नागौर

नागौर जिले की चिकित्सा व्यवस्था वेंटिलेटर पर, सरकारी अस्पतालों में 35 फीसदी डॉक्टरों के पद रिक्त

जिले में चिकित्सकों के स्वीकृत 336 पदों के मुकाबले 220 कार्यरत, 116 रिक्त, वरिष्ठ विशेषज्ञ के 6 में से 5 पद रिक्त, कनिष्ठ विशेषज्ञ के 104 में से 43 पद रिक्त, वरिष्ठ विशेषज्ञ सर्जरी व कनिष्ठ विशेषज्ञ रेडियो के सभी पद रिक्त, कनिष्ठ विशेषज्ञ सर्जरी के 32 में से 16 पद रिक्त, सीनियर नर्सिंग ऑफिसर के 108 में से 66 पद रिक्त

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Jun 13, 2026
JLN hospital nagaur
JLN hospital nagaur

नागौर. प्रदेश के चिकित्सा मंत्री के गृह जिले नागौर में ही सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रही हैं। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के बड़ी संख्या में पद रिक्त होने से चिकित्सा व्यवस्था लगभग वेंटिलेटर पर पहुंच गई है। हालात यह हैं कि जिले में स्वीकृत 336 चिकित्सकों के पदों के मुकाबले केवल 220 चिकित्सक कार्यरत हैं, जबकि 116 पद रिक्त पड़े हैं। यानी करीब 35 प्रतिशत डॉक्टरों की कमी के चलते मरीजों को जिला चिकित्सालय जाना पड़ता है, जहां भी पूरा उपचार नहीं मिलने पर उन्हें नजदीकी जोधपुर, जयपुर या बीकानेर जाकर उपचार कराना पड़ता है।

सबसे चिंताजनक स्थिति विशेषज्ञ चिकित्सकों की है। जिले में वरिष्ठ विशेषज्ञ के छह स्वीकृत पदों में से केवल एक पद भरा हुआ है, जबकि पांच पद रिक्त हैं। वहीं कनिष्ठ विशेषज्ञों के 104 पदों में से 43 पद खाली पड़े हैं। चिकित्सा अधिकारियों के 154 पदों में से 40 पद रिक्त हैं। विशेषज्ञ सेवाओं की बात करें तो वरिष्ठ विशेषज्ञ सर्जरी तथा कनिष्ठ विशेषज्ञ रेडियोलॉजी के सभी पद खाली हैं। इसके अलावा कनिष्ठ विशेषज्ञ सर्जरी के 32 पदों में से 16 पद रिक्त होने से शल्य चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

नर्सिंग स्टाफ व वार्ड बॉय की भी कमी

चिकित्सकों के साथ-साथ नर्सिंग स्टाफ की भी भारी कमी है। जिले में सीनियर नर्सिंग ऑफिसर के 108 स्वीकृत पदों में से 66 पद रिक्त हैं। इससे अस्पतालों में भर्ती मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि अस्पतालों में वार्ड बॉय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 304 स्वीकृत पदों में से 244 पद खाली हैं और केवल 60 कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे में सफाई व्यवस्था, मरीजों की देखभाल और अस्पतालों के दैनिक संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पडऩा स्वाभाविक है।

संस्थापन में भी कई पद रिक्त

चिकित्सा विभाग में केवल चिकित्सकों के ही नहीं बल्कि संस्थापन अधिकारी से लेकर स्वीपर तक विभिन्न श्रेणियों के पद भी लंबे समय से रिक्त हैं। विभाग में कुल 59 प्रकार के स्वीकृत पदों में आधे से अधिक पद खाली होने से योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक कार्यों में भी बाधाएं आ रही हैं। चिकित्सा मंत्री गजेंद्रसिंह खींवसर के गृह जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की यह स्थिति प्रदेशभर की चिकित्सा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

Published on:
13 Jun 2026 11:17 am