
नागौर. घिसटते-घिसटते पहुंचे भी तो उनकी बात को सुनने- समझने की कोशिश ही नहीं की गई। सब उन्हें इधर से उधर कहकर अपनी बला टालते रहे। पीड़ा से आहत दिव्यांग पंजीकरण के लिए कोई अपने परिजन के साथ भटक हा था तो कोई अकेले। किसी का तो पंजीकरण भी शाम तक नहीं हो पाया। वह घंटों अकेले उपेक्षित अव्यवस्था के तिरस्कार से कोने में बैठा ही रह गया। स्थिति यह थी कि दिव्यांगों की परेशानी शिविर में मौजूद किसी भी अधिकारी को दिखी तक नहीं। इतना ही नहीं प्रशासनिक अधिकारियों की टीम के साथ शिविर का शुभारंभ करने पहुंचे जिले के प्रभारी मंत्री बंशीधर बाजिया व विधायक हबीबुर्रहमान सरकार की उपलब्धियों का बखान कर निकल लिए। पीडि़तों की मुश्किल कम करने के नाम पर वे आए तो पर ज्यादा नजर नहीं आए। दिव्यांगों से किसी ने उनके हालात व समस्या जानने की तक की जहमत नहीं उठाई। यह हालात दिखे बुधवार को जिला प्रशासन, चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग एवं सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग की ओर से आयोजित पंडित दीन दयाल उपाध्याय विशेष योग्यजन अभियान के तहत लगे शिविर में। शहर के टाउनहाल में सुबह शुरू हुए शिविर में निशक्तता प्रमाणन के लिए दिव्यांगों की शहर एवं इसके आसपास के क्षेत्रों से लोगों का आना शुरू हो गया। दोपहर में 12 बजे तक पूरा परिसर दिव्यांगों से भरा नजर आया। हालांकि यहां पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, रोडवेज, राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम, नगरपरिषद, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पंडित दीनदयाल अन्त्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन आदि विभागों के काउण्टर तो लगे थे, लेकिन यहां पर आए दिव्यांग परेशान नजर आए। यूं तो यहां पर मंगलम सेवा संस्थान की ओर से भोजन आदि की व्यवस्था नि:शुल्क की गई थी, लेकिन लोग तो पानी के लिए भी बेहाल दिखे।
यूनिक कार्ड में रहेगा पूरा डाटा
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री बंशीधर बाजिया ने कहा कि चालीस प्रतिशत से अधिक नि:शक्तता पर सरकार की ओर से दिव्यांगों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं हैं। इनका पूरा लाभ मिलेगा। विधानसभा क्षेत्रवार मुख्यालयों पर भी इस तरह के एक दिवसीय शिविर लगेंगे। 30 प्रतिशत नि:शक्तता वालों को भी सरकार की ओर से आवश्यक सहायक उपकरण दिलवाने का प्रावधान किया गया है। दिव्यांगों को नि:शक्तता का प्रमाणन और रजिस्ट्रेशन का कार्य 21 दिसम्बर तक चलेगा। प्रमाणन और पंजीयन होने के बाद दिव्यांगों का एक यूनिक आईडी कार्ड बनेगा। इसमें उनका पूरा हैल्थ डाटा अंकित होगा। इस आईडी के बाद दिव्यांगों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अधिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। कार्यक्रम को विधायक हबीबुर्रहमान, मेड़ता विधायक सुखराम नेतडिय़ा, जिला कलक्टर कुमारपाल गौतम, प्रभारी सचिव सुनील मल्होत्रा ने भी संबोधित किया।
कहां कराएं पंजीकरण
शिविर में कोई यह बताने वाला नहीं मिला कि दिव्यांग पंजीकरण कराने के लिए कहां जाएं। हालांकि पंजीकरण कराने की व्यवस्था मुख्य गेट के पास ही थी, लेकिन उन्हें इसकी भी जानकारी नहीं मिल पाने से काफी परेशानी हुई। बमुश्किल पंजीकरण के काउण्टर पर पहुंच भी जाते तो फिर भीड़ व अव्यवस्था के चलते इसमें सफल नहीं हो पाते। थक-हारकर कड़ी धूप में किनारे बैठकर भीड़ के खत्म होने का इंतजार करते दिव्यांगों की काफी संख्या रही।
साठ से अधिक को मिले प्रमाण पत्र
शिविर में 398 लोगों कीे नि:शक्तता के प्रमाणन की जांच के बाद मेडिकल बोर्ड ने 322 दिव्यांगों की नि:शक्तता प्रमाणित की। इसके साथ ही 60 से अधिक दिव्यांगों को प्रमाण पत्र जारी किए गए।
कहां कराएं पंजीकरण
शिविर में कोई यह बताने वाला नहीं मिला कि दिव्यांग पंजीकरण कराने के लिए कहां जाएं। हालांकि पंजीकरण कराने की व्यवस्था मुख्य गेट के पास ही थी, लेकिन उन्हें इसकी भी जानकारी नहीं मिल पाने से काफी परेशानी हुई। बमुश्किल पंजीकरण के काउण्टर पर पहुंच भी जाते तो फिर भीड़ व अव्यवस्था के चलते इसमें सफल नहीं हो पाते। थक-हारकर कड़ी धूप में किनारे बैठकर भीड़ के खत्म होने का इंतजार करते दिव्यांगों की काफी संख्या रही।
साठ से अधिक को मिले प्रमाण पत्र
शिविर में 398 लोगों कीे नि:शक्तता के प्रमाणन की जांच के बाद मेडिकल बोर्ड ने 322 दिव्यांगों की नि:शक्तता प्रमाणित की। इसके साथ ही 60 से अधिक दिव्यांगों को प्रमाण पत्र जारी किए गए।