
सरकार खर्च कर रही अरबों, फिर भी निजी अस्पताल क्यों मांग रहे 'पुनर्भरण' (पत्रिका फाइल फोटो)
RGHS Cashless Treatment Issue: जयपुर: राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) तीन साल में 346 करोड़ रुपए से बढ़कर करीब 3400 करोड़ रुपए सालाना भुगतान तक पहुंच गई है। पिछले दो वर्षों में ही 7200 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान अस्पतालों और फार्मेसियों को किया जा चुका है। जमीनी स्तर पर मरीज, अस्पताल और सरकार तीनों ही इससे संतुष्ट नहीं हैं।
योजना में लाभार्थियों की संख्या 12.35 लाख से बढ़कर 13.61 लाख हो गई है। पैकेज 2,129 से बढ़कर 3,367 और अस्पतालों की संख्या 1500 से 1,729 तक पहुंच गई। इसके बावजूद कई निजी अस्पताल कैशलेस इलाज बंद कर पुनर्भरण (रिइम्बर्समेंट) प्रणाली लागू करने की मांग कर रहे हैं।
कैशलेस ओपीडी दवा वितरण का बहिष्कार जारी है और 30 अप्रैल तक चरणबद्ध आंदोलन के साथ 15 मई से पूर्ण बहिष्कार की चेतावनी दी गई है। निजी अस्पतालों पर एआई का जाल बिछाने वाले अधिकारी बजट बढ़ने के सबसे बड़े कारण प्रोपेगेंडा मेडिसिन पर रोक लगाने के लिए कोई पहल नहीं कर रहे हैं।
मरीज…
सरकार…
आरजीएचएस के दायरे में वृद्धि की गई है। डिजिटल ट्रांजेक्शन, मॉनिटरिंग और तकनीकी नवाचार से अनियमितताओं पर रोक लगाने का प्रयास जारी है।
-गजेंद्र सिंह खींवसर, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री
योजना में विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार के कारण करोड़ों रुपए का भुगतान अटका है। इसलिए कैशलेस के बजाय पुनर्भरण मॉडल लागू किया जाना चाहिए।
-डॉ. विजय कपूर, प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स एसोसिएशन
Updated on:
02 Apr 2026 09:44 am
Published on:
02 Apr 2026 08:40 am
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