नागौर में पेयजल आपूर्ति बढ़ाने के लिए नौखा दईया पम्पिंग स्टेशन की क्षमता बढ़ाने की परियोजना वर्ष 2022 में मंजूर हुई। तीन साल बाद कार्यादेश मई 2025 में जारी किए गए। इसके बाद काम शुरू हुआ लेकिन धीमी गति से कार्य होने से अभी तक जनता को लाभ नहीं मिल पाया है।
नागौर. जलदाय विभाग की ओर से नोखा-दैया पम्पिंग स्टेशन के विस्तार कार्य में देरी का खामियाजा पूरे जिले को भुगतना पड़ रहा है। जल शोधन और पम्पिंग क्षमता को 74 एमएलडी से बढ़ाकर 148 एमएलडी करने का प्रस्ताव वर्ष 2022 में मंजूर हुआ था, लेकिन कार्यादेश मई 2025 में जारी किया गया। करीब 64 करोड़ रुपए की लागत से यहां 18 नए बड़े पम्प लगाए जा रहे हैं, जो पुराने पम्पों की तुलना में दोगुनी क्षमता से पानी उठाएंगे।
विभागीय अधिकारियों का दावा है कि नए पम्प लगने से बिजली की बचत होगी और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी सुचारू जलापूर्ति हो सकेगी। यदि यह कार्य समय पर शुरू हो जाता तो जिले को मांग के अनुरूप पानी मिलने लगता।
वर्तमान में जिले को प्रतिदिन 124 से 125 एमएलडी पानी की जरूरत है, जबकि नोखा-दैया स्टेशन से मात्र 74 एमएलडी पानी ही मिल पा रहा है। 50 एमएलडी से अधिक की कमी के कारण नागौर शहर, मेड़ता, मूण्डवा, डेगाना, कुचेरा सहित 400 से ज्यादा गांवों और कस्बों में पेयजल संकट गहरा गया है। विभाग नलकूपों और टैंकरों से जलापूर्ति का दावा कर रहा है, लेकिन शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की किल्लत हैं।
पम्पिंग स्टेशन की क्षमता बढ़ाने की परियोजना वर्ष 2022 में मंजूर हुई थी, लेकिन कार्यादेश मई 2025 में जारी किया गया। एचएससी पम्पों की आपूर्ति हो चुकी है, लेकिन कंट्रोल पैनल और ट्रांसफार्मर लगाने का कार्य शेष है। नए प्लांट की डिजाइनिंग अंतिम चरण में है।
अधिकारियों के मुताबिक नया प्लांट पूरी तरह ऑटोमेटिक सिस्टम पर काम करेगा। इसमें तेज रफ्तार से गंदे पानी की सफाई करने वाली मशीनें और गंदलेपन को नियंत्रित करने की आधुनिक सुविधा रहेगी। परियोजना को जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य तय है, लेकिन धीमी गति को देखते हुए काम समय पर पूरा होना मुश्किल है।देरी के सवाल पर अधिकारियों का कहना है कि प्रस्ताव मंजूर होने के बाद डिजाइनिंग में समय लगता है।
45 दिन की इंदिरा गांधी नहर नहरबंदी गत 14 मई को समाप्त हो गई, 20 मई से पानी नागौर पहुंचने लगा है। इसके बाद भी पानी का संकट समाप्त नहीं हुआ। नागौर जिले में जलापूर्ति के लिए बीकानेर के नोखा दैया डैम में पानी जमा किया जाता है। डैम की कुल क्षमता 10,110 एमएल है। इसी डैम से नागौर और डीडवाना-कुचामन जिले के 13 शहर और 1616 गांव की 40 फीसदी आबादी को पानी दिया जाता है। इतना ही नहीं, पानी की कमी पूर्ति करने के लिए जलदाय विभाग ने 3900 हैंडपंप और 2800 नलकूप चालू किए हैं।
नागौर जिले के गांवों में 75 फीसदी घरों में नल लगे हैं। इधर, अधिकारियों का दावा है कि जिले में 67 फीसदी से ज्यादा घरों तक ही नल से पानी पहुंच रहा है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि नागौर, मेड़ता, डेगाना, कुचेरा के कई इलाकों में आज भी नहरी पानी की सप्लाई ठीक से नहीं है। गांव-ढाणियों तक टैंकरों से पानी भेजा जा रहा है। कई जगहों पर ग्रामीण सहयोग राशि एकत्रित कर पानी मंगा रहे हैं।
पम्पिंग स्टेशन का काम तय समय तक पूरा करने का निर्देश है। इसके पूरा होने के बाद नागौर जिले को 148 एमएलडी पानी मिलने लगेगा। उसके बाद शतप्रतिशत नल कनेक्शनों तक जलापूर्ति हो सकेगी।
शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति शतप्रतिशत कराई जा रही है। जहां पर पानी नहीं पहुंच पारहा है, वहां पर टैंकर के माध्यम से जलापूर्ति करा रहे हैं। फिर भी समस्या है तो कंट्रोलरूम में सूचना दे सकते हैं।