नगरपरिषद की ओर से कागजों में 22 लाख 96 हजार की राशि जड़ा तालाब, बख्तासागर व नेहरू पार्क में की जा रही व्यय, फिर भी हालत खराबनागौर. पार्कों की स्थिति बेहद खराब है। न तो लोग जागरुक हैं, और न ही रखरखाव का जिम्मा संभालने वाली नगरपरिषद। इसके चलते पार्कों की हालत खराब हो चुकी […]
नगरपरिषद की ओर से कागजों में 22 लाख 96 हजार की राशि जड़ा तालाब, बख्तासागर व नेहरू पार्क में की जा रही व्यय, फिर भी हालत खराब
नागौर. पार्कों की स्थिति बेहद खराब है। न तो लोग जागरुक हैं, और न ही रखरखाव का जिम्मा संभालने वाली नगरपरिषद। इसके चलते पार्कों की हालत खराब हो चुकी है। कई जगहों पर तो पार्क में न केवल चारदीवारी तक टूट चुकी है, बल्कि उनके अंदर की घासें भी जलकर सूख चुकी है। पार्कों की ऐसी हालत होने से अब यह सूने नजर आने लगे हैं।
शहर के प्रमुख पार्कों में बख्तासागर, जड़ा तालाब स्थित सिटी पार्क एवं नेहरू उद्यान ही नगरपरिषद के प्रमुख पार्कों की सूची में शामिल हैं। इन पार्कों का रखरखाव खुद नगपरिषद की ओर से कराया जाता है, जबकि शेष का रखरखाव जनसहभागिता के माध्यम से कराया जाता है। इन तीनों पार्कों के रखरखाव में परिषद की ओर से साल भर में करीब 22 लाख 96 हजार रुपए व्यय किए जाते हैं। इसके बाद भी इनकी हालत बेहद खराब हो चुकी है।
बख्तासागर पार्क: सुविधाएं नहीं
बख्तासागर पार्क में हालांकि हरियाली जरूर है, लेकिन यहां पर न तो मूलभूत सुविधाएं हैं, और न ही सुरक्षा की व्यवस्था। इसके चलते पार्क में कई जगह की स्थिति बेहद खराब है। स्थिति यह है कि पार्क में मुख्य गेट से प्रवेश करते ही सीधा गंदगी से सामना होता है। कुछ जगहों पर बिखरे कचरे नजर आते हैं। इसके आगे बढऩे पर पार्क में हरियाली तो नजर आती है, मगर कई जगहों पर जगह ऊंची, नीची होने की वजह से पार्क की स्थिति विकट नजर आती है।
नेहरू उद्यान: टूटे झूले
नेहरू उद्यान की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। रखरखाव के अभाव में में लगी झूलेवाली नाव टूट चुकी है। पार्क के अगले हिस्से में जाने पर बैठने की जगह तो मिल जाती है, लेकिन साथ में गंदगी भी। पार्क के एक हिस्से में इलेक्ट्रिक बाक्स के खुले हुए तार भी नजर आते हैं। ज्यादातर झूले भी टूटे हैं। कारण कि देखभाल के अभाव में यहां पर बच्चों की जगह ज्यादातर बड़े उम्र के लोग ही झूलते नजर आते हैं।
सिटी पार्क: उजड़ गई हरियाली
सिटी पार्क में पहले भीड़ होती थी, लेकिन अब नहीं होती है। कारण गेट से प्रवेश करते ही सीधा सामना छोटे, बड़े पत्थरों के साथ ही गंदगी से होता है। देखभाल के अभाव में पार्क का ज्यादातर हिस्सा न केवल उजड़ चुका है, बल्कि यहां पर बैठने के लिए लगी टेबलें आदि भी टूट चुकी है। झूलों में एक की स्थिति अच्छी नहीं है। बताते हैं कि घटिया स्तर का होने के कारण एक साल पहले ही झूले बेकार हो गए थे।
प्रतापसागर पार्क: जले पौधे, उगी कंटीली बाड़
प्रतापसागर पार्क भी कभी नगपरिषद के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल रहा। अब इसकी हालत खराब हो चुकी है। देखभाल के अभाव में पूरे पार्क में हर ओर न केवल गंदगी का ढेर लगा हुआ है, बल्कि यहां पर उगी हुई घास भी पूरी तरह से जल चुकी है। इस पार्क में तीन साल पहले खूब भीड़ होती थी, लेकिन अब पार्क की स्थिति जीर्ण-शीर्ण होने के कारण यहां आने से भी लोग परहेज करने लगे हैं।
मूलभूत सुविधाओं का अभाव
इन पार्कों में से एक में भी मूलभूत सुविधाएं नहीं है। बख्तासागर, सिटी पार्क एवं नेहरू उद्यान आदि में वॉशरूम आदि की सुविधा नहीं है। हालांकि सिटी एवं बख्तासागर पार्क में बनाया गया है, मगर इसमें हमेसा ताला लगा रहता है। सुरक्षा व्यवस्था एक भी पार्क में नहीं है।
पार्क व्यय हो रही वार्षिक राशि
सिटी पार्क 5.67 लाख
नेहरू उद्यान 6.60 लाख
बख्तासागर पार्क 10.69 लाख
जनता बोली: सुधरने चाहिए पार्क
पार्क एक तरह से किसी भी क्षेत्र का ऑक्सीजन जोन होता है। इसको विकसित करने के साथ ही रखरखाव का जिम्मा सभी को संभालना चाहिए। इसके साथ ही सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी माकूल प्रबंधन करने चाहिए।
रामनिवास धेड़ू, शहरवासी
पार्क में मूलभूत सुविधाओं का अभाव होने के साथ ही सुरक्षा या रखरखाव के लिए कर्मी की तैनातगी होनी चाहिए। पार्कों की बदहाली के लिए आम लोगों के साथ ही नगरपरिषद भी जिम्मेदार है।
भंवरलाल गांगल, शहरवासी