
नागौर. शहर में भटकते गोवंश। फोटो पत्रिका नेटवर्क
नागौर। शहर की सड़कों पर भटकते गोवंशों की समस्या गंभीर है। नगरपरिषद के समय-समय पर अभियान चलाने के बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है। प्रमुख मार्गों, चौराहों और कॉलोनियों में खुले घूमते गोवंश न केवल यातायात में बाधा बन रहे हैं, बल्कि दुर्घटनाओं के खतरे को भी बढ़ा रहे हैं। आमजन को रोजाना इस समस्या से जूझना पड़ रहा है।
नगर के कई व्यस्त इलाके प्रतापसागर तालाब क्षेत्र के दोनों ओर, इंदिरा कॉलोनी मार्ग, गांधी चौक, दिल्ली दरवाजा, बीकानेर रोड, मानासर चौराहा से कॉलेज रोड और मूंडवा चौराहा से केंद्रीय बस स्टैंड तक दिनभर गोवंशों का जमावड़ा देखा जा सकता है। इन क्षेत्रों में वाहन चालकों और राहगीरों के लिए हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है।
नगरपरिषद के अनुसार सड़कों पर घूम रहे अधिकांश गोवंश बेआसरा नहीं, बल्कि पालतू हैं। कई पशुपालक सुबह दूध निकालने के बाद पशुधन को खुला छोड़ देते हैं, जिससे उनके चारे-पानी का खर्च बच सके। शाम को फिर उन्हें वापस बांध लिया जाता है। इस लापरवाही के कारण शहर की सड़कों पर गोवंशों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
सड़कों पर भटकते मिले गोवंश को पकड़ा जाएगास्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब नगरपरिषद ने सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब सड़कों पर भटकते गोवंश किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। ऐसे पशुओं को पकड़कर परिषद अपने कब्जे में लेगी और संबंधित पालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अभियान को और तेज करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
नगरपरिषद ने जुर्माने की राशि में भी बड़ा संशोधन किया है। अब यदि किसी पालक का गोवंश सड़क पर भटकता हुआ पाया जाता है तो उस पर 5 हजार से 10 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही पालक को यह स्पष्ट करना होगा कि पशु को खुले में क्यों छोड़ा गया। परिषद का मानना है कि सख्त आर्थिक जुर्माने से ही इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
पहले गोवंश पकड़ने के बाद पालक मामूली जुर्माना देकर उन्हें छुड़ा लेते थे, जिससे समस्या बनी रहती थी। अब इस व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। किसी भी प्रकार की सिफारिश या राजनीतिक दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति अधिकारियों को प्रभावित करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नगरपरिषद ने नई कार्यप्रणाली भी लागू की है। इसके तहत सड़क पर भटकता गोवंश परिषद के कब्जे में रहेगा, जबकि घर में बंधा पशु ही मालिक का माना जाएगा। इस नीति के माध्यम से शहर को व्यवस्थित, सुरक्षित और दुर्घटनामुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया गया है।
सडक़ों पर भटकते गोवंशों की धरपकड़ के बाद उनको छोड़ने के लिए लोगों के फोन आने लगते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा। अब गोवंश सडक़ों पर भटकते मिलते हैं तो फिर जुर्माना राशि वसूलने के साथ ही कानूनी कार्यवाही भी होगी।
गोविंद सिंह भींचर, आयुक्त नगरपरिषद नागौर
Published on:
20 Mar 2026 03:27 pm
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