
Railway Orders : ट्रेन में सीट कन्फर्म देखकर खुश होने से पहले टिकट पर लिखा नाम भी जरूर पढ़ लीजिए क्योंकि सीट पर आप बैठे हों और टिकट पर नाम किसी और का हो तो टीटीई की नजर पड़ते ही मामला बिगड़ सकता है। दूसरे के नाम का आरक्षित टिकट लेकर सफर करने वाले यात्री को रेलवे बिना टिकट यात्री की तरह माना जा सकता है और फिर जेब से किराया भी जाएगा, जुर्माना भी देना होगा। रेलवे की नया आदेश आया है कि दूसरे व्यक्ति के नाम से जारी आरक्षित टिकट लेकर ट्रेन में सफर करना यात्रियों को भारी पड़ सकता है।
रेलवे का कहना है कि आरक्षित टिकट केवल सीट का नहीं, उस पर दर्ज नाम वाले व्यक्ति की यात्रा का अधिकार है। भाई, दोस्त या परिचित का कन्फर्म टिकट लेकर ट्रेन में बैठ जाना आसान जरूर लग सकता है, लेकिन जांच के दौरान पहचान पत्र से नाम का मिलान होने पर मुश्किल खड़ी हो सकती है। अधिकारियों ने बताया कि कि यात्रा से पहले टिकट पर नाम और अन्य विवरण जरूर जांच लें। कन्फर्म सीट के चक्कर में नियम तोड़ने से बेहतर है अपने नाम का वैध टिकट लेकर ही सफर करें, वरना मंजिल से पहले जेब हल्की हो सकती है।
मामला सिर्फ किराया और जुर्माना चुकाने तक सीमित नहीं है। यदि यात्री निर्धारित राशि जमा नहीं करता है तो रेलवे कानूनी कार्रवाई कर सकता है और बकाया वसूली के लिए न्यायालय की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। नियमों के तहत भुगतान में चूक पर छह महीने तक की कैद, दो हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों की कार्रवाई का प्रावधान है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक हितेश यादव के अनुसार किसी दूसरे व्यक्ति के नाम से जारी आरक्षित टिकट पर यात्रा करना नियमों के खिलाफ है। ऐसे मामलों में रेल अधिनियम-1989 की धारा-142 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। जांच में पकड़े जाने पर टिकट जब्त किया जा सकता है और यात्री से ट्रेन के प्रस्थान स्टेशन से अब तक की यात्रा अथवा पूरी निर्धारित दूरी का किराया वसूला जा सकता है। इसके साथ कम से कम 500 रुपए का अतिरिक्त जुर्माना भी देना होगा।