परबतसर में वाटरशेड के जेईएन को 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया
परबतसर @ पत्रिका. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) सीकर की टीम ने सोमवार को परबतसर में वाटरशेड के जेईएन को 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। सीकर एसीबी के डीएसपी जाकिर अख्तर के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई की। एनीकट का बिल पास कराने की एवज में 25 हजार रुपए रिश्वत मांगने पर परिवादी ठेकेदार ने जेईएन शिवशंकर योगी के खिलाफ सीकर एसीबी में शिकायत की थी। परिवादी की शिकायत का एसीबी ने सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान जेईएन शिवशंकर ने ठेकेदार से 10 हजार रुपए लिए। इसके बाद सोमवार को एसीबी ने जाल बिछाया और बाकी के 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते जेईएन को गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान टीम में सुरेन्द्र चंद्र पुलिस निरीक्षक, एएसआई रोहिताश्व, एलसी राजेंद्र प्रसाद, कांस्टेबल कैलाश चन्द्र, कांस्टेबल दलीप कुमार, कांस्टेबल रामनिवास, कांस्टेबल मूलचंद, महिला कांस्टेबल सुशीला शामिल थे।
फाइनेंस कंपनी ने मोर्गेज पट्टा किया गुम, मानसिक परेशानी में आया पट्टाधारक
पीलवा @ पत्रिका। ग्राम भड़सिया निवासी एक व्यक्ति को आवासीय पट्टे पर एक फाइनेंस कंपनी लोन लेना महंगा पड़ गया है। लोन फोरक्लोज करवाने पर भी कंपनी ने पट्टा गुम हो जाने का कहकर चक्कर कटवा रहे हैँ। औपचारिकता के लिए ऑन लाइन एफआइआर दर्ज कर कॉपी दे दी है। अब इसको लेकर ग्राम पंचायत के चक्कर काट रहा है मगर नया पट्टा नहीं मिल रहा है, इससे पट्टाधारक मानसिक परेशानी में आ गया है। जानकारी अनुसार आवासीय पट्टा धारक कन्हैयालाल वैष्णव पुत्र हनुमान दास वैष्णव ने 2018 में ऐविआईओएम फाईनेंस किशनगढ से अपने आवासीय पट्टे पर दो लाख साठ हजार रुपये का लोन लिया।जिसे 17 फरवरी 22 को फोरक्लोज करवा दिया। फाईनेंस कम्पनी ने ग्राहक का पट्टा गुम कर दिया। ग्राहक बैंक के चक्कर लगा रहा पर उसे न तो पट्टा दिया जा रहा हैं न ही सन्तोषजनक जवाब।
पट्टाधारक कन्हैयालाल वैष्णव ने बताया कि एवि आइओएम फाइनेंस किशनगढ से अपने आवासीय पट्टे पर लिया फोरक्लोज करवा दिया। अब फाईनेंस कम्पनी ने पट्टा खो दिया व दो माह से किशनगढ के चक्कर लगा-लगा कर परेशान हो गया। पूछने पर स्टाफ ओछी भाषा का प्रयोग करते हुए ऊपर से यह ओर कह रहा हैं कि क्या हुआ गुम हो गया। दूसरा बना लेना। मुख्य शाखा दिल्ली से पट्टा गुम हुआ था वहां ऑनलाइन एफआइआर करवा कर अपना पल्ला झाड़ लिया है। एफआइआर की कॉपी देकर कह दिया कि पंचायत से दूसरा डुप्लीकेट पट्टा जारी करवा लेना। पंचायत ने कई औपचारिकताएं पूरी करने को कहा है।