
दिनेश कुमार स्वामी @ नागौर। नवरात्र के दौरान छोटे कस्बों से लेकर महानगरों तक रामलीलाओं का मंचन हो रहा है। कहीं वर्षों से कलाकार विभिन्न पात्रों को जीवंत कर रहे हैं, तो कहीं नई पीढ़ी इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है। लेकिन नागौर की रामलीला की कहानी कुछ अलग है। यहां मंच पर भगवान श्रीराम के परिवार के प्रमुख पात्रों की भूमिका बेटियां निभाती हैं। खास बात यह है कि यह परंपरा किसी एक साल की पहल नहीं, बल्कि कई वर्षों से निरंतर जारी है। इतना ही नहीं, रामलीला के पंडाल की व्यवस्था और प्रबंधन की जिम्मेदारी भी एक महिला संभाल रही हैं।
नागौर में इस अनूठी रामलीला की शुरुआत वर्ष 2016 में निजी स्कूल के शिक्षक श्रद्धानंद तिवारी ने की थी। उस समय यहां रामलीला मंचन करने वाले पारंपरिक कलाकारों की मंडली उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में तिवारी ने अपने उन विद्यार्थियों को तैयार किया, जो स्कूली पढ़ाई के दौरान रामलीलाओं से जुड़े रहे थे। इसी के साथ उन्होंने एक संकल्प लिया कि रामलीला के मंच पर बेटियों को भी प्रमुख भूमिकाएं निभाने का अवसर दिया जाएगा।
आमतौर पर पारंपरिक रामलीलाओं में महिला पात्रों की भूमिका भी पुरुष कलाकार निभाते हैं, लेकिन नागौर की रामलीला ने इस परंपरा से अलग पहचान बनाई है। यहां बेटियां न केवल महिला पात्रों, बल्कि भगवान श्रीराम के परिवार के प्रमुख पुरुष पात्रों का अभिनय भी करती हैं। इस पहल ने रामलीला को एक नई पहचान देने के साथ ही बेटियों की प्रतिभा को मंच प्रदान किया है।
रामलीला में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की भूमिका श्रद्धानंद तिवारी की पुत्री वसुंधरा तिवारी निभाती हैं। लक्ष्मण के किरदार में प्रिंसीबारोठिया नजर आती हैं, जबकि भरत की भूमिका हर्षिता मिश्रा निभाती हैं। सीता की माता सुनैना का पात्र प्रेमलता जैन निभाती हैं। गर्विता मिश्रा शत्रुघ्न और ताड़का की भूमिका में नजर आती हैं, वहीं कौशल्या का किरदार संगीता रांकावत निभाती हैं।
इस बार रामलीला का मंचन नागौर के बादलवाड़ा में किया जा रहा है। मंच पर कलाकार अपनी भूमिकाओं से दर्शकों को रामकथा से जोड़ रहे हैं, तो पर्दे के पीछे व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने की जिम्मेदारी विनीता तिवारी संभाल रही हैं। इस तरह मंचन से लेकर प्रबंधन तक महिलाओं की भागीदारी है।
नागौर की रामलीला की खासियत यह भी है कि इसमें भाग लेने के लिए अलग-अलग शहरों से लोग आते हैं। हनुमानजी की भूमिका निभाने के लिए पिलानी से इतिहास के व्याख्याता राजेश मिश्रा पहुंचते हैं। श्रीगंगानगर के मैकेनिक रामचन्द्र मेघनाद का किरदार निभाते हैं, जबकि सूरतगढ़ के दुकानदार सुनील कुमार शुक रावण के दूत की भूमिका में नजर आते हैं। श्रद्धानंद तिवारी स्वयं परशुराम का पात्र निभाते हैं। वहीं, रतनगढ़ के किसान शंकर कुमार अहिरावण की भूमिका अदा करते हैं। आकाश तिवारी रावण के किरदार में मंच पर उतरते हैं। अलग-अलग पेशों से जुड़े इन कलाकारों का एक मंच पर जुटना रामलीला के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।
बेटियां आज हर क्षेत्र में पुरुषों की बराबरी कर रही है। थियेटर में तो लड़कियां आने लगी है लेकिन हमारी कला, धर्म और सनातन संस्कृति को सदियों से पोषित कर रहे रामलीला के मंच आज भी बेटियों के लिए पूरी तरह नहीं खुले है। नागौर में रामलीला मंचन में 15 बेटियां भागीदारी निभाती है। जरूरत है समाज को रामलीला जैसी धरोहर को प्रोत्साहन की। आज मोबाइल और इंटरनेट ने नई पीढ़ी को इस मंच से दूर कर दिया है।
- वसुंधरा तिवारी, रामलीला कलाकार
नागौर. साहित्य कला धर्म संस्कृति सेवा समिति की ओर से बंसल गार्डन बाजरवाड़ा नागौर में आयोजित की जा रही भव्य रामलीला में गुरुवार को पांचवें दिन भरत मिलाप का मंचन किया गया। सबसे पहले निषाद से श्रीराम का मिलन ‘केवट’ का प्रसंग दर्शकों की आंखों में उतर गया। इसके बाद दशरथ मरण का दुःखद दृश्य का मंचन हुआ। लीला के मध्य-भाग में भरत को मामाजी के यहां से बुलाया गया, कैकई भरत संवाद तत्पश्चात कौशल्या के समक्ष अपने विनम्र भाव प्रकट किए। लीला का उत्कर्ष तब हुआ जब पूरे अयोध्या को लेकर भरत वन में राम को मनाने निकल पड़े। राम जब तृप्त नहीं हुए तो वहां महाराजा जनक ने निर्णय सुनाया भरत खड़ाऊ लेकर वापस अयोध्या आए और सिंहासन पर विराजमान किया।
देवकिशन सोनी ने बताया कि आने वाले दिनों में लीला और भी अधिक भव्य रूप दिया जाएगा। भाषा-आभूषण, संगीत-प्रयोग और मंच-सज्जा तीनों को बढ़ावा मिलेगा। विनीता तिवारी ने कहा कि इस सांस्कृतिक महायज्ञ में बढ़-चढ़ कर सहभागिता करें। रोजाना शाम सवा आठ बजे से रामलीला का मंचन हो रहा है। कलाकार देव तिवारी, विदित अरोड़ा, वसुंधरा, भावना, झिलमिल, प्रिंसी, हर्षिता, गर्विता, हुक्मीचंद, सार्थक, दुर्गा, प्रेमलता, पुनीत, जितेंद्र गोयल, विष्णु, खुशवीर, रमेश, महेंद्र, नकुल, महेश, देवकिशन व आकाश तिवारी आदि ने लीला के पात्रों को मंच पर साकार किया।