मदर लैब के भवन में न फायर फाइटिंग सिस्टम और न एनओसी, निरीक्षण में सुरक्षा पर खरी नहीं उतरी लैब
नागौर. जिला मुख्यालय के सरकारी अस्पताल में होने वाली जांचों को निजी हाथों में देने को लेकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नियमों को ताक पर रख रहे हैं। विभागीय अधिकारी भारत सरकार से प्राप्त एफडीएसआई (फ्री डायग्नोस्टिक्स सर्विस इनिशिएटिव) गाइड लाइन के अनुसार स्थापित होने वाली मदर लैब का चालू करने को लेकर इतने उतावले हैं कि खुद की ओर से जारी आदेशों की ही अवहेलना करने लगे हैं। खासकर नागौर जेएलएन अस्पताल की सेंट्रल लैब को पुराना अस्पताल में बनाई गई मदर लैब में शिफ्ट करने को लेकर ‘विशेष तेजी’ बरती जा रही है। हालात यह है एनएचएम एमडी एक दिन में तीन-तीन पत्र जारी कर रहे हैं, जिसमें 3 अक्टूबर 2025 को जारी मूल आदेश की अनदेखी तक की जा रही है।
चिकित्सा विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जेएलएन अस्पताल की लैब सेंट्रल लैब की शिफ्टिंग को लेकर बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। विभाग ने जहां केवल एमसीएच विंग 100 बेडेट का हवाला दिया है, वहां जेएलएन की लैब को मदर लैब में शिफ्ट करने के आदेश दिए जा रहे हैं।
मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि नियमानुसार निजी एजेंसी को लैब में अपनी मशीनरी और स्टाफ खुद उपलब्ध कराना है, लेकिन यहां उल्टा सरकारी मशीनरी और स्टाफ को ही एजेंसी को हैंडओवर करने के आदेश दे दिए गए हैं। इससे न केवल नियमों की अनदेखी हुई, बल्कि सरकारी संसाधनों के उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
भर्ती के बाद हटाए टेक्नीशियन, वेतन भी नहीं दिया
जानकारी के अनुसार 3 अक्टूबर 2025 को एनएचएम एमडी की ओर से मदर लैब से संबंधित आदेश जारी होने के बावजूद पीएमओ ने 16 दिन बाद 19 अक्टूबर को चार लैब टेक्नीशियन भर्ती किए। अब उन्हें मौखिक आदेश देकर हटा दिया गया है और उन्हें एक बार भी मानदेय नहीं दिया गया। सवाल यह है कि जब पहले ही शिफ्टिंग के आदेश आ चुके थे, तो फिर भर्ती क्यों की गई? और यदि की गई तो उनका भुगतान क्यों रोका गया?
जांच व्यवस्था पर भी संशय
आदेश के अनुसार केवल इनहाउस हो रही जांचों के अतिरिक्त जांचें ही मदर लैब को दी जानी थीं, लेकिन यहां सभी जांचें अनुबंधित फर्म को सौंपने के निर्देश दे दिए। सूत्रों के अनुसार वर्तमान में जेएलएन अस्पताल में करीब 87 प्रकार की जांचें हो रही हैं, जबकि मदर लैब में 150 प्रकार की जांचें करने का दावा किया गया है। हकीकत यह है कि शेष 60 प्रकार की जांचों के लिए आवश्यक मशीनरी एजेंसी के पास भी उपलब्ध नहीं है।इस पूरे मामले ने चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों की जांच व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।
आग लगी तो बुझाने की व्यवस्था नहीं
पुराना अस्पताल परिसर में बनी नई मदर लैब का पीएमओ की ओर से गठित टीम की ओर से निरीक्षण करने पर कई कमियां पाई गई है, इसके बावजूद नियम विरुद्ध जेएलएन अस्पताल की सेंट्रल लैब को शिफ्ट करने का दबाव बनाया जा रहा है। जेएलएन अस्पताल के पैथोलोजिस्ट, माइक्रोबायोलोजिस्ट, बायोकेमिस्ट एवं लैब स्टोर प्रभारी की ओर से 16 मार्च को निरीक्षण के बाद जेएलएन अस्पताल के पीएमओ सहित उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी है, उसके अनुसार मैसर्स टीसीआईएल कशना डाइग्नोस्टिक लिमिटेड लैब में न तो फाइर एनओसी मिली और न ही फायर फाइटिंग सिस्टम पाया गया। इसके साथ बायोमेडिकल कचरा निस्तारण में लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट की उचित व्यवस्था नहीं पाई गई। लैब प्रभारी, पैथोलोजिस्ट, माइक्रोबायोलोजिस्ट, बायोकेमिस्ट के लिए बैठने, रिपोर्टिंग एवं मॉनिटरिंग के लिए कक्ष उपलब्ध नहीं हैं। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि मदर लैब में होने वाली 150 जांचों में से कई जांचों के लिए इस लैब में उपकरण नहीं हैं एवं किसी भी उपकरण के बंद होने की स्थिति में कोई भी बैकअप नहीं पाया गया।
पीएमओ डॉ. आरके अग्रवाल का बचकाना जवाब : फायर फाइटिंग सिस्टम तो हमारे अस्पताल में भी नहीं
पत्रिका - मदर लैब में न फायर फाइटिंग सिस्टम हैं और न ही फायर एनओसी, फिर भी आप शिफ्टिंग क्यों करवा रहे हैं?
पीएमओ- फायर फाइटिंग सिस्टम तो हमारे जेएलएन अस्पताल में भी नहीं है, फिर भी चल रहा है। प्रक्रिया चल रही है।
पत्रिका - एनएचएम के मिशन निदेशक के आदेश में जेएलएन अस्पताल एमसीएच विंग 100 बेडेड का हवाला दिया हुआ है, आप जेएलएन अस्पताल की लैब शिफ्ट क्यों कर रहे हैं?
पीएमओ - नहीं, ऐसा नहीं है, आदेश में ऐसा नहीं है।
पत्रिका - मदर लैब संबंधी आदेश 3 अक्टूबर 2025 को जारी हो गए, फिर भी आपने 19 अक्टूबर को चार लैब टेक्नीशियन हायर किए और अब तक उन्हें वेतन नहीं दिया। अब हटाने के मौखिक आदेश क्यों दे दिए?
पीएमओ - जरूरत थी, इसलिए लेने पड़े, अब उच्चाधिकारियों के निर्देशों की पालना की जा रही है। वेतन भी प्रक्रिया के तहत मिलेगा।