नागौर

बिना पुलिस कप्तान के नागौर जिला, दो माह से एसपी की कुर्सी खाली

कानूनी व्यवस्था की चुनौती: एएसपी संभाल रहे जिला पुलिस की कमान, आइपीएस रोशन मीणा के तबादले के बाद से पद रिक्त
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Jul 21, 2026
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नागौर. कानून व्यवस्था के लिहाज से बेहद संवेदनशील जिला होने के बावजूद नागौर में पुलिस अधीक्षक का पद करीब दो महीने से रिक्त पड़ा है। आइपीएस रोशन मीणा के नागौर से तबादला होने के बाद राज्य सरकार ने यहां नए पुलिस अधीक्षक का पदस्थापन नहीं किया है। बहरहाल काम चलाऊ व्यवस्था के तहत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (आरपीएस) आशाराम चौधरी ही जिला पुलिस को संभाल रहे है। नागौर जिले में एक ही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक है। ऐसे में उनके पास अपनी सीट का ही काफी काम है।

आइपीएस मीणा का 20 मई को नागौर एसपी से टोंक पुलिस अधीक्षक के पद पर स्थानांतरण कर दिया गया था। तब उम्मीद थी कि राज्य सरकार आइपीएस की अगली तबादला सूची में नागौर को नया पुलिस अधीक्षक देगी। परन्तु इसके बाद जारी आइपीएस तबादला सूची में भी नागौर में किसी का पदस्थापन नहीं किया गया।

आइपीएस की नियुक्ति का प्रावधान

अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 के तहत जिला पुलिस अधीक्षक का पद भारतीय पुलिस सेवा (आइपीएस) के अधिकारी को सौंपा जाना चाहिए। नागौर में जिले की कमान आइपीएस की जगह फिलहाल आरपीएस के पास जिला पुलिस की कमान है।

कई बार कानून व्यवस्था की चुनौती

बीते समय में कई बार कानून व्यवस्था को लेकर चुनौती की िस्थति पैदा हुई। एक प्रसुता की मौत को लेकर कलक्टर-एसपी कार्यालय पर प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों से पुलिस का टकराव हुआ। इसे लेकर पुलिस ने मामला भी दर्ज किया हुआ है। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल भी कानून व्यवस्था और उनकी पुलिस सुरक्षा को लेकर आरोप लगाते रहे है। जिले में अवैध खनन की गतिविधियां, नशा तस्करी जैसे गंभीर मुद्दे भी है। जिलेभर से रोजाना परिवादी एसपी ऑफिस आते है, परन्तु पुलिस अधीक्षक की कुर्सी खाली होने से निराश होकर वापस लौट जाते है। हालांकि एएसपी परिवादियों की नियमित सुनवाई करते है।

मुख्यमंत्री दौरे में लगे डीडवाना एसपी

हाल ही में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के डेगाना उपखण्ड में दो दिवसीय दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपने को लेकर संकट पैदा हुआ। तब नागौर में एसपी का पद रिक्त होने के चलते पड़ोसी जिले डीडवाना के एसपी प्यारेलाल शिवरान को लगाया गया।

बार-बार तबादला आदेशों में संशोधन

पुलिस अधीक्षक के नहीं होने पर हाल में पुलिस विभाग में बड़े पैमाने पर तबादले की कार्यवाही भी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की ओर से की गई। सिपाही, हवलदार, एएसआइ, एसआइ व सीआइ के तबादला आदेश जारी हुए। इनमें कई बार संशोधन आदेश भी जारी किए गए। जिन्हें लेकर पुलिस महकमे में कई दिन तक चर्चा भी चली।

पत्रिका टॉपिक एक्सपर्ट : जिले में पुलिस कप्तान जरूरी

राजस्थान पुलिस अधिनियम 2007 की धारा 16 की उपधारा 2 के अनुसार किसी पुलिस जिले में पुलिस बल के नियंत्रण, पर्यवेक्षण और निदेशन की शक्ति, पुलिस महानिदेशक के सम्पूर्ण नियंत्रण के अधीन जिला पुलिस अधीक्षक में निहित रहती है। पुलिस अधीक्षक के पद पर भारतीय पुलिस सेवा का अधिकारी ही लगता है। पुलिस अधीक्षक की सहायता के लिए एक या एक से अधिक अपर पुलिस अधीक्षक, उप अधीक्षक या सहायक पुलिस अधीक्षक लगाए जा सकते है। जो राजस्थान सेवा के अधिकारी हो सकते है। नागौर जिला पुलिस प्रशासन की दृष्टि से अतिसंवेदनशील माना जाता है। यहां पर पुलिस कप्तान का होना जरूरी है।

- महावीर बिश्नोई, वरिष्ठ अधिवक्ता नागौर

Updated on:
21 Jul 2026 10:43 am
Published on:
21 Jul 2026 10:43 am