नागौर. जिले में आबादी लगातार बढ़ रही है, शहरी सीमाएं फैल चुकी हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में भी गतिविधियां तेज हुई हैं, लेकिन इसके अनुरूप पुलिस थानों की नफरी नहीं बढ़ पाई है। स्थिति यह है कि जिले के पुलिस थानों में करीब 35 प्रतिशत पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं। जब थानों […]
नागौर. जिले में आबादी लगातार बढ़ रही है, शहरी सीमाएं फैल चुकी हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में भी गतिविधियां तेज हुई हैं, लेकिन इसके अनुरूप पुलिस थानों की नफरी नहीं बढ़ पाई है। स्थिति यह है कि जिले के पुलिस थानों में करीब 35 प्रतिशत पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं। जब थानों के पद सृजित किए गए थे, उस समय न तो आबादी इतनी अधिक थी और न ही अपराध का स्वरूप आज जितना जटिल था। इसके बावजूद आज भी पुलिस व्यवस्था उन्हीं पुराने मानकों पर संचालित हो रही है।
21 थाने, लेकिन सुरक्षा की रीढ़ कमजोर
वर्तमान में नागौर जिले में कुल 21 पुलिस थाने संचालित हैं, जिनमें शहरी, ग्रामीण, महिला पुलिस थाना और साइबर थाना शामिल हैं। इन सभी थानों के लिए कुल 839 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल 547 पदों पर ही पुलिसकर्मी कार्यरत हैं। 291 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। आंकड़ों के अनुसार कुल स्वीकृत पदों के मुकाबले हर तीसरा पद रिक्त है, जिससे जिले की पुलिस व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव साफ नजर आता है।
शहरी थानों की स्थिति भी बेहतर नहीं है। कोतवाली नागौर में 69 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 40 पुलिसकर्मी तैनात हैं, जबकि 29 पद खाली हैं। सदर थाना नागौर में 55 पद स्वीकृत हैं, लेकिन सिर्फ 32 पुलिसकर्मी कार्यरत हैं। मूंडवा थाना 42 स्वीकृत पदों में से 30 के सहारे काम कर रहा है और 12 पद रिक्त हैं। कुचेरा थाना में 47 पदों के मुकाबले केवल 29 पुलिसकर्मी तैनात हैं। मेड़ता सिटी थाना की स्थिति सबसे कमजोर मानी जा रही है, जहां 47 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 24 पुलिसकर्मी कार्यरत हैं और 23 पद खाली हैं।
ग्रामीण थानों में नफरी संकट ज्यादा गंभीर
ग्रामीण इलाकों में स्टाफ की कमी और ज्यादा नाजुक स्थिति में है। श्रीबालाजी थाना में 36 पदों में से केवल 20 पुलिसकर्मी कार्यरत हैं। पांचोड़ी थाना में भी यही स्थिति है। खींवसर थाना में 38 स्वीकृत पदों के मुकाबले 21 पुलिसकर्मी कार्यरत हैं और 17 पद खाली हैं। रोल थाना में 37 पदों के मुकाबले केवल 21 पुलिसकर्मी तैनात हैं। सुरपालिया थाना में 44 पदों में से 23 कार्यरत हैं और 21 पद रिक्त हैं। खाटू थाना में 36 पदों के मुकाबले 20 पुलिसकर्मी हैं, जबकि 16 पद खाली हैं। जसनगर थाना में 43 स्वीकृत पदों के मुकाबले 27 पुलिसकर्मी कार्यरत हैं। मेड़ता रोड थाना 37 पदों में से 27 के सहारे चल रहा है और गोटन थाना में 41 स्वीकृत पदों के मुकाबले 27 पुलिसकर्मी तैनात हैं।
जुगाड़ से चल रही व्यवस्था, असर सीधे कानून व्यवस्था पर
कई थानों में न्यूनतम स्टाफ के सहारे काम चलाया जा रहा है। एक ही पुलिसकर्मी को कई मामलों की जांच और अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही हैं। इसका सीधा असर अपराध नियंत्रण, नियमित गश्त और मामलों के निस्तारण पर पड़ रहा है। आपात स्थिति में मौके पर पहुंचने का समय बढ़ रहा है। लगातार अतिरिक्त ड्यूटी के कारण पुलिसकर्मियों पर मानसिक और शारीरिक दबाव भी बढ़ रहा है, जिसका असर कार्यकुशलता पर साफ दिखाई देता है।
आवश्यक कदम उठाए हैं