
हनुमानराम ईनाणियां
नागौर जिले के मूण्डवा. उपखण्ड के गांवों में इस वर्ष सर्दियों में ही पेयजल संकट की आहट सुनाई देने लगी है। गांवों में परम्परागत पेयजल स्रोत सूखने के कगार पर हैं, जबकि अभी गर्मी शुरू भी नहीं हुई है। नहरी पानी भी सपना बना हुआ है। कुछ गांवों में जल जीवन मिशन के तहत हर घर जल योजना का कार्य पूरा हो पाया है, लेकिन वहां भी पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा। अधिकांश गांवों में इसका कार्य भी अधूरा पड़ा है। दूसरी ओर नागौर जिले को जितनी मात्रा में नहरी पानी मिलना चाहिए उससे कम ही दिया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार नोखा दैया पंप हाउस से नागौर को केवल 60 प्रतिशत जलापूर्ति हो रही है। जिसकी खपत जिला मुख्यालय व शहरी क्षेत्र में ही हो जाती है। कभी शहरों में तो कभी गांवों में कटौती करके एक दूसरे के हिस्से का पानी देकर काम चलाया जा रहा है। इधर, पेयजल चोरी के मामले कोढ में खाज का काम कर रहे हैं। पंप हाउस से गांवों में बनी टंकियों तक बिछाई गई राइजिंग लाइनों में सेंध लगाकर पानी चोरी करने से गांवों में पूरा पानी नहीं पहुंच रहा है।
इस वर्ष रिमझिम बारिश तो काफी हुई, लेकिन मूसलाधार के अभाव में अंगोर-पायतण से बहकर पानी सरोवरों तक नहीं पहुंच पाया। लोग पूरे चौमासे में अच्छी बारिश का इंतजार करते रहे। एकादबार की तेज बारिश से तालाबों में कुछ पानी आया, लेकिन जनवरी बीतते- बीतते यह पानी भी टेंकरों से उठा लिया गया। स्थिति यह है कि आमजन के साथ पशु पक्षियों व वन्य जीवों के लिए भी पेयजल संकट का खतरा मंडराने लगा है। मार्च से पानी की किल्लत ज्यादा परेशान करेगी। गर्मियों के चार महीनों में पानी की खपत बढ़ती है। जबकि नाडी-तालाबों में जलचरों के रहने लायक भी पानी नहीं बच पाएगा। ऐसे में सारा दारोमदार नहरी पानी पर रहेगा। जबकि नहरी परियोजना के तहत वर्तमान में पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा तो गर्मियों में पूर्ति कैसे हो पाएगी ।
सूख गए सरोवर
मूण्डवा का ऐतिहासिक लाखोलाव तालाब वर्षा जल संरक्षण का बड़ा उदाहरण है। कई वर्षों में इसका पानी नहीं सूखा है। लेकिन इस बार सर्दियों में ही पानी पेड़ियों से नीचे तक पहुंच गया है। पोखंडी तालाब में पीने लायक पानी भी नहीं बचा है। मजबूरी में महिलाएं इसी पानी को भरकर ले जाती है। निकटवर्ती गांव ईनाणा की मोहिनी नाडी तालाब है वर्ष भर गांव के अलावा रूपासर व ढाणियों की प्यास बुझाता है। इस वर्ष इसमें भी पानी नहीं बचा है। लोगों को गर्मी के मौसम को लेकर अभी से चिंता सताने लगी है।
जलचरों व वन्यजीवों की चिंता
ग्रामीणों ने कुछ नाडी-तालाबों में पानी के टैंकर भरने पर पाबंदियां लगाई है, ताकि वन्य जीवों व जलचरों के लिए पानी बचाया जा सके। कई गांवों में पानी भरने की मात्रा तय कर की गई है, तो कहीं अनुमति लेना अनिवार्य किया है।