
नागौर शहर में रक्तदान शिविर की तस्वीर
नागौर. नागौर जिले में पिछले एक दशक में रक्तदान को लेकर लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां रक्तदान को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और आशंकाएं रहती थीं, वहीं अब सूचना मिलते ही युवा और सामाजिक संगठन रक्त देने के लिए अस्पतालों और ब्लड बैंकों तक पहुंच जाते हैं। जागरूकता बढऩे, निजी ब्लड बैंकों की उपलब्धता और डिजिटल नेटवर्किंग के कारण जिले में मरीजों व घायलों को समय पर रक्त मिलने लगा है। हालांकि कुछ शिविरों में एकत्र किया गया रक्त बेचने की शिकायत के बाद रक्तदाताओं को निराशा जरूर हुई, लेकिन अब लाइव डोनर तैयार करने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2026 के लिए विश्व रक्तदाता दिवस की थीम ‘मानवता की एक बूंद: रक्तदान करें, जीवन बचाएं’ निर्धारित की है। इसका उद्देश्य स्वैच्छिक और नि:शुल्क रक्तदान को बढ़ावा देना, नियमित रक्तदाताओं का सम्मान करना और आपात स्थितियों में रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
युवाओं की बढ़ती भागीदारी
जिले के युवाओं में रक्तदान को लेकर अब इस कदर जागरूकता आई है कि उन्हें कभी भी याद कर लो, वे रक्तदान करने पहुंच जाते हैं। नियमित रूप से रक्तदान शिविरों में भी हिस्सा ले रहे हैं। कई युवाओं ने 25 से 35 बार रक्तदान कर अन्य लोगों के लिए प्रेरणा प्रस्तुत की है। सोशल मीडिया के माध्यम से रक्त की आवश्यकता की सूचना तेजी से फैलती है और डोनर तुरंत सक्रिय हो जाते हैं।
दुर्लभ रक्त समूह वाले डोनर भी आगे आए
नागौर के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में ‘ओ’ नेगेटिव जैसे दुर्लभ रक्त समूह वाले रक्तदाता भी सामने आए हैं। आपातकालीन स्थितियों में ऐसे डोनर कई मरीजों के लिए जीवनदाता साबित हो रहे हैं।
प्रशासन और सामाजिक संगठनों का सहयोग
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के मार्गदर्शन में समय-समय पर आरोग्य एवं रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते हैं। लायंस क्लब, बैंक कर्मी, व्यापारिक संगठन और विभिन्न सामाजिक संस्थाएं भी सक्रिय रूप से सहयोग कर रही हैं।
पत्रिका ने आयोजित करवाए रक्तदान शिविर
राजस्थान पत्रिका ने विभिन्न सामाजिक संस्थाओं एवं सरकारी संस्थाओं के सहयोग से जिले में कई रक्तदान शिविर आयोजित करवाए, जिससे युवाओं में न केवल रक्तदान के प्रति जागरुकता आई, बल्कि रक्तदान को लेकर जो भ्रांतियां थी, वो भी दूर हुई और लोग बढ-चढकऱ रक्तदान करने लगे। पत्रिका ने नवोदय विद्यालय एलुमनी सोसायटी, श्री बीआर मिर्धा कॉलेज नागौर, यूथ आइकॉन व रक्तवीर महेन्द्र गालवा आदि के सहयोग से समय-समय पर रक्तदान शिविर आयोजित किए, जिससे लोगों में रक्तदान को लेकर जागरूकता आई। गालवा ने ‘यूथरक्तक्रांति’ऐप विकसित कर लाखों रक्तदाताओं का डेटा ऑनलाइन उपलब्ध कराया, जिससे जरूरत पडऩे पर लाइव डोनर खोजने में आसानी हुई।
रक्तकोष फाउंडेशन का विशेष योगदान
रक्तदान के क्षेत्र में जागरूकता फैलाने और जरूरतमंदों को रक्त उपलब्ध कराने में रक्तकोष फाउंडेशन की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इसके संस्थापक आईएएस डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने जालोर से इस अभियान की शुरुआत की और नागौर में जिला कलक्टर रहते हुए कई सकारात्मक प्रयास किए। उनकी पहल के बाद जिले में रक्त की उपलब्धता की व्यवस्था अधिक सुदृढ़ हुई और मरीजों को रक्त के लिए कम भटकना पड़ता है।
Published on:
14 Jun 2026 11:10 am
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