भी 10 से 15 रुपए तक कम हुए हैं। व्यापारी गौतम चमन के अनुसार, निर्यात नहीं होने के कारण बाजार में मांग कमजोर पड़ी है, जिसका असर कीमतों पर देखने को मिल रहा है।

निर्यातकों ने अन्य देशों की ओर रुख किया

कोटा हाड़ौती क्षेत्र से होने वाले बासमती चावल के निर्यात पर भी असर पड़ा है। क्षेत्र से खाड़ी देशों में बड़े पैमाने पर चावल निर्यात किया जाता है। लेकिन ईरान के मौजूदा हालात के कारण यह निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है। अब निर्यातकों ने वैकल्पिक बाजारों की तलाश करते हुए अन्य देशों में बासमती चावल भेजना शुरू कर दिया है।

ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह के माध्यम से ईरान और अफगानिस्तान जाने वाली खेप पिछले एक माह से अटकी हुई है। बंदरगाहों पर लगभग चार लाख टन चावल के 3,000 कंटेनर खड़े हैं।

भावों में आई गिरावट

तेल कुओं के लिए जोधपुर से बड़ी मात्रा में ग्वार गम का निर्यात होता है। जोधपुर, हरियाणा, गंगानगर और गुजरात में ग्वार गम की फैक्ट्री अधिक हैं, जो खाड़ी देशों में ग्वार गम का निर्यात करती हैं। युद्ध के कारण निर्यात बंद होने से भाव में प्रति क्विटल 2000 रुपए की गिरावट आई है।
-गोपीकिशन बंग, ग्वारगम व्यापारी, मेड़ता सिटी मंडी

ये भी पढ़ें

बड़ा खुलासा: राजस्थान में पूर्व मंत्री, विधायक और नेता भी दौड़ा रहे Three Digit VIP नंबर की गाड़ियां, RC होगी निरस्त

Published on:
02 Apr 2026 02:58 pm
Also Read
View All

अगली खबर