
नागौर. विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट वितरण से पहले जिले के पदाधिकारियों से रायशुमारी करने के लिए जयपुर में बुलाई गई बैठक के बाद दावेदारों के नाम डिब्बों में बंद हो गए। विधानसभा वार हुई बैठकों से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल सैनी, केन्द्रीय मंत्री सीआर चौधरी, अर्जुनराम मेघवाल व गजेन्द्रसिंह शेखावत, प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना, राष्ट्रीय संगठन मंत्री वी. सतीश, चुनाव समिति के सदस्य सतीश पूनिया, गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, पंचायतीराज मंत्री राजेन्द्र राठौड़ व पीडब्ल्यूडी मंत्री यूनुस खान आदि ने जिलेभर से जयपुर पहुंचे भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों की बैठक ली और विधानसभा चुनाव में एक बार फिर भाजपा को जीताने की जिम्मेदारी दी गई। पार्टी हाइकमान ने कहा कि टिकट की दावेदारी कई लोग कर रहे हैं, लेकिन टिकट एक व्यक्ति को मिलेगा, इसलिए पार्टी के निर्णय को शिरोधार्य मानते हुए भाजपा के साथ होकर जिसे टिकट मिले, उसी को वोट देना है।
गौरतलब है कि बैठक में पार्टी के जिला संगठन प्रभारी, जिलाध्यक्ष, उपाध्यक्ष, जिला महामंत्री, जिला मंत्री, मंडल अध्यक्ष, मोर्चों के राष्ट्रीय व प्रदेश पदाधिकारी, मोर्चा अध्यक्ष, विधायक, सांसद, भाजपा प्रदेश पदाधिकारी, प्रदेश कार्य समिति सदस्य, स्थानीयक निकाय अध्यक्ष, जिला परिषद सदस्य, प्रधान सहित अन्य पदाधिकारी शामिल हुए।
दावेदारों से पूछा - क्यों लड़ रहे हो चुनाव
मुख्य बैठक के बाद चुनाव समिति के दो-दो लोगों ने कमेटी बनाकर विधानसभा वार बैठकें ली। जिसमें विधानसभा से आए पदाधिकारियों व दावेदारों को प्रवेश दिया गया। इन बैठकों में टिकट के दावेदारों का परिचय लेने के बाद उनसे उनका विजन पूछा गया। टिकट क्यों मांग रहे हो, चुनाव कैसे जीतोगे तथा जीतने के बाद वे क्या करेंगे, इसको लेकर पर्ची पर लिखवाया गया। पर्ची भरवाने के बाद दावेदारों को बाहर बैठाया गया।
नाम के साथ मांगे सुझाव
विधानसभा वार आयोजित बैठक में दावेदारों को बाहर बैठाने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं से रायशुमारी की गई। इसके बाद उन्हें एक-एक पर्ची थमाई गई, जिसमें प्राथमिकता के आधार पर मजबूर दावेदारों के नाम तथा उसके साथ भाजपा को जीताने तथा कांग्रेस को हराने के सुझाव मांगे गए। साथ ही यह भी पूछा गया कि किस व्यक्ति को टिकट देने से क्या फायदा होगा और दूसरी सीटों पर उसका क्या असर पड़ेगा।
नागौर, मेड़ता व जायल में विधायकों का विरोध
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विधानसभा वार हुई नागौर, मेड़ता व जायल की बैठकों में कार्यकर्ताओं ने मौजूदा विधायकों का विरोध जताया। कई कार्यकर्ता तो खुले रूप से सामने आ गए और कहा कि सत्ता व संगठन में तालमेल नहीं रहा, इसलिए इस बार टिकट बदले जाएं। हालांकि कुछ कार्यकर्ता विधायकों के पक्ष में भी खड़े नजर आए।
डेगाना से किलक का ही नाम
जिले की डेगाना विधानसभा से सहकारिता मंत्री अजयसिंह किलक के नाम से एक ही दावेदारी पेश की गई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रायशुमारी में भी कार्यकर्ताओं ने किलक के नाम पर एक मत होकर सहमति जताई।
इन्होंने ली बैठक
नागौर विधानसभा की बैठक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओमप्रकाश माथुर व केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत ने ली। खींवसर व जायल की बैठक खुद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे व अविनाश राय खन्ना ने ली। इसी प्रकार मेड़ता विधानसभा की बैठक अशोक परनामी, सतीश पूनिया व वी. सतीश तथा डेगाना की बैठक प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल सैनी व केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने ली। बैठक में अपेक्षित कार्यकर्ताओं से दावेदारों के नाम के साथ सुझाव पर्ची पर लिखवाने के बाद बंद डिब्बे में डलवाया गया।
ये हैं जिले की दसों विधानसभा के दावेदार
नागौर - हबीबुर्रहमान, जगवीर छाबा, भोजराज सारस्वत, अजीतसिंह भाटी, बिरदीचंद सांखला, अर्जुनराम मेहरिया, नरेन्द्र सारस्वत व नटवर व्यास।
खींवसर - कानाराम पालियाल, केसाराम चौधरी, शंकरलाल चांडक, धनंजयसिंह, रामचंद्र उत्ता, बाबूलाल लोमरोड़, नंदकिशोर शर्मा।
जायल - मंजू बाघमार, संत नानकदास, सुरेश मेघवाल, सुरेन्द्र पंवार, सुरेश मेघवाल, बुधाराम गरवा।
नावां - विजयसिंह चौधरी, हरीश कुमावत, सरोज प्रजापत, ज्ञानाराम रिणवां
मकराना - श्रीराम भींचर, माधोराम चौधरी, रूपाराम मुरावतिया, ओंकारसिंह किरडोलिया, परसराम किरडोलिया, सुनीता रांदड़, महेंद्र रांदड़, गिरधर पलोड़, महिपाल राजपुरोहित, अरविंद चोकड़ा, नारायण सिंह मिंडकिया।
परबतसर - मानसिंह किनसरिया, रामअवतार शर्मा, दीपक तंवर व राजाराम प्रजापति।
मेड़ता - सुखाराम, जगदीश दायमा, मदनलाल रेगर, दीनाराम चौकीदार, स्टेफी चौहान, नाथूराम चौकीदार, बजरंग बावरी।
डीडवाना - यूनुस खान, रामाकिशन खीचड़ व कर्नल नंदकिशोर ढाका।
डेगाना - अजयसिंह किलक।
लाडनूं - मनोहरसिंह राठौड़, सागरमल नाहटा, जगदीशसिंह, नाथूराम कालेरा, अंजना शर्मा, रमेश चौधरी व ओमप्रकाश बागड़ा।