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नागौर: बिजली विभाग में सामग्री में करोड़ों का घपला! ठेकेदार ने लगाया 3 करोड़ से अधिक का चूना

निगम सामग्री में करोड़ों का खेल! ठेकेदार फर्म के खिलाफ गबन और भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद हुई जांच में खुलासा, जांच में खुलासा— दो कार्य आदेशों में भारी अनियमितता, बड़ा सवाल - क्या अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ इतना बड़ा घोटाला, लंबे समय तक अनियमितताएं कैसे छिपी रहीं?

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Discom office

Discom office, Nagaur

नागौर जिले के बिजली विभाग में करीब छह साल पहले किए दो कार्यों में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। शिकायत के बाद हुई जांच में निगम की सामग्री के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की पुष्टि हुई है। ठेकेदार फर्म मैसर्स श्रीराम इलेक्ट्रिकल एंड कंस्ट्रक्शन, अड़वड़ को दिए गए कार्य आदेशों में करोड़ों रुपए के गबन का मामला सामने आने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। एक तरफ बिजली के बकाया बिलों को लेकर छोटे-छोटे उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से ठेकेदार निगम को करोड़ों रुपए का चूना लगा रहे हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार निगम को शिकायत मिली कि संबंधित फर्म ने कार्य आदेश संख्या 7424 और 7426 (दिनांक 7 जनवरी 2020) के तहत निगम की सामग्री का जमकर दुरुपयोग किया। शिकायत की जांच कराने पर सामने आया कि फर्म ने कार्य आदेश 7424 में 98,41,533 रुपए तथा कार्य आदेश 7426 में 2,18,93,326 रुपए निगम सामग्री का दुरुपयोग किया। इससे निगम को कुल 3,17,34,859 रुपए की वित्तीय हानि उठानी पड़ी।

निगम सामग्री में करोड़ों का खेल

जांच में यह साफ हुआ है कि फर्म ने कार्यों के निष्पादन में निगम की सामग्री का गलत उपयोग किया। सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग और कार्य आदेशों में अनियमितता के साथ संभावित भ्रष्टाचार के संकेत भी मिले हैं। यह मामला केवल वित्तीय नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

एक्शन मोड में प्रशासन

जांच रिपोर्ट आने के बाद एवीवीएनएल की सचिव सीमा शर्मा ने नागौर अधीक्षण अभियंता को निर्देश दिए कि संबंधित ठेकेदार फर्म को नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा जाए। अधीक्षण अभियंता अशोक चौधरी ने बताया कि निर्देशों की पालना में ठेकेदार फर्म को नोटिस जारी किया गया, जिसका जवाब आने पर अजमेर डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक को भेजा गया है। अब आगे की कार्रवाई अजमेर स्तर से होगी।

बड़ा सवाल - क्या मिलीभगत थी?

इतने बड़े स्तर पर अनियमितता सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह सब अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ? यदि नहीं, तो फिर इतने लंबे समय तक यह गड़बड़ी छिपी कैसे रही? क्या अन्य कार्य आदेशों में भी इसी तरह की अनियमितताएं हुई हैं? यह मामला न केवल बिजली निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि निगरानी तंत्र में कहीं न कहीं बड़ी चूक हुई है।

जिम्मेदारी तय होगी या नहीं?

मामले में अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि केवल ठेकेदार पर कार्रवाई होगी या फिर संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति से इंकार नहीं किया जा सकता।

पहले भी सामने आ चुकी है अनियमितता

मैसर्स श्रीराम इलेक्ट्रीक एंड कंस्ट्रक्शन कम्पनी अड़वड़ के खिलाफ अनियमितता का एक मामला पहले भी सामने आ चुका है। वर्ष 2020 के एक कार्य की जांच में गड़बड़ी साबित होने पर निगम अधिकारियों ने 24.83 लाख की पेनल्टी वसूल कर मामले को दबा दिया। हालांकि दिशा की बैठक में सांसद हनुमान बेनीवाल ने दो बार ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए, लेकिन मेड़ता एक्सईएन ने अनसुना कर दिया। इसको लेकर नागौर एसई अशोक चौधरी ने 16 जुलाई 2025 व 11 सितम्बर 2025 को एक्सईएन को पत्र भी लिखे।

कार्रवाई की जा रही है

जांच में 3 करोड़ से अधिक की अनियमितता मिलने के बाद ठेकेदार फर्म को नोटिस जारी किया था, जिसका जवाब आ गया है, अब आगे की कार्रवाई की जा रही है।

- एमसी बाल्दी, जोनल चीफ इंजीनियर, अजमेर डिस्कॉम