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नागौर में बिखरे दफ्तर, खाली कुर्सियां… आखिर कब मिलेगा नागौर को मिनी सचिवालय?

किसी विभाग के पास अपना भवन नहीं तो कहीं वर्षों से अधिकारी नहीं, 151 बीघा में प्रस्तावित मिनी सचिवालय आज भी बजट का इंतजार, सुधरे सरकारी कार्यालयों का ढर्रा : अधिकारियों के पद रिक्त होने से आमजन को काटने पड़ रहे चक्कर
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किराए के भवन में संचालित नागौर का श्रम विभाग कार्यालय

किराए के भवन में संचालित नागौर का श्रम विभाग कार्यालय

नागौर. जिले की करीब 22 लाख आबादी को जिला मुख्यालय पर सरकारी कामकाज के लिए आज भी अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। किसी विभाग का कार्यालय शहर के बीच है तो कोई चार से पांच किलोमीटर दूर संचालित हो रहा है। कई विभाग किराए के भवनों में काम कर रहे हैं, वहीं अनेक महत्वपूर्ण विभागों में शीर्ष अधिकारियों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। ऐसे में आमजन को एक साधारण काम के लिए भी कई कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस समस्या का समाधान करीब साढ़े पांच साल पहले ही सरकार ने मिनी सचिवालय की परिकल्पना के रूप में खोज लिया था, लेकिन बीकानेर रोड पर 151 बीघा जमीन आवंटित होने के बावजूद यह महत्वाकांक्षी परियोजना आज तक बजट के अभाव में फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी है।

राज्य सरकार ने सभी जिला मुख्यालयों पर मिनी सचिवालय विकसित करने की योजना बनाई थी, ताकि विभिन्न विभागों के कार्यालय एक ही परिसर में संचालित हो सकें। नागौर के लिए भी बीकानेर रोड पर वर्ष 2021 में भूमि आवंटित कर दी गई, लेकिन इसके बाद परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। नतीजा यह है कि आज भी प्रशासनिक व्यवस्था बिखरी हुई है और नागरिकों के साथ-साथ अधिकारी भी इसकी कीमत चुका रहे हैं। नागौर जिला लगातार विस्तार कर रहा है। आबादी बढ़ रही है और सरकारी सेवाओं की मांग भी बढ़ती जा रही है। ऐसे में दशकों पुरानी प्रशासनिक व्यवस्था अब वर्तमान जरूरतों के अनुरूप नहीं रह गई है। मिनी सचिवालय जैसी परियोजना केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।

किराए के भवनों में चल रहे कई विभाग

जिले में श्रम विभाग, जिला रोजगार कार्यालय, राजीविका, नाबार्ड, आयुर्वेद विभाग सहित कई कार्यालय ऐसे हैं, जिनका अपना भवन नहीं है। ये विभाग किराए के परिसरों में संचालित हो रहे हैं। कुछ तो ऐसे हैं, जिनको संबंधित अधिकारियों के अलावा कोई जानता तक नहीं। इनमें से कुछ कार्यालय ऐसे स्थानों पर हैं, जिनकी जानकारी आम नागरिकों को भी आसानी से नहीं होती। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को संबंधित कार्यालय खोजने में ही काफी समय लग जाता है।

अधिकारियों के खाली पद बढ़ा रहे परेशानी

भवनों की कमी के साथ-साथ अधिकारियों के रिक्त पद भी प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। नगर परिषद में लंबे समय से आयुक्त का पद रिक्त है। नागौर कृषि प्रधान जिला होने के बावजूद कृषि विभाग में संयुक्त निदेशक सहित कई महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं। डिस्कॉम में अधीक्षण अभियंता का पद भी रिक्त चल रहा है। चिकित्सा विभाग में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) का पद खाली होने से अतिरिक्त प्रभार के सहारे काम चलाया जा रहा है। शिक्षा विभाग में भी कभी प्रारंभिक तो कभी माध्यमिक जिला शिक्षा अधिकारी का पद रिक्त रहने से प्रशासनिक निर्णय प्रभावित होते हैं। इन रिक्त पदों का सीधा असर आमजन के साथ विभागीय कर्मचारियों पर पड़ता है। कई मामलों में फाइलों के निस्तारण में देरी होती है और निर्णय लेने की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।

शहर में बिखरे हैं सरकारी कार्यालय

नागौर में कलक्ट्रेट शहर के मध्य स्थित है, लेकिन अधिकांश विभाग अलग-अलग क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं। शिक्षा विभाग, सीएमएचओ कार्यालय और महिला एवं बाल विकास विभाग बीकानेर रोड पर हैं। जिला परिवहन कार्यालय भी कलक्ट्रेट से करीब चार किलोमीटर दूर स्थित है। हाउसिंग बोर्ड कार्यालय बालवा रोड पर लगभग पांच किलोमीटर दूर है। सार्वजनिक निर्माण विभाग सर्किट हाउस के सामने, जबकि कृषि, पशुपालन, राष्ट्रीय राजमार्ग और डिस्कॉम के कार्यालय मानासर क्षेत्र में हैं। इसी प्रकार तहसील कार्यालय, उपखंड कार्यालय व उप पंजीयक कार्यालय फाटक पार मेला मैदान में संचालित हो रहे हैं। वन विभाग व खनिज विभाग के कार्यालय कॉलेज रोड पर स्टेडियम के सामने संचालित हो रहे हैं। जलदाय विभाग का कार्यालय वाटर वक्र्स चौराहे पर व आयकर विभाग, एसीबी कार्यालय मिर्धा कॉलेज के सामने हैं। इस बिखरी हुई व्यवस्था के कारण एक ही काम के लिए नागरिकों को कई किलोमीटर तक सफर करना पड़ता है।

मिनी सचिवालय बनने से बदल सकती है तस्वीर

यदि नागौर में मिनी सचिवालय का निर्माण होता है तो प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह बदल सकती है। प्रस्ताव के अनुसार कलक्टर, एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार, जिला परिषद, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, समाज कल्याण, सहकारिता, स्टांप एवं पंजीयन, कृषि, पशुपालन, चिकित्सा, जलदाय, सार्वजनिक निर्माण, वन, विद्युत वितरण निगम सहित करीब 38 विभाग एक ही परिसर में संचालित किए जा सकते हैं। इससे नागरिकों को एक ही स्थान पर अधिकांश सरकारी सेवाएं उपलब्ध होंगी। अधिकारियों के बीच समन्वय बेहतर होगा और कलक्ट्रेट में होने वाली बैठकों के लिए बार-बार वाहनों से आने-जाने की आवश्यकता भी कम होगी। इससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। गौरतलब है कि न्यायालय के लिए भी बीकानेर रोड पर जमीन आवंटित की गई है, ऐसे में न्यायालय संबंधी कार्य भी मिनी सचिवालय के पास ही हो जाएंगे।

आधुनिक प्रशासनिक परिसर की जरूरत

वर्तमान समय में अधिकांश सरकारी कार्यालय पुराने भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहां पार्किंग, प्रतीक्षालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। मिनी सचिवालय में आधुनिक कार्यालय, पर्याप्त पार्किंग, डिजिटल सुविधाएं, बेहतर रिकॉर्ड प्रबंधन और नागरिक सुविधा केंद्र विकसित किए जा सकते हैं। इससे प्रशासनिक कार्यों की गति और पारदर्शिता दोनों बढ़ेंगी।

प्रमुख समस्याएं

- 151 बीघा भूमि आवंटित होने के बावजूद मिनी सचिवालय का निर्माण शुरू नहीं।

- कई विभाग आज भी किराए के भवनों में संचालित।

- नगर परिषद, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और डिस्कॉम सहित कई विभागों में प्रमुख पद रिक्त।

- नागरिकों को अलग-अलग कार्यालयों के लिए दो से पांच किलोमीटर तक भटकना पड़ता है।

मिनी सचिवालय बनने से होंगे फायदे

- करीब 38 विभाग एक ही परिसर में संचालित होंगे।

- एक ही स्थान पर अधिकांश सरकारी सेवाएं उपलब्ध होंगी।

- विभागों के बीच समन्वय और निगरानी बेहतर होगी।

- अधिकारियों के समय और सरकारी संसाधनों की बचत होगी।

- आधुनिक कार्यालय, पर्याप्त पार्किंग और बेहतर नागरिक सुविधाएं विकसित होंगी।

- प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी।

पत्रिका व्यू....

नागौर जैसे बड़े और कृषि प्रधान जिले में मजबूत प्रशासनिक ढांचे की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। मिनी सचिवालय की योजना यदि शीघ्र साकार होती है तो इससे न केवल प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी, बल्कि लाखों नागरिकों को भी एक ही परिसर में बेहतर और समयबद्ध सरकारी सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। यह परियोजना अब केवल भवन निर्माण का विषय नहीं, बल्कि सुशासन और नागरिक सुविधा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुकी है।