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असम विमान हादसा : शहीद खेमाराम की पार्थिव देह आज पहुंचेगी पैतृक गांव, सिर्फ 6 महीने ही बची थी नौकरी

Khemaram Kumawat: असम विमान हादसे में डीडवाना-कुचामन जिले के शहीद हुए खेमाराम कुमावत की नौकरी सिर्फ 6 महीने ही बची थी। इससे पहले हुए विमान हादसे में वे शहीद हो गए। आज उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव लाया जाएगा। इससे पहले नावां से तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी।

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नागौर

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Kamal Mishra

Jun 14, 2026

Khemaram Kumawat

Assam Plane Crash: शहीद खेमाराम कुमावत की पार्थिव देह आज पहुंचेगी पैतृक गांव (फोटो-पत्रिका)

नागौर। जिस घर में कुछ दिनों बाद बेटे की सगाई की खुशियां गूंजने वाली थीं, वहां शनिवार को अचानक मातम पसर गया। ग्राम पंचायत पांचोता के कलाली नदी निवासी भारतीय वायु सेना के अग्निवीर खेमाराम कुमावत (24) के असम के जोरहाट एयरबेस पर हुए विमान हादसे में शहीद होने की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरा परिवार स्तब्ध रह गया। माता-पिता की आंखों के सामने बेटे के सुनहरे भविष्य के सपने थे, लेकिन देश सेवा के मार्ग पर निकले इस जवान ने राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देकर अपने जीवन को अमर कर दिया।

डीडवाना-कुचामन के जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल राजेंद्र सिंह ने बताया कि शहीद की पार्थिव देह आज यानी रविवार को नावां पहुंचेगी। यहां से तिरंगा यात्रा के साथ उनके पैतृक गांव पांचोता ले जाई जाएगी। वहां सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा।

देश सेवा परिवार की विरासत

खेमाराम के परिवार में देश सेवा केवल पेशा नहीं बल्कि परंपरा है। खेमाराम चार भाई और एक बहन हैं। बड़े भाई गोविंद कुमावत सीआईएसएफ में कांस्टेबल हैं, जबकि छोटे भाई मनोज कुमावत सीआरपीएफ में हेड कांस्टेबल हैं। भाई राजेंद्र परिवार की जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। पिता रामदेव कुमावत ने वर्षों तक विदेश में मेहनत कर परिवार का पालन-पोषण किया और अब गांव में कृषि एवं पशुपालन से जुड़े हैं।

हार नहीं मानी, सपना पूरा कर दिखाया

दो अक्टूबर 2001 को जन्मे खेमाराम बचपन से ही मेधावी, अनुशासित और मिलनसार स्वभाव के थे। उनके मन में बचपन से देश सेवा का सपना था। वर्ष 2020 में उनका चयन एयरफोर्स में हुआ था, लेकिन भर्ती प्रक्रिया रद्द होने से सपना अधूरा रह गया। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। लगातार तैयारी जारी रखी और वर्ष 2022 में भारतीय वायु सेना में अग्निवीरवायु के रूप में चयनित हुए। दिसंबर 2022 में सेवा शुरू करने के बाद उन्होंने अपने समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा से अधिकारियों एवं साथियों के बीच विशेष पहचान बनाई।

गांव ने खोया अपना होनहार बेटा

शहादत की खबर मिलते ही पांचोता सहित पूरे नावां क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। पंचायत प्रशासक महेंद्र सिंह राठौड़, समाजसेवी राधेश्याम कारगवाल सहित जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने शोक व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना है कि आज गांव की हर आंखें नम हैं, लेकिन हर दिल में गर्व है कि पांचोता की मिट्टी का एक लाल देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर गया। खेमाराम की शहादत आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देती रहेगी।

इसी साल होना था रिटायरमेंट

खेमाराम कुमावत ने ने भारतीय वायु सेना में चयन के बाद बेलगांव (कर्नाटक) प्रशिक्षण प्राप्त किया था। पहली तैनाती उनकी सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) में हुई थी। परिजनों के अनुसार पिछले तीन-चार माह से खेमाराम कुमावत असम के जोरहाट में तैनात थे। खेमाराम का चार वर्षीय कार्यकाल 6 महीने बाद दिसम्बर महीने में ही खत्म होने वाला था, लेकिन उसके पहले ही विमान हादसे में वे शहीद हो गए।