
मायरे के कार्यक्रम का फोटो और गोले में मुस्लिम बहन को चुनरी ओढ़ाते हुए राकेश का फोटो: पत्रिका
Rajasthan Bhaat: नागौर जिले के मेड़ता उपखंड क्षेत्र के हरसोलाव गांव में हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सौहार्द की अनूठी मिसाल देखने को मिली। जहां देश के विभिन्न हिस्सों से अक्सर सांप्रदायिक तनाव और सामाजिक विभाजन की खबरें सामने आती हैं वहीं हरसोलाव गांव ने आपसी भाईचारे और रिश्तों की मजबूती का ऐसा उदाहरण पेश किया जिसकी हर ओर चर्चा हो रही है। यहां मुस्लिम परिवार की बेटी के विवाह में हिंदू धर्म के भाई मायरा भरने पहुंचे और पूरे गांव के सामने सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
हरसोलाव स्थित नारधणियों की ढाणी निवासी राकेश नारधणिया, रामकिशोर फौजी, धर्मेंद्र नारधणिया सहित दर्जनों ग्रामीण मुस्लिम परिवार के घर पहुंचे। यहां उन्होंने अपनी धर्म बहन बाजू उर्फ ताहिरा की बेटी (भांजी) के विवाह अवसर पर मायरे की रस्म निभाई। इस दौरान परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों की मौजूदगी में मायरा भरा। कार्यक्रम में सुखदेव नारधणिया, रामनिवास ज्याणी, गुड़िया, संजू, मंजू और विमला सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। हिंदू भाइयों द्वारा मायरा भरने की रस्म के दौरान माहौल भावुक हो गया और मेहमानों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया।
जानकारी के अनुसार नागौर जिले के हरसोलाव निवासी मुस्तकीम की पत्नी ताहिरा ने करीब 7 साल पहले राकेश नारधणिया को धर्म भाई बनाया था। तभी से दोनों परिवारों के बीच आत्मीय और पारिवारिक संबंध बने हुए हैं। समय के साथ यह रिश्ता और मजबूत होता गया। अब जब ताहिरा की बेटी यानी राकेश की भांजी की शादी का अवसर आया तो राकेश नारधणिया ने मामा होने का फर्ज निभाते हुए मायरे में 31 हजार रुपए नकद सहित अन्य आवश्यक सामग्री भेंट की। साथ ही विवाह की तैयारियों में भी सक्रिय सहयोग किया।
ताहिरा ने कहा कि उनके और धर्म भाई के रिश्ते में कभी मजहब आड़े नहीं आया। उन्होंने बताया कि राकेश और उनकी पत्नी को वह अपने सगे भाई-भाभी की तरह मानती हैं और दोनों परिवार हमेशा एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहते हैं। वहीं राकेश नारधणिया ने कहा कि रिश्ते खून से ही नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और सम्मान से भी बनते हैं। समाज में भाईचारे और सद्भाव की भावना सबसे बड़ी पूंजी है। ग्रामीण रामनिवास ज्याणी ने बताया कि हरसोलाव गांव में हिंदू और मुस्लिम समुदाय वर्षों से मिलजुलकर रहते आए हैं। यहां दोनों समुदाय एक-दूसरे के धार्मिक और पारिवारिक आयोजनों में भाग लेते हैं।
Updated on:
13 Jun 2026 01:01 pm
Published on:
13 Jun 2026 12:57 pm
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