
नागौर. जिले सहित प्रदेश में इन दिनों खरीफ बुआई का समय चल रहा है और खेतों में कहीं बुआई की जा रही है तो कहीं खेत तैयार किया जा रहा है, लेकिन इसी बीच केंद्र सरकार के एक नए आदेश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से 11 जून को जारी अधिसूचना के तहत डीजल की खुदरा बिक्री पर नए प्रतिबंध लागू किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य जमाखोरी और कालाबाजारी रोकना है, लेकिन कृषि प्रधान नागौर जिले में किसानों को इससे बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
नए आदेश के अनुसार पेट्रोल पंप संचालक अब डीजल केवल वाहन के टैंक अथवा पीईएसओ से अनुमोदित कंटेनर में ही बेच सकेंगे। साथ ही किसी एक ग्राहक या वाहन को एक दिन में 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं दिया जाएगा। यह आदेश फिलहाल 90 दिनों के लिए लागू किया गया है।
बार-बार पम्प पर जाना मुश्किल
नागौर जिले में हर साल खरीफ और रबी सीजन के दौरान किसान खेतों में ट्रैक्टर से बुआई करते हैं, जिसके लिए किसान एक साथ बड़ी मात्रा में डीजल खरीदते हैं। आमतौर पर किसान एक बार में 200 से 500 लीटर तक डीजल ड्रम में भरवाकर खेतों पर ले जाते हैं, ताकि बार-बार पेट्रोल पंप के चक्कर नहीं लगाने पड़ें। लेकिन नए नियम लागू होने के बाद किसानों को यह सुविधा नहीं मिल पाएगी। किसानों का कहना है कि जिले के कई गांव पेट्रोल पंपों से 15 से 30 किलोमीटर दूर स्थित हैं। ऐसे में बुआई के व्यस्त समय में बार-बार डीजल लेने जाना समय और खर्च दोनों बढ़ाएगा। खेतों में काम के दौरान डीजल खत्म होने पर मशीनें बंद हो जाएंगी और कृषि कार्य प्रभावित होगा। गौरतलब है कि नागौर जिले में खरीफ सीजन में करीब 8 लाख हैक्टेयर में और रबी में करीब साढ़े तीन लाख हैक्टेयर में बुआई की जाती है।
सरकार के अपने तर्क, पर किसानों को राहत की मांग
सरकार ने आदेश में स्पष्ट किया है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता बनाए रखने, जमाखोरी रोकने और आम उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कालाबाजारी, अनधिकृत खरीद और ईंधन के दुरुपयोग के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन किसानों को इन नियमों से राहत की मांग उठ रही है।
किसानों के लिए बने चुनौती
कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों के लिए अलग व्यवस्था या विशेष छूट नहीं दी गई तो खरीफ और आगामी रबी सीजन में डीजल की उपलब्धता को लेकर व्यावहारिक समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। जिले में अच्छी बारिश के बाद बुआई की तैयारियां तेज हो रही हैं और ऐसे समय में डीजल आपूर्ति से जुड़े नए नियम किसानों के लिए नई चुनौती बनकर सामने आए हैं।
किसानों को मिले राहत
सरकार ने एक दिन में एक ग्राहक या वाहन को 200 लीटर डीजल देने का प्रावधान किया है, लेकिन किसानों को इस प्रावधान से बाहर रखा जाना चाहिए। क्योंकि ट्रैक्टर का डीजल टैंक केवल 40-45 लीटर का होता है। बुआई की इस सीजन में किसान को कई दफा खेत से पम्प के चक्कर लगाने पड़ेगे, जिससे समय और धन की बर्बादी होगी। गाइडलाइन में परिवर्तन कर किसानों को राहत देनी चाहिए।
- सुरेश रोज, प्रगतिशील किसान, खजवाना
हमें स्पष्ट आदेश
हमें तेल कम्पनियों के स्पष्ट आदेश हैं कि पेट्रोल-डीजल केवल वाहनों में ही भरा जाए। जरिकेन, ड्रम या अन्य किसी बर्तन में पेट्रोल-डीजल नहीं भर सकते।
- शिवप्रकाश चौधरी, पेट्रोल पम्प संचालक, नागौर
वाहन में ही भर सकेंगे डीजल
भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के नए आदेशानुसार पेट्रोल पंप संचालक अब डीजल केवल वाहन के टैंक अथवा पीईएसओ से अनुमोदित कंटेनर में ही बेच सकेंगे। साथ ही किसी एक ग्राहक या वाहन को एक दिन में 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं दिया जाएगा।
- अंकित पचार, जिला रसद अधिकारी, नागौर